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'स्वर्ग' का सपना दिखाकर 190 बच्चे मरवा दिए, जंगल में 400 शव मिले थे, केन्या का पादरी दोषी करार

Paul Mackenzie Shakahola Forest Massacre: इस मामले को ‘शाकाहोला जंगल नरसंहार’ के नाम भी जाना जाता है. क्योंकि मैकेंजी शाकाहोल जंगल में रहता था. वहां से पुलिस को 400 से ज्यादा शव मिले थे.

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धर्मगुरु पॉल मैकेंजी पहले एक टैक्सी चलाता था. (Courtesy: Reuters)

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  • केन्या के धर्मगुरु पॉल मैकेंजी को 190 बच्चों सहित कई लोगों को भूखा मारने और हत्या का दोषी ठहराया गया है, जिसमें अदालत ने 28 अन्य लोगों को भी दोषी माना है।
  • पॉल मैकेंजी ने अपने अनुयायियों को सख्त उपवास कराते हुए उन्हें भूखा रहने को कहा था और स्वर्ग का सपना दिखाकर उनके इस कृत्य को प्रेरित किया था, जो COVID-19 महामारी के दौरान हुआ।
  • इस घटना के बाद केन्या में धार्मिक संगठनों पर निगरानी बढ़ाने की मांग उठी है और 6 नवंबर को पॉल मैकेंजी और अन्य आरोपियों की सजा सुनाई जाएगी।

केन्या के एक कथित धर्मगुरु पॉल मैकेंजी को 190 बच्चों की हत्या का दोषी ठहराया गया है. उस पर स्वर्ग का सपना दिखाकर ‘बच्चों को भूखा मारने’ का आरोप लगा था. मृतकों में एक वयस्क भी शामिल था. अदालत ने मैकेंजी के साथ 28 अन्य लोगों को भी मामले में दोषी माना है. 6 नवंबर को उन्हें सजा सुनाई जाएगी.

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इस मामले को ‘शाकाहोला जंगल नरसंहार’ (Shakahola Forest Massacre) के नाम भी जाना जाता है. क्योंकि मैकेंजी शाकाहोल जंगल में रहता था. वहां से पुलिस को 400 से ज्यादा शव मिले थे. अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट् के मुताबिक पॉल मैकेंजी लोगों से कहता था कि अगर वे दुनिया खत्म होने से पहले ‘भूखे रहने लगें तो स्वर्ग पहुंच जाएंगे, जीसस से मिलेंगे'.

पॉल मैकेंजी पहले एक टैक्सी ड्राइवर था. उसने 2003 में केन्या में 'गुड न्यूज इंटरनेशनल चर्च' शुरू किया, जिससे समय के साथ हजारों लोग जुड़ गए. आरोप है गुड न्यूज इंटरनेशनल चर्च के जरिए ईसाई धर्म के नाम पर ऐसा ग्रुप चलाया जा रहा, जो ‘दुनिया के खत्म’ होने की बात करता था. COVID-19 महामारी के बहाने उसकी 'दुनिया के अंत' वाले प्रचारों को बढ़ावा मिला. उसने और उसके गुट के सदस्यों ने लोगों को सख्त उपवास करने के लिए मजबूर किया. आलम ये था कि माता-पिता को अपने बच्चों को खाना खिलाने से भी मना कर दिया गया था. उसने लोगों को यकीन दिलाया कि वो ‘भगवान’ से बात कर सकता है. 

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क्या है शाकाहोला जंगल नरसंहार?

इंटरनेशनल न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक, पॉल मैकेंजी के इस संप्रदाय का खुलासा 2023 में हुआ था. तब मैकेंजी मालिंदी में अपना चर्च बंद कर सैकड़ों अनुयायियों के साथ शाकाहोला जंगल में चला गया था. कुछ समय बाद उसके अनुयायियों के लापता होने की खबर आने लगी. पुलिस तक मामला पहुंचा.

पुलिस अधिकारी जांच के लिए जंगल में गए. वहां उन्हें कई अनुयायी कमजोरी की हालत में मिले. कुछ कब्रें मिलीं. इसके बाद शव मिलने का सिलसिला शुरू हुआ. बताया गया कि अब तक 400 से ज्यादा शव मिल चुके हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ लोगों की मौत भूखे रहने से हुई. लेकिन कई मौतें दम घुटने, गला घोटे जाने या सिर पर चोट लगने की वजह से हुईं. अन्य मौतों का कारण पता नहीं लग सका.

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खाना खाने पर होती थी पिटाई

मामले में पुलिस ने पॉल मैकेंजी को गिरफ्तार कर लिया. आरोप लगा कि उसने अपनी पत्नी और दर्जनों करीबी अनुयायियों के साथ मिलकर हत्या की. बाद में कुछ अनुयायी अदालत में गवाह भी बने. हालांकि, उसने सभी आरोपों से इनकार किया. उसने कहा कि लोगों को फास्ट रखने के लिए मजबूर नहीं किया गया था. लेकिन अब जस्टिस डायना कावेद्जा मोचाचे ने उसे दोषी माना है.

कोर्ट ने पाया कि 'मरने तक भूखा रहने' का आदेश सबसे पहले बच्चों पर लागू किया गया था. उन्हें भागने से रोकने के लिए गार्ड तैनात किए गए थे. जो लोग भागने या खाना खाने की कोशिश करते उनकी पिटाई की जाती थी. पॉल मैकेंजी ने अपने अनुयायियों को स्कूल और स्वास्थ्य सेवाओं से दूर रहने के लिए भी कहा था. इस घटना के बाद केन्या में चर्च और दूसरे धार्मिक संगठनों पर सख्त निगरानी रखने की मांग उठी है. 

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