किया गया. अखबार ‘द ट्रिब्यून’ ने स्थानीय चश्मदीदों के बयान के आधार पर यह खबर दी थी. मीडिया में आई तस्वीरों में खेतों में जहां-तहां बिखरे कपड़े देखे गए. पर ये भी खबर आई कि रेप हुए ही नहीं थे.
पर पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट इस मामले की निगरानी कर रहा था. 19 जनवरी 2017 को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने ये कहा कि गवाहों के बयान ये इशारा करते हैं कि जाट आंदोलन के दौरान मुरथल में गैंगरेप हुए थे. कोर्ट ने मामले की जांच कर रही SIT को झिड़की दी और कहा कि लोगों का भरोसा बना रहे इसके लिए ज़रूरी है कि दोषी पकड़े जाएं.

गैंगरेप की शिकार महिलाओं के कपड़े यहां-वहां बिखरे पड़े थे.
कोर्ट को ऐसा इसलिए कहना पड़ा क्योंकि पुलिस ने जिन लोगों को पकड़ कर गैंगरेप का आरोपी बताया था, उनके खिलाफ सबूत नहीं मिले हैं. उनके ब्लड सैंपल मुरथल में बलात्कार के शिकारों के कपड़ों पर मिले वीर्य (सीमेन) के सैंपल से मैच नहीं हुए. इसलिए इन पर लगे आरोपों में से रेप का चार्ज खत्म किया जाने वाला था. इस मामले में कोर्ट की मदद कर रहे अनुपम गुप्ता ने यहां तक कह दिया था कि SIT जानबूझ कर ढीला रवैया अपना रही है ताकि आरोपी छूट जाएं और मामला रफा-दफा हो जाए.
कोर्ट ने वहां मौजूद CBI के वकील से ये पूछा कि क्या वे मामले की जांच करने को तैयार हैं. उनका जवाब था कि CBI को कोर्ट से आदेश मिला तो वे उसका पालन करेंगे.
अब तक क्या हुआः
शुरुआत में पुलिस ने इसे अफवाह बताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की. ये भी कहा गया कि पुलिस बलात्कार की शिकार औरतों से इज़्जत की खातिर चुप रहने को कह रही थी. लेकिन फिर अखबारों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर गैंगरेप की शिकार लड़कियों की आपबीती के किस्सेआए. तब पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने ‘सुओ मोटो’ यानी खुद ही मामले की जांच चालू करवाई थी. मामले पर हंगामा हुआ तो पुलिस ने SIT
को मामला सौंप दिया.

पहली FIR 30 मार्च को दिल्ली की बॉबी जोशी ने दर्ज करवाई थी. मोलेस्टेशन का आरोप लगाते हुए उन्होंने बताया था कि वो रेप के दौरान मौजूद थीं. अप्रैल में दो और लड़कियों ने पुलिस को बिना नाम की चिट्ठी लिखकर बताया कि मुरथल में उनके साथ भी बलात्कार हुआ था. इनमें से एक लड़की NRI थी. इसके बाद जाकर पुलिस ने माना
कि उस दिन वहां गैंगरेप हुए थे. तब जाकर आंदोलन के समय दर्ज हुई FIR में रेप की धारा जोड़ी.
मामले की अगली सुनवाई 28 फरवरी को होगी.










