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गुमनाम चिट्ठी ने बताया, प्रोफेसर ने बीमार मां को कैसे ठिकाने लगाया

तीन महीने पहले बंद हो चुके केस में सामने आया ये सच.

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दो महीने पहले ब्रेन हैमरेज हुआ था.
गुजरात का राजकोट. गांधीग्राम के दर्शन अपार्टमेंट में रहने वाला एक संपन्न परिवार. जयश्रीबेन पेशे से टीचर थीं. परिवार में दो बेटियां और एक बेटा. दो महीने पहले ब्रेन हैमरेज हुआ. जयश्रीबेन इससे बिस्तर पर पड़ गईं. फिर अचानक खबर आई कि जयश्री ने छत से कूदकर जान दे दी. बेटे संदीप ने बताया कि मां सूर्य को जल चढ़ाने छत पर गईं थी और वहीं से नीचे गिरकर उनकी मौत हो गई. पुलिस ने भी दुर्घटना मान, फाइल बंद कर दी.
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सीसीटीवी फुटेज में दिखा कि संदीप मां को छत पर ले जा रहा है.

फिर एक दिन पुलिस को एक गुमनाम चिट्ठी मिली. इसमें घटना का पूरा सच लिखा हुआ था जिसके अनुसार जयश्रीबेन छत से दुर्घटनावश नहीं गिरीं. बल्कि बेटे संदीप ने छत पर ले जाकर फेंक दिया था. पुलिस ने दोबारा फाइल खोली और जब संदीप से सख्ती से पूछा तो सच सामने आया. घटना 27 सितंबर 2017 की है मगर इस केस में 4 जनवरी को खुलासा हुआ कि संदीप के दो महीने से बीमार होने के चलते तंग आ गया था और उसकी मां और पत्नी में बनती नहीं थी. जिसके चलते वो मां को छत पर सूर्य को जल चढ़ाने के लिए ले गया और फिर मौका पाते ही धक्का दे दिया.
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संदीप पेशे से प्रोफेसर है.

पुलिस ने घर में लगे सीसीटीवी फुटेज में पाया कि संदीप मां को पकड़ कर ले जा रहा है. कुछ ही दिन पहले जयश्री का ऑपरेशन हुआ था और फुटेज में दिख रहा था कि वो चलने की हालत में नहीं है और उन्हें संदीप जबरन सीढ़ियां चढ़ा रहा है. पुलिस ने जब पूछा कि लाचार मां 2.5 फीट ऊंची रेलिंग पर कैसे चढ़ गई, तो यहीं संदीप फंस गया और उसने अपना गुनाह कबूल लिया.
संदीप ने कबूला कि वो मां की बीमारी से तंग आ गया था. अब वो हिरासत में है.


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