पंजाब के सीएम भगवंत मान ने परविंदर झोटा हत्याकांड की CBI जांच कराने का ऐलान कर दिया है. मामले में शिरोमणि अकाली दल, बीजेपी समेत विपक्ष की तमाम पार्टियां लगातार CBI जांच की मांग कर रहीं थीं. झोटा के परिवार और मामले में बनाई गई एक्शन कमेटी ने भी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेटर लिखते हुए CBI जांच कराने की मांग की थी.
परविंदर झोटा हत्याकांड की जांच CBI करेगी, अमित शाह के दौरे से पहले CM मान का ऐलान
CM भगवंत मान ने परविंदर झोटा हत्याकांड की CBI जांच कराने का ऐलान कर दिया है. उन्होंने X पर लिखा कि परिवार की मांग को स्वीकार करते हुए हम ये केस CBI को सौंप रहे हैं. आज गृह मंत्री अमित शाह भी परविंदर के घरवालों से मिलने वाले हैं.

भगवंत मान ने X पर लिखा,
‘नशे के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे परमिंदर सिंह झोटा के पिता और उनके परिवार के साथ हम हर समय मजबूती से खड़े हैं. परिवार की मांग को स्वीकार करते हुए हम ये केस CBI को सौंप रहे हैं. नशे के सौदागरों के खिलाफ हमारी लड़ाई आरपार की है. पंजाब को नशा मुक्त बनाने के लिए हमें जो भी सख्त कदम उठाने पड़ेंगे, हम पीछे नहीं हटेंगे.’
इसी बीच 20 अक्टूबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के परविंदर झोटा के परिवार से मिलने की भी बात सामने आई है. ऐसे में इस मुलाकात पर भी सबकी नजरें टिकी हुई हैं.
वहीं परिवार ने अभी तक परविंदर का अंतिम संस्कार नहीं किया है. परिवार मामले की CBI जांच कराने की मांग पर अड़ा हुआ था. परिवार चाहता है कि शव का पोस्टमार्टम PGI के डॉक्टरों की टीम से कराया जाए. मामले में बनी इंसाफ कमेटी ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से परविंदर सिंह झोटा को शहीद का दर्जा देने की मांग की है.
साथ ही परविंदर की ओर से बनाई गई एंटी ड्रग टास्क फोर्स के सदस्यों की मांग है कि जिस दुकान के पास उनकी हत्या की गई वहां उनकी एक प्रतिमा लगाई जाए.
रवनीत सिंह बिट्टू का सरकार पर तंजवहीं दूसरी तरफ पूर्व केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने पंजाब सरकार के झोटा केस की जांच CBI को सौंपने पर पलटवार किया है. उन्होंने एक्स पर लिखा,
'अगर पंजाब का दर्द समझा होता तो आज जगह-जगह तस्वीरों पर जूतों की माला नहीं डाली जाती और न ही कालिख पोती जाती. लोगों के भारी विरोध के आगे आखिरकार इस हिटलरी अहंकार को झुकना ही पड़ा. साढ़े चार साल तक पंजाब को ‘चिट्टे’ और गैंगस्टरों के हवाले रखा, लेकिन अब जब दशहरे के मौके पर गृह मंत्री श्री अमित शाह जी पंजाबियों की मांग पूरी करने और चिट्टे को जड़ से उखाड़ने का संकल्प लेने आ रहे हैं, तो उसी डर से अपनी नाकामियां छिपाने के लिए ‘झोटा केस’ को मजबूरी में रातों-रात CBI को सौंप दिया गया. ये इंसाफ नहीं, बल्कि एक डरपोक और भगोड़ी सरकार का ड्रामा है. पंजाब अब बहाने नहीं पूरा हिसाब मांगता है.'
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ये घटना 13 अक्टूबर की है. पंजाब के मानसा में एंटी ड्रग एक्टिविस्ट परमिंदर सिंह झोटा अपने साथियों के साथ शहर की एक केमिस्ट दुकान पर नशा बेचने का खुलासा करने पहुंचे थे. उस दौरान वो अपने मोबाइल से फेसबुक लाइव कर रहे थे.
करीब 12 मिनट तक चले इस लाइव के बाद केमिस्ट ने अपनी लाइसेंसी पिस्टल से झोटा पर अंधाधुंध गोलियां चलाना शुरू कर दिया. उनकी मौके पर ही मौत हो गई. हमले में परविंदर के साथ मौजूद उनके साथी भी घायल हुए. आरोपी केमिस्ट अश्विनी कुमार दुकान बंद कर भाग गया. बाद में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया.
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