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रिव्यू- मिर्ज़ापुर: द मूवी

प्राइम वीडियो की पॉपुलर सीरीज़ 'मिर्ज़ापुर' पर बनी 'मिर्ज़ापुर: द मूवी' कैसी है, जानने के लिए पढ़ें ये रिव्यू.

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'मिर्ज़ापुर: द मूवी' की कहानी 2018 में यानी पहले सीजन में सेट है.

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  • 'मिर्ज़ापुर: द मूवी' को निर्माताओं ने वेब सीरीज के तीसरे कमजोर सीजन के बाद फ्रैंचाइज़ी का रीबूट देने के उद्देश्य से बनाया है, जिसमें प्रमुख पात्रों की वापसी और नई कहानी दिखाई गई है।
  • तीसरे सीजन में दर्शकों की रुचि कम होने और परिदृश्य बदलने के कारण, मेकर्स ने फिल्म में सीजन एक के सैटिंग्स को अपनाकर फ्रैंचाइज़ी को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया है।
  • फिल्म के रिलीज़ होने के बाद, इसके क्लाइमैक्स और किरदारों की नई कहानियों ने यह संकेत दिया है कि भविष्य में 'मिर्ज़ापुर' सीरीज के चौथे सीजन या स्पिन-ऑफ के लिए संभावनाएं बनी रहेंगी।

फिल्म- मिर्ज़ापुर: द मूवी
डायरेक्टर- गुरमीत सिंह
एक्टर्स- अली फज़ल, पंकज त्रिपाठी, दिव्येंदु, रसिका दुग्गल, शीबा चड्ढा, श्रिया पिलगांवकर, श्वेता त्रिपाठी, जीतेंद्र कुमार, रवि किशन, सोनल चौहान, मोहित मलिक 
रेटिंग- 3 स्टार्स

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'मिर्ज़ापुर- द फिल्म' को दो तरीके से देखा जा सकता है. पहला पर्सपेक्टिव तो ये है कि इससे जो उम्मीद की गई थी, वो सब ये फिल्म डिलीवर करती है. दूसरा तरीका ये है कि इसे बिना किसी कॉन्टेक्स्ट के एक स्टैंड-अलोन फिल्म के तौर पर देखा जाए. और रियलाइज किया जाए कि ये आज के दौर में सिनेमा के तौर पर कुछ भी नया ऑफर नहीं करती. आपको जो नज़रिया ठीक लगे वो चुन लीजिए. हम दोनों आयामों को एक्सप्लोर करने की कोशिश करेंगे.

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इस शो को फिल्म के तौर पर बनाना स्मार्ट डिसीज़न है. क्योंकि पब्लिक तीसरे सीजन में इस शो से दूर हो गई थी. ऐसे में मेकर्स ने चौथा सीजन लाने की बजाय इस फ्रैंचाइज़ को एक रीबूट देने की कोशिश की है. एक किस्म का कोर्स करेक्शन. क्योंकि मेकर्स को भी मालूम है कि ये सीरीज़ पब्लिक को क्यों पसंद आई थी. इसलिए वो फिल्म की कहानी पहले सीजन में सेट करते हैं. जब शो के सारे मेजर कैरेक्टर्स ज़िंदा थे. वर्चस्व की लड़ाई, वैलिडेशन की भूख, प्रेम की जद्दोजहद, बदला, गोलियों और गालियों से भरपूर गेम ऑफ थ्रोन्स चल रहा था.

इसलिए इस फिल्म के पास कुछ बिल्कुल ही नया कर देने का स्कोप नहीं था. ये फिल्म मुख्यत: फैन सर्विस के लिए बनी है. मगर उसमें भी नो हाफ मेजर्स. जो है फुल फ्लेज्ड. ये फिल्म उन्हीं को अच्छी लगेगी, जिन्हें ये सीरीज़ पसंद है.

इस फिल्म को बनाना, कॉमर्शियल डिसीज़न है या इंटरनल सिस्टम रीबूट का ट्रायल, ये मुझे नहीं मालूम. मगर इस फिल्म को हल्के हाथ से नहीं बनाया गया है. मेनस्ट्रीम कॉमर्शियल सिनेमा बनाना आज के समय में आसान नहीं रह गया. मगर 'मिर्ज़ापुर- द मूवी' के मेकर्स अपने कॉन्टेंट को लेकर कन्विन्स्ड लगते हैं. जिन किरदारों को आप देख रहे हैं, उनकी आगे की कहानी आपको पता है. ये अलग किस्म का इंट्रीग पैदा करता है. स्पॉयलर भी है. मगर फिर भी आप ये कहानी अपनी आंखों के सामने घटते हुए देखना चाहते हैं. यही इस फिल्म की यूएसपी है. यही उसने पिछले 8 सालों और तीन सीजन में कमाया है.

