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डॉनल्ड ट्रंप इस नवंबर होने वाले मिड टर्म चुनाव हार रहे हैं? इस सर्वे ने सब बता दिया

अमेरिका में मिड टर्म चुनाव होने वाले हैं. यानी वो चुनाव, जो तय करेंगे कि अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के दोनों सदनों यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट पर किस पार्टी का दबदबा रहेगा.

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ये सर्वे ट्रंप के लिए बुरी खबर लाया है (courtesy: ITG)

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  • अमेरिका में मिड टर्म चुनाव 3 नवंबर को होंगे, जिनमें कांग्रेस के दोनों सदनों पर किस पार्टी का नियंत्रण रहेगा, यह तय होगा।
  • हाल की सर्वे रिपोर्ट में डेमोक्रेटिक पार्टी ने रिपब्लिकन पार्टी से 12 पॉइंट की बढ़त हासिल की है, जिससे ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग में गिरावट आई है।
  • अगर रिपब्लिकन पार्टी किसी भी सदन का नियंत्रण खो देती है तो ट्रंप के एजेंडा को आगे बढ़ाने में कठिनाई होगी, जिससे राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव आ सकता है।

अमेरिका में मिड टर्म चुनाव होने वाले हैं. यानी वो चुनाव, जो तय करेंगे कि अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के दोनों सदनों - हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट - पर किस पार्टी का दबदबा रहेगा. लेकिन क्या अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप मिड टर्म चुनाव हार रहे हैं? क्या अमेरिका के लोग ट्रंप के कामकाज से खुश नहीं हैं? क्या ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग उनके दोनों राष्ट्रपति कार्यकालों में सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुकी है? क्या अब अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी से आगे निकल चुकी है? एक नई सर्वे रिपोर्ट में यही दावा किया गया है.

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न्यूज एजेंसी Reuters और Ipsos (जो कि एक लीडिंग ग्लोबल मार्केट रिसर्च और पब्लिक ओपिनियन कंसल्टिंग फर्म है) उसके ताजा सर्वे के मुताबिक, 31 फीसदी अमेरिकी ट्रंप के राष्ट्रपति के तौर पर कामकाज को अप्रूव करते हैं. दो हफ्ते पहले यही आंकड़ा 32 फीसदी था. यानी सिर्फ दो हफ्तों में भी ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग एक पॉइंट नीचे आ गई है.

लेकिन सबसे बड़ा झटका रिपब्लिकन पार्टी को मिड टर्म चुनाव में दिख रहा है. लोगों से पूछा गया कि अगर आज कांग्रेस के चुनाव हों तो वो किस पार्टी के उम्मीदवार को वोट देंगे? 47 फीसदी रजिस्टर्ड वोटर्स ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवार को चुना, जबकि सिर्फ 35 फीसदी ने रिपब्लिकन उम्मीदवार को.

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यानी डेमोक्रेट्स को 12 पॉइंट की बढ़त. और ये बढ़त इसलिए भी अहम है क्योंकि करीब दो हफ्ते पहले हुए इसी तरह के सर्वे में डेमोक्रेट्स 44 फीसदी और रिपब्लिकन्स 37 फीसदी पर थे. यानी डेमोक्रेट्स की बढ़त 7 पॉइंट से बढ़कर 12 पॉइंट हो गई.

मिडटर्म चुनाव 3 नवंबर को होने हैं. इन चुनावों में राष्ट्रपति का चुनाव नहीं होता, बल्कि कांग्रेस (संसद) के लिए वोटिंग होती है. लेकिन इन चुनावों का ट्रंप के बचे हुए कार्यकाल पर बड़ा असर पड़ सकता है. अगर रिपब्लिकन पार्टी हाउस या सीनेट में से किसी एक सदन का कंट्रोल भी खो देती है, तो ट्रंप के लिए अपने एजेंडे को आगे बढ़ाना काफी मुश्किल हो सकता है.

ट्रंप से लोग नाराज क्यों?

सर्वे में 68 फीसदी अमेरिकी डॉनल्ड ट्रंप के इकोनॉमी हैंडल करने के तरीके से नाखुश हैं. और दिलचस्प बात ये है कि इसमें रिपब्लिकन वोटर्स भी शामिल हैं. 37 फीसदी रिपब्लिकन खुद ट्रंप की आर्थिक नीतियों को अप्रूव नहीं करते. और अमेरिकियों की परेशानी का एक बड़ा कारण पेट्रोल की कीमतें हैं. ईरान के साथ युद्ध के बाद तेल और गैस की कीमतों पर दबाव बढ़ा. इसका सीधा असर अमेरिकी परिवारों की जेब पर पड़ा. 

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सर्वे में 40 फीसदी लोगों ने कहा कि अर्थव्यवस्था संभालने के मामले में डेमोक्रेट्स बेहतर हैं, जबकि 33 फीसदी ने रिपब्लिकन्स पर भरोसा जताया. ट्रंप और रिपब्लिकन्स के लिए एक और चिंता की बात महिलाओं का वोट है. सर्वे के मुताबिक, 50 फीसदी महिला वोटर्स ने कहा कि अगर आज कांग्रेस का चुनाव हो तो वो डेमोक्रेटिक उम्मीदवार को वोट देंगी. वहीं सिर्फ 32 फीसदी महिलाओं ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों का समर्थन किया.

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अन्य सर्वे का हाल

Pew Research Center के अक्टूबर के सर्वे में ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग 30 फीसदी मिली थी और 68 फीसदी लोगों ने उनके कामकाज को डिसअप्रूव किया था. इस सर्वे में 44 फीसदी वोटर्स ने कहा था कि कांग्रेस के चुनाव में उनका वोट असल में ट्रंप के खिलाफ होगा, जबकि सिर्फ 19 फीसदी ने कहा कि उनका वोट ट्रंप के समर्थन में होगा.

Washington Post, ABC New, और Ipsos के सर्वे में भी ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग 33 फीसदी रही. इसमें 66 फीसदी लोगों ने ट्रंप के कामकाज को डिसअप्रूव किया. पेट्रोल की कीमतों को लेकर भी लोगों की चिंता काफी बढ़ी हुई दिखी.

ट्रंप की राजनीति की सबसे बड़ी ताकत उनका मजबूत समर्थक आधार रहा है. लेकिन मिड टर्म चुनाव में सिर्फ अपने कट्टर समर्थकों को वोट कराने से काम नहीं चलेगा. रिपब्लिकन्स को उन वोटर्स की भी जरूरत होगी, जो 2024 में ट्रंप के साथ थे, लेकिन अब उनकी नीतियों से नाराज हैं. साथ ही स्वतंत्र वोटर्स और महिलाओं जैसे समूह भी कई करीबी मुकाबलों में अहम रोल निभा सकते हैं.

और यही ट्रंप के सामने सबसे बड़ी चुनौती है. क्योंकि अगर वोटर्स इस चुनाव को कांग्रेस के चुनाव की बजाय ट्रंप के कामकाज पर रेफरेंडम की तरह देखने लगे, तो रिपब्लिकन उम्मीदवारों पर भी उसका असर पड़ सकता है.

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