अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान की मदद कर रहे देशों को धमकी दी है. उन्होंने साफ किया कि अगर कोई देश ईरान की आर्थिक मदद करता है तो उसके खिलाफ भी प्रतिबंध लगा दिया जाएगा. इस फेहरिस्त में भारत का नाम भी शामिल है. शंघाई कॉर्पोरेशन ऑर्गेनाइजेशन समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से मुलाकात की. अब अमेरिकी मंत्री के बयान को इससे जोड़कर देखा जा रहा है.
PM मोदी और ईरानी राष्ट्रपति की मीटिंग देख भड़का अमेरिका, बोला- अगर डील की तो...
भारत और ईरान के नेता एक-दूसरे से किर्गिस्तान में मिले थे. अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो से एक इंटरव्यू में इस मुलाकात से जुड़ा सवाल पूछा गया कि क्या भारत और ईरान के बीच कोई डील होने वाली है? उन्होंने इसका जवाब धमकी भरे अंदाज में दिया.

1 सितंबर को भारत और ईरान के आलाकमान एक-दूसरे से किर्गिस्तान में मिले थे. इंडिया टुडे के मुताबिक, मार्को रुबियो से एक इंटरव्यू में इस मुलाकात से जुड़ा सवाल पूछा गया कि क्या भारत और ईरान के बीच कोई डील होने वाली है? जिसके जवाब में उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि इंडिया और ईरान के बीच कोई ट्रेड डील हुई है.’
मार्को रुबियो का धमकी भरा बयानउन्होंने इंटरव्यू में आगे बताया कि राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ इकोनॉमिक लड़ाई छेड़ दी है. ट्रंप ने अपने एक पोस्ट में ईरान के खिलाफ ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ चलाने की बात की थी. अब विदेश मंत्री ने भी ये बात दोहराई है.
मार्को रुबियो ने कहा,
‘कोई देश ईरान की उसपर लगे प्रतिबंध हटवाने में मदद न करे. कोई देश ईरान के साथ मिलकर एक ऐसा माध्यम न बना ले जिससे रेवेन्यू जेनरेट हो. क्योंकि ईरान इसका इस्तेमाल आतंक फैलाने और न्यूक्लियर हथियार बनाने के लिए करेगा. और अगर किसी देश ने ऐसा किया तो उसपर भी प्रतिबंध लगा दिया जाएगा.’
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मोदी-पेजेशकियान के बीच क्या बात हुई?किर्गिस्तान में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी और पेजेशकियान ने भारत-ईरान के रिश्तों पर चर्चा की, जिसमें द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने की बात हुई. साथ ही, उन्होंने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और कमर्शियल शिपिंग और नाविकों की सुरक्षा पर भी अपने विचार साझा किए. पीएम मोदी ने एक पोस्ट में बताया कि भारत ईरान के साथ व्यापार बढ़ाना चाहता है.
दूसरी तरफ मसूद पेजेशकियान ने समर्थन और सहयोग के लिए भारत का धन्यवाद किया. और नई दिल्ली से आग्रह किया कि वह पश्चिम एशिया में तनाव कम करने में मदद के लिए अपने राजनयिक संबंधों का इस्तेमाल करे. उनका कहना है कि अमेरिकियों ने युद्ध, असुरक्षा और ताकत के दम पर अपनी मर्ज़ी थोपने का रास्ता चुना है. मगर तेहरान की कोशिश हमेशा से शांति बहाल करने की ही रही है.
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