अश्विनी वैष्णव. भारतीय राजनीतिज्ञ और पूर्व IAS अधिकारी. UPSC में 27वीं रैंक. IIT कानपुर के स्टूडेंट. 2021 से भारत सरकार के 39वें रेल मंत्री. 55वें संचार मंत्री, और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री. इन सब के साथ 2019 से राज्यसभा सांसद. वैष्णव ने रेल मंत्री के तौर पर ‘कवच’ जैसे सिस्टम को ट्रेन एक्सीडेंट्स रोकने के लिए लागू किया. भारी-भरकम प्रोफाइल में और भी बहुत कुछ है. साथ में है एक सवाल जो हमेशा से रेलवे की नौकरी की तैयारी करने वालों की तरफ से उठाया जाता रहा, कि 2019 के बाद से रेलवे में नौकरी ही नहीं आईं (Ashwini Vaishnaw on Jobs in Railways).
रेलवे में नौकरियों का सवाल आया तो रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने क्या भर्ती प्लान बताया?
रेलवे टेक्नीशियन भर्ती पर रेल मंत्री वैष्णव ने बताया कि हमने चुनाव के मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट की वजह से टेक्नीशियन भर्ती को प्रीपोन किया है. इसलिए ये एग्जाम फरवरी महीने में ही कराया जा रहा है.

अश्विनी वैष्णव से सवाल किया गया कि 2019 से पहले नौकरियां-ही-नौकरियां और भर्ती-ही-भर्ती की बात की जा रही थी. लेकिन कई भर्तियों में देरी हुई, रेलवे को दखल देना पड़ा. रेल मंत्री ने सवाल के जवाब में कहा,
“2004-14 के बीच रेलवे में कुल 4 लाख 11 हजार लोगों को भर्ती किया गया है. 2014 से दिसंबर 2023 के बीच 4 लाख 98 हजार लोगों को रोजगार दिया गया. ये डेटा मैंने संसद में सवाल के जवाब में दिया था. ये डेटा फैक्ट्स पर बेस्ड है.”
वैष्णव ने आगे बताया कि हमें हमेशा से ये साफ था कि चार-चार या पांच-पांच साल में बंच करके भर्ती करने की जो पुरानी प्रक्रिया थी, उसे बदलकर सालाना करना था. 2022 में सरकार ने ये स्पष्ट तौर पर कहा था. उन्होंने बताया,
“सरकार ने ये तय किया था कि जनवरी में लोको पायलट्स की भर्ती. अप्रैल में टेक्नीशियन की. जून में नॉन टेक्निकल कैटेगरी, और अक्टूबर में लेवल 1 की भर्ती निकालेगी. ये प्लानिंग करके पूरा शेड्यूल बनाया गया है. अगले तीन साल के लिए पूरी प्लानिंग हो चुकी है. स्टूडेंट्स को कितना नुकसान होता था इससे. कई स्टूडेंट्स ओवरएज हो जाते थे. या एक साथ एग्जाम का प्रेशर बन जाता था.”
रेलवे टेक्नीशियन भर्ती पर रेल मंत्री वैष्णव ने बताया कि उन्होंने चुनाव के मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट की वजह से टेक्नीशियन भर्ती को प्रीपोन किया है. इसलिए ये एग्जाम फरवरी महीने में ही कराया जा रहा है. जून और अक्टूबर की भर्ती की तैयारी पहले से ही हो गई है. उन्होंने बताया कि जब एक साथ बंच में रिक्रूटमेंट होता है तो ट्रेनिंग में दिक्कत आती है. ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट्स की क्षमता होती है, एक साथ भर्ती होने से उन पर भी प्रेशर पड़ता है. हर साल भर्ती होने से ट्रेनिंग भी बेहतर होगी.
राज्यसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए अश्विनी वैष्णव ने बताया था कि देशभर के 18 रेलवे जोन में 3 लाख 12 हजार नॉन गैजेटेड पोस्ट खाली पड़े हैं. उनसे इससे जुड़ा सवाल किया गया कि क्या सरकार इन पदों पर भर्ती करेगी? इसके जवाब में वैष्णव ने कहा कि पोस्ट लगातार भरी जा रही हैं. कई सारी चीजें बदली भी हैं. डीजल से इलेक्ट्रिकल में शिफ्ट की वजह से कई पोस्ट खत्म हुईं. उनके रिक्रूटमेंट का कोई मतलब नहीं, इसलिए उनको हटाना होगा.
वीडियो: रेल मंत्री के इस ऐलान से क्या रेलवे परीक्षार्थियों की समस्या सुलझेगी?