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'मिर्ज़ापुर- द मूवी' अपने कैरेक्टर्स को अच्छा कमबैक देती है. सबके हिस्से, कुछ नए किस्से आए हैं, जिसका ज़िक्र शो में नहीं था. बीना त्रिपाठी इस मामले में फ्रंटरनर हैं. क्योंकि उनके कैरेक्टर का आर्क पूरा होता है. शीबा चड्ढा परफॉरमेंस के लिहाज से स्टैंड आउट करती हैं. क्योंकि वसुधा को पावर और पैसे की भूख है. मगर अपने पति की वजह से रिलक्टेंट होने का ढोंग करती है. वो लोभ शीबा के चेहरे पर दिखता है. बाप, बेटा और अपनी इच्छाओं के बीच पिसती महिला का रोल उन पर फबता है. फिल्म में तीन नए एक्टर्स जुड़े हैं. रवि किशन ने बब्बन यादव नाम के ड्रग डीलर का रोल किया है. जो मुमताज नाम की महिला से बेहद प्रेम करता है. खूंखार और रोमैंटिक के बीच की झूलते रवि किशन को देखने में मज़ा आता है. वो है तो फिल्म का विलन. मगर वो इतने बुरे लोगों के बीच है कि वो कम बुरा लगता है. जितेंद्र कुमार को विक्रांत मैसी की जगह कास्ट किया गया है. उनको देखकर ये नहीं लगता कि कोई बहुत बड़ा बदलाव हुआ है. उन्होंने खुद को उस रोल में फिट कर लिया है. मगर ये फिल्म मोस्टली गुड्डू, मुन्ना और कालीन भैया के इर्द-गिर्द ही घूमती है.

मुन्ना भैया के रोल में दिव्येंदु की वापसी हुई है. उसका रौला अब भी बरकरार है. मगर फिल्म में उसे थोड़ा कम अन-प्रेडिक्टेबल दिखाया गया है. टोन डाउन किया हुआ लगता है. फिल्म में दिव्येंदु और अली फज़ल के सीन्स सबसे मज़ेदार हैं. क्योंकि वो दोनों ऐसे कैरेक्टर्स हैं, जो कहीं भी कुछ भी बोल सकते हैं. फिल्म में एक सीन है, जब गुड्डू और मुन्ना के बीच कार रेस हो रही है. इस बात से नाराज़ होकर कालीन भैया दोनों को टिंचर देते हैं. उनके जाने पर गुड्डू कहता है- "मेरे पापा भी ऐसे ही हैं."

फिल्म कई बार ये कोशिश करती है कि आपको बताया जाए कि गुड्डू और मुन्ना कितने सिमिलर लोग हैं. जब उससे भी बात नहीं बनती, जो बबलू के मुंह से बात सीधे कहलवा दिया जाता है. पब्लिक के भरोसे कुछ नहीं छोड़ना. किसी को दिमाग लगाने की ज़रूरत नहीं है. ईज़ी एंटरटेनमेंट.

फिल्म के क्लाइमैक्स को मेकर्स ने बढ़िया एलीवेशन दिया है. वो वेब सीरीज़ वाले फैन्स को दोबारा से लुभाना चाहते हैं. उन्हें ये बताना चाहते हैं कि अभी बहुत मटीरियल बाकी है. अभी तो बस पेश किया है...

हालांकि अगर इसे कहानी के तौर पर देखें, तो ये 80s वाली फिल्मों के फॉरमूले पर आधारित है. दो भाई हैं, जिनमें नहीं बनती. फिर उनकी फैमिली पर कोई संकट आता है, जिससे निपटने के लिए उन्हें साथ आना पड़ता है. मगर उसे खूब चटखारे लेकर लिखा और एग्जीक्यूट किया गया है. और एक्टर्स ने उसमें पर्याप्त वैल्यू ऐडिशन किया है. इसलिए ये कुछ लंबी होने के बावजूद एक्साइटिंग फिल्म बनी रहती है. 'मिर्ज़ापुर' अपने जॉनर में जो कर सकती थी, वो सब इस फिल्म में किया है. अगर आप कुछ अलग एक्सपेक्ट करके जा रहे हैं, तो निराश होंगे.

ये फिल्म, अपनी वेब सीरीज़ को नया जीवन दे सकती है. जो कि ढुलमुल तीसरे सीजन के बाद ज़ॉनर फटिग का शिकार हो गया था. अब ये देखना इंट्रेस्टिंग होगा कि इस फिल्म के बाद शो के चौथे सीजन से आगे बढ़ाया जाएगा या उसे भी स्पिन-ऑफ वाला ट्विस्ट दिया जाएगा. मैं इस फिल्म को देता हूं 3 स्टार. 

वीडियो: 'मुन्ना भैया' ने बताया 'मिर्ज़ापुर' फिल्म में उनका किरदार कैसे वापस लाया जाएगा

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