‘रिजीम चेंज’ को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच जुबानी जंग जारी है. विजयादशमी के मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने भी 'रिजीम चेंज' का जिक्र कर दिया. उनके मुताबिक, ‘रिजीम चेंज’ एक खतरा है, जिसके जरिए दुनिया की बड़ी ताकतें भारत को कमजोर करना चाहती हैं. भारतीय चुनाव आयोग (ECI) और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी विरोध में 'रिजीम चेंज' यानी सत्ता परिवर्तन की मांग भी उठ रही है. इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के अपने-अपने दावे हैं. RSS चीफ ने इस पर चिंता जताई है.
रिजीम चेंज से कुछ नहीं बदलता, स्वार्थी लोग कर रहे देश तोड़ने की साजिश: मोहन भागवत
RSS चीफ मोहन भागवत ने कहा कि 'रिजीम चेंज' की कोशिशें पूरी दुनिया में होती हैं. भारत में भी ऐसी कोशिशें हो रही हैं, लेकिन देश ऐसा नहीं होने देगा. इस समय मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी विरोध में 'रिजीम चेंज' यानी सत्ता परिवर्तन की मांग भी उठ रही है. इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के अपने-अपने दावे हैं. अब संघ प्रमुख इस पर बोले हैं.

RSS के शताब्दी वर्ष के तहत महाराष्ट्र के नागपुर में 20 अक्टूबर को विजयादशमी उत्सव का आयोजन हुआ. इस दौरान शस्त्र पूजा की गई. विजयादशमी के संबोधन में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने देश-विदेश के बड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी. उन्होंने देश की एकता और एकजुटता का संदेश दिया.
फ्रांस-अल्बानिया का जिक्र क्यों?मोहन भागवत ने कहा कि पश्चिम से एक आंधी चली है. ये हर प्रकार की व्यवस्था, शालीनता, शुभता, और सांस्कृतिक और मानवीय मूल्यों का विरोध करती है. उन्हें नष्ट कर देना चाहती है. उन्होंने आगे कहा,
मोहन भागवत ने रिजीम चेंज पर क्या कहा?"दो-चार दिन पहले से जो समाचार आ रहे हैं, वो सुन लीजिए. फ्रांस में क्या हो रहा है, अल्बानिया में क्या हो रहा है, बांग्लादेश में क्या हुआ, नेपाल में क्या हुआ. ये सब उन्हीं ताकतों का किया कराया है."
सत्ता परिवर्तन पर मोहन भागवत ने कहा,
"वो कहते हैं कि रिजीम चेंज करने से परिस्थिति बदलेगी. लेकिन, ऐसा कभी नहीं हुआ. पहले भी नहीं हुआ. आज भी नहीं हुआ. अपने स्वार्थ का पोषण करने वाले, अपने पिट्ठू सब जगह प्रभावी रहे हैं."
RSS चीफ ने कहा कि ऐसी कोशिशें पूरी दुनिया में चलती हैं. भारत में भी ऐसी कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन देश ऐसा नहीं होने देगा. भारत उन लोगों के टारगेट पर है. लेकिन, पिछले दशकों में भारत दृढ़ नीति पर चला है. देश के मजबूत नेतृत्व और देश पर अभिमान रखने वाली भारत की नई पीढ़ी के सामने भारत को कमजोर करने के खेल बंद हो गए.
मोहन भागवत ने कहा,
आंदोलन पर क्या बोले भागवत?“ये बातें आसुरी ताकतें जानती हैं. इसलिए भारत उनका लक्ष्य है. वे कोशिश करते हैं कि भारत, हिंदू और संघ को किस प्रकार तोड़ेंगे. उनको सहायता भी मिल जाती है. उन्हीं के प्रकृति के कुछ लोग हर जगह हैं. सत्ता के लालच और विवेकहीनता के कारण महत्वाकांक्षी नेता भी उनको मिल जाते हैं.”
सरसंघचालक ने देश में हो रहे आंदोलनों पर भी अपने विचार रखे. उन्होंने कहा कि भारत एक बड़ा देश, जो अभी विकास कर रहा है. उन्होंने आगे कहा कि विकास पूरा होने तक देश में समस्याएं रहेंगी. समस्या होगी, तो आंदोलन भी होंगे. मोहन भागवत ने जोर दिया कि प्रजातंत्र में आंदोलन होते हैं, लेकिन उससे समस्या का समाधान निकलना चाहिए. आंदोलन से देश में किसी भी तरह का मनमुटाव, नफरत, मलाल या बंटवारा पैदा नहीं होना चाहिए.
हमारे पूर्वज एक, एकता बनाकर रखेंभागवत ने कहा कि दुनिया में ऐसी शक्तियां हैं, जो भारत को दबाना चाहती हैं. उनके प्रभाव में आकर हमें उत्तेजित नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा कि 1905 में लॉर्ड कर्जन ने हिंदू-मुस्लिम आधार पर बंगाल का विभाजन किया, जिसे 1911 में वापस लेना पड़ा. लेकिन, 1947 में देश का विभाजन नहीं रुक सका, क्योंकि लोगों के मन में आ गया था कि जो अलग दिखते हैं, वे अलग ही हैं. कट्टरपंथी सांप्रदायिक सोच हावी हो गई थी.
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संघ प्रमुख ने कहा कि हम सभी के पूर्वज एक हैं और हमारी संस्कृति का मूल भी एक है. किसी की अलग पहचान मिटाए बिना सभी को साथ लेकर चलना चाहिए. भारत की परंपरा और विचारों में दुनिया की समस्याओं का समाधान देने की क्षमता है.
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