पुराणों में जल प्रलय का जिक्र आता है. भगवान विष्णु मत्स्य अवतार में राजा वैवस्वत मनु के पास आए. उन्होंने मनु को जलप्रलय की चेतावनी दी. उनकी सलाह पर मनु ने एक बड़ी नौका बनाई. उसमें सभी जीवों के सूक्ष्म शरीर, सभी तरह के बीज और सप्तर्षियों को लेकर बैठ गए. प्रलय आने पर मत्स्य अवतार में भगवान विष्णु ने नाव को खींचकर हिमालय की ऊंची चोटी पर सुरक्षित पहुंचा दिया. इस तरह मनु और उनकी प्रजा जलप्रलय से बच गई.
धरती पर 'महाप्रलय' आ गई तो कहां बचेंगे इंसान? वैज्ञानिकों ने ये 7 देश बताए
साल 2021 में ‘सस्टेनेबिलिटी’ नाम के जर्नल में एक रिसर्च आई थी. उसमें इस बात की स्टडी की गई थी कि अगर पूरी दुनिया पर आपदा आ जाए तो कौन से देश अपने कॉम्प्लेक्स सोशल और टेक्नोलॉजिकल सिस्टम बचाने में सफल रहेंगे.

ये तो हुआ किस्सा. अब सोचिए, वैसा ही जल प्रलय दोबारा आ जाए. या कोई और प्राकृतिक आपदा जो धरती की पूरी मानवजाति को खत्म करने पर आमादा हो. फिर क्या होगा? कहां शरण मिलेगी? वैज्ञानिकों ने इसका जवाब खोजने की कोशिश की है. वैज्ञानिकों ने ऐसे 7 देशों का नाम लिया है, जहां तब मनुष्यों को बचाने के अनुकूल हालात हो सकते हैं, जब कोई प्रलय दुनिया खत्म करने पर उतारू हो. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, दो रिसर्च पेपर्स ने अपनी स्टडी में सात आईलैंड कंट्रीज (देशों) का नाम बताया है.
उनके मुताबिक, यहां सबसे मुश्किल हालात में भी फूड प्रोडक्शन और जीवन संभव हो सकता है. ये देश हैं, न्यूजीलैंड, आइसलैंड, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, आयरलैंड, वानुअतु और सोलोमन आइलैंड.
साल 2021 में ‘सस्टेनेबिलिटी’ नाम के जर्नल में एक रिसर्च आई थी. उसमें इस बात की स्टडी की गई थी कि अगर पूरी दुनिया पर आपदा आ जाए तो कौन से देश अपने कॉम्प्लेक्स सोशल और टेक्नोलॉजिकल सिस्टम बचाने में सफल रहेंगे. वैज्ञानिकों ने नोट्रेडेम यूनिवर्सिटी का ग्लोबल अडेप्टेशन इंडेक्स (ND-GAIN) का इस्तेमाल किया. ये बताता है कि कोई भी देश क्लाइमेट चेंज के लिए कितना तैयार है या फिर उसकी तैयारी कितनी कमजोर है? वैज्ञानिकों ने क्लाइमेट चेंज को सबसे बेहतर एडॉप्ट करने वाले पांच देशों को चुना, जहां मुश्किल हालातों में जीवन संभव था. ये देश थे- न्यूजीलैंड, आइसलैंड, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया और आयरलैंड.
वैज्ञानिकों ने स्टडी किया कि इन देशों में खाना कैसे प्रोड्यूस होता है? एनर्जी के सोर्स क्या हैं? मैन्युफैक्चरिंग की क्या स्थिति है? जियोग्राफिकल लोकेशन कैसी है और क्लाइमेट चेंज से कैसे निपटते हैं? इस स्टडी में न्यूजीलैंड की रैंकिंग सबसे अच्छी रही. इसको 6.5 रेटिंग मिली. वहीं आइसलैंड को 1.2, यूके और ऑस्ट्रेलिया को 1.1 और आयरलैंड को 0.6 रेटिंग मिली.
न्यूजीलैंड का स्कोर सबसे अच्छा रहा, क्योंकि यह दुनिया से काफी अलग-थलग है. साथ ही उनके पास स्थानीय स्तर पर एनर्जी और खेती दोनों मौजूद है. हालांकि रिसर्चर्स के मुताबिक, यहां इंडस्ट्रियल बेस बेहद लिमिटेड है और प्राकृतिक आपदाओं का खतरा भी है. सिर्फ खेती की जमीन के सहारे पूरी आबादी का गुजारा मुश्किल है. दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलिया के पास भी खेती की बड़ी जमीन है, लेकिन उसका बड़ा हिस्सा घास का मैदान है, जहां फसल नहीं उगाई जा सकती.
इसके बाद रिस्क एनालिसिस जर्नल में एक और स्टडी आई. इसमें 38 आईलैंड कंट्रीज (देशों ) को रखा गया. इसमें देखा गया कि अगर न्यूक्लियर वॉर, बड़े ज्वालामुखी या एस्टेरॉयड गिरने के चलते सूरज की रोशनी बेहद कम हो जाए तो क्या होगा? 5.27 और 150 टेराग्राम कार्बन राख (Soot) के लेवल पर देखा गया कि यहां खेती करना और मछली पकड़ना कितना मुश्किल होगा. साथ में 13 और फैक्टर्स की जांच की गई. मसलन- सड़कें, संचार, अस्पताल, राजनीतिक स्थिरता और बिजनेस.
सबसे खराब स्थिति (150 टेराग्राम) के लेवल पर सिर्फ पांच देश रोज 2,200 किलोकैलोरी से ज्यादा खाना प्रोड्यूस कर पाए. ये देश हैं - ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, आइसलैंड, वानुअतु और सोलोमन आइलैंड. इसमें ऑस्ट्रेलिया सबसे आगे रहा. उसके पास खाने का सबसे बड़ा स्टॉक है. रिसर्चर्स के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया के फूड रिजर्व, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य व्यवस्था और डिफेंसिव कैपेसिटी उसको इस लिस्ट में सबसे आगे रखते हैं.
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आयात पर निर्भरता सबसे बड़ा रिस्कऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड खेती में आत्मनिर्भर हैं. लेकिन स्टडी बताती है कि इसके बाजवूद अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर उनकी निर्भरता है. दोनों देश फर्टिलाइजर, मशीनरी, इक्विपमेंट्स और पेट्रोल-डीजल के लिए दूसरे देशों पर निर्भर हैं. ऑस्ट्रेलिया अमेरिका और ब्रिटेन का सहयोगी है, इसलिए न्यूक्लियर वॉर की स्थिति में उनका जोखिम थोड़ा ज्यादा हो सकता है. वहीं इस स्थिति में न्यूजीलैंड की खेती मार खा सकती है. फिर भी उनकी क्षमता इतनी बनी रहेगी, जिससे उनकी जरूरतें पूरी हो सके.
वो सिर्फ दूध पाउडर, चीज और मक्खन का निर्यात रोक दें तो उनकी आबादी की ऊर्जा जरूरतों का 132% हिस्सा पूरा हो जाएगा. हालांकि, एक एक्सपर्ट ने साफ-साफ चेतावनी दी कि न्यूजीलैंड को झूठे दिलासे में नहीं रहना चाहिए. उनके यहां डीजल, कीटनाशक और मशीनों के पुर्जे सब बाहर से आते हैं. साल 2022 में देश की एकमात्र ऑयल रिफाइनरी बंद हो गई. अब यहां रिफाइंड फ्यूल प्रोड्यूस नहीं होता, विदेश से आता है.
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