ईरान के खिलाफ अमेरिका की छह महीने से ज्यादा लंबी सैन्य कार्रवाई अब सिर्फ मिडिल ईस्ट की जंग नहीं रह गई है. इस लड़ाई ने अमेरिकी सेना के हथियारों के भंडार पर ऐसा दबाव डाल दिया है कि वॉशिंगटन को यूरोप और एशिया में तैनात अपने हथियारों और सैन्य संसाधनों को भी मिडिल ईस्ट की तरफ मोड़ना पड़ रहा है. सबसे बड़ी चिंता पैट्रियट और थाड जैसे एयर डिफेंस इंटरसेप्टर को लेकर है.
ईरान पर मिसाइलों की बारिश, अमेरिका का हथियार भंडार खाली हो रहा? चीन और रूस के मोर्चे पर बढ़ी टेंशन
US Missile Shortage: ईरान के खिलाफ लंबी चली अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने Patriot, THAAD और Tomahawk जैसे अहम हथियारों के भंडार पर दबाव बढ़ा दिया है. अमेरिका अब उत्पादन बढ़ाने के साथ यूरोप और एशिया में हथियारों के स्टॉक को लेकर नई रणनीतिक चुनौती का सामना कर रहा है.

एक मिसाइल रोकने में दो-तीन इंटरसेप्टर
India Today की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोकने के लिए हजारों इंटरसेप्टर इस्तेमाल किए हैं. CSIS के विश्लेषण का हवाला देते हुए Reuters ने बताया कि फरवरी से जुलाई 2026 के बीच अमेरिका अपने पैट्रियट इंटरसेप्टर स्टॉक का करीब 65 फीसदी इस्तेमाल कर चुका था. युद्ध से पहले करीब 2,330 पैट्रियट इंटरसेप्टर थे, जिनमें से लगभग 1,500 खर्च हो चुके थे.
मामला सिर्फ संख्या का नहीं, खर्च का भी है. PAC-3 MSE जैसे पैट्रियट इंटरसेप्टर की कीमत कई मिलियन डॉलर तक पहुंचती है, जबकि इन्हें कई बार अपेक्षाकृत सस्ते ड्रोन या मिसाइल को रोकने के लिए इस्तेमाल करना पड़ता है. कुछ मामलों में एक लक्ष्य को गिराने के लिए दो या तीन इंटरसेप्टर तक दागे गए. यानी अमेरिका का हर सफल बचाव उसके हथियार भंडार पर एक और चोट बनता गया.
टॉमहॉक से लेकर थाड तक दबाव
लंबी दूरी की मारक क्षमता वाले हथियार भी तेजी से खर्च हुए हैं. Washington Post के मुताबिक, युद्ध के पहले चार हफ्तों में ही अमेरिका ने 850 से ज्यादा टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें दाग दी थीं. CSIS के अनुमान में बाद में ये संख्या 1,000 से भी ऊपर पहुंच गई. वहीं पैट्रियट और थाड इंटरसेप्टर की वैश्विक उपलब्धता भी युद्ध से पहले के मुकाबले काफी घट गई है.
अमेरिका के सामने असली दिक्कत ये है कि नए हथियार उतनी तेजी से नहीं बन रहे, जितनी तेजी से खर्च हो रहे हैं. पैट्रियट उत्पादन बढ़ाने की कोशिश जारी है. 31 अगस्त को पेंटागन (Pentagon) ने पैट्रियट और थाड के उत्पादन से जुड़े सप्लाई नेटवर्क को मजबूत करने के लिए सात साल के समझौतों की घोषणा की. टॉमहॉक के लिए भी रेथियॉन (Raytheon) को 22.9 अरब डॉलर का सात साल का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया है, जिसका लक्ष्य सालाना उत्पादन को 1,000 से ज्यादा मिसाइलों तक ले जाना है.
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चीन के खिलाफ सबसे बड़ा सवाल
सबसे बड़ा रणनीतिक सवाल एशिया को लेकर है. वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे अमेरिकी सहयोगियों को हथियारों की डिलीवरी में देरी की चिंता बढ़ रही है. ताइवान को करीब 30 अरब डॉलर के स्वीकृत अमेरिकी हथियार अब तक नहीं मिले हैं, जिनमें 882 मिलियन डॉलर के पैट्रियट भी शामिल हैं. वहीं जापान के टॉमहॉक ऑर्डर में भी देरी की आशंका जताई गई है.
यूरोप की स्थिति भी आरामदायक नहीं है. AP ने 27 अगस्त को रिपोर्ट किया कि यूरोप में अमेरिकी और NATO के पैट्रियट स्टॉक को एक अमेरिकी रक्षा अधिकारी ने "बेहद खतरनाक स्तर पर कम" बताया. यानी ईरान के खिलाफ लंबी चल रही जंग अमेरिका को सिर्फ आज के युद्ध में नहीं, बल्कि चीन और रूस के साथ संभावित भविष्य के टकराव में भी मुश्किल स्थिति में डाल सकती है.
वीडियो: अमेरिका ने ईरान पर हमले क्यों रोके, क्या पैट्रियट मिसाइलों की कमी बन रही है वजह?











