राहुल गांधी अमेठी और वायनाड, दो सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं. उन्होंने वायनाड से नॉमिनेशन पेपर भरा. इसके बाद प्रियंका गांधी ने उनके लिए एक इमोशनल ट्वीट किया (फोटो: ट्विटर+ रॉयटर्स)
राहुल गांधी ने वायनाड से पर्चा भरा. प्रियंका गांधी को अपने भाई पर प्यार आया. उन्होंने एक इमोशनल ट्वीट में भाई के लिए अपना प्यार जताया. और वायनाड से अपने भाई का ध्यान रखने की अपील की. अब चुनाव के टाइम जनता कैसे ध्यान रखेगी नेता का? जाहिर है, वोट देकर. प्रियंका के लिखे का हिंदी अनुवाद यूं है-
मेरा भाई, मेरा सबसे सच्चा दोस्त और मैंने जितने लोग देखे आज तक, उनमें से सबसे बहादुर इंसान. वायनाड, इसका खयाल रखना. वो तुमको निराश नहीं करेगा.
ट्वीट में दिक्कत कैसे?
प्रियंका के इस ट्वीट में बहन का दिल है. मगर, उनकी ये इमोशनल अपील राहुल के लिए झमेला हो सकती है. क्यों? क्योंकि राहुल दो सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं. एक, अमेठी. दूसरा, वायनाड. चलो, सोच लेते हैं एक मिनट को कि राहुल दोनों सीटों से जीत गए. फिर? कोई तो एक सीट छोड़ेंगे. यही नियम है. वो एक सीट कौन सी होगी, जो छोड़ी जाएगी. अमेठी कि वायनाड? अब अगर प्रियंका वादा कर रही हैं वायनाड से कि राहुल उन्हें निराश नहीं करेंगे, तो अमेठी के लिए दिक्कत है. क्योंकि वायनाड से साथ निभाने के लिए राहुल को अमेठी का साथ छोड़ना होगा.
जैसे 2014 में नरेंद्र मोदी ने वडोदरा सीट जीती और फिर छोड़ दी
दो सीटों से चुनाव लड़ने वाले न तो पहले नेता हैं राहुल, न आखिरी. नेताओं को ये सहूलियत मिलती है. 2014 में नरेंद्र मोदी भी दो सीटों से चुनाव लड़े थे. वाराणसी और वडोदरा. वो दोनों से जीते और फिर वडोदरा सीट छोड़ दी. जबकि वडोदरा ने बड़े जोर-शोर से उनके लिए वोट किया था. कुल 70.57 फीसद वोटिंग हुई थी वहां. नरेंद्र मोदी को कुल 8,45,464 वोट मिले थे. वो 5,70,128 वोटों से जीते भी. गांधी फैमिली में भी राहुल से पहले उनकी दादी इंदिरा गांधी ने 1978 में चिकमंगलूर से इलेक्शन लड़ा था. इसके बीस बरस बाद 1998 में सोनिया ने भी बेल्लारी से चुनाव लड़ा. बतौर सेकंड सीट. ऐसे तमाम मामलों में नेता दोनों सीटों की जनता से वादा करते हैं. कोशिश करते हैं, दोनों जगहों से जीत जाएं. और अगर दोनों ही सीटों से जीत जाएं, तब भी एक जगह से किया वादा तो टूटता ही है.
नुकसान कैसे हो सकता है?
भाजपा का जोर इस बात को प्रचारित करने में होगा कि राहुल गांधी दोनों जगह से जीतने पर अमेठी छोड़ सकते हैं और इस वजह से अमेठी के लोग राहुल गांधी की जगह स्मृति ईरानी को वोट करें. भाजपा और स्मृति ईरानी अपनी बात को पुख्ता करने के लिए प्रियंका गांधी के ट्वीट का सहारा ले सकते हैं और इस बात का अंदाजा प्रियंका गांधी को भी नहीं होगा.
स्मृति ईरानी ने कहा भी है,
राहुल जी ने आज तक किस का साथ निभाया? महागठबंधन ने उनका साथ छोड़ दिया, ममता जी उनको तवज्जो नहीं देतीं, आज लेफ्ट की पीठ पर छुरा भोंक दिया, जिन के सहारे वह सत्ता का सुख भोग चुके हैं. तो राहुल गांधी ना अपनो के हुए ना परायों के.
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