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'He's Back', 'एक्स' पर वीकीलीक्स के 3 शब्दों वाले मैसेज से खलबली क्यों मच गई?

WikiLeaks के संस्थापक जूलियन असांजे 17 सितंबर 2026 को X पर फिर एक्टिव हुए. 2006 से शुरू हुई WikiLeaks की कहानी, बड़े military leaks, Sweden से लेकर अमेरिका तक की कानूनी लड़ाई और 2024 का plea deal. सब मिला दें तो असांजे की कहानी पर एक सुपरहिट फिल्म बन सकती है.

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अफगानिस्तान के लीक्स को दिखाते जूलियन असांजे (COURTSEY- X)

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  • 24 जून 2024 को विकीलीक्स ने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से जूलियन असांजे की वापसी की घोषणा की, जिसे दुनिया भर की राजनीतिक ताकतों ने गंभीरता से लिया।
  • जूलियन असांजे ने 2006 में विकीलीक्स की स्थापना की, जिसने सरकारी और सैन्य गोपनीय दस्तावेज़ों को उजागर कर कई देशों की नीतियों और युद्धों पर सवाल खड़े किए।
  • असांजे की गिरफ्तारी, कानूनी लड़ाई और अंततः 2024 में अमेरिका से समझौते के बाद उनकी रिहाई हुई, जिससे भविष्य में और गोपनीय सूचनाओं के प्रकाशन की संभावना बनी।

एक आदमी, एक वेबसाइट और कुछ ऐसे राज, जो जब खुले तो दुनिया भर की हुकूमतें हिल गईं. 24 जून 2024 की रात सोशल मीडिया पर एक पोस्ट आया. महज तीन शब्द लिखे थे. 'He's back.' यानी ‘वह वापस आ गया है.’ यह पोस्ट किसी आम अकाउंट से नहीं, बल्कि 'विकीलीक्स' के ऑफिशियल हैंडल से था. और जिस शख्स की वापसी का यह ऐलान था, उसका नाम है जूलियन असांजे. यह तीन शब्दों का संदेश आते ही वाशिंगटन से लेकर लंदन तक के राजनीतिक गलियारों में सिहरन दौड़ गई. एक तरफ जहां अभिव्यक्ति की आजादी के समर्थकों के चेहरे खिल उठे. वहीं दूसरी तरफ दुनिया के सबसे ताकतवर मुल्क अमेरिका के माथे पर बल पड़ गए. लेकिन ऐसा क्यों हुआ, जानने के लिए जरा पीछे चलते हैं. 

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कहानी Wikileaks की

21वीं सदी के 6 साल ही बीते थे. इंटरनेट अपने घुटनों पर चल रहा था. इसी बीच एक वेबसाइट का जन्म होता है. सीधी-सादी वेबसाइट. 15 - 20 टैब्स. कुछ डॉक्युमेंट्स और कुछ फाइलें लेकिन इन फाइलों के अंदर ऐसी कहानियां थीं, जिनका बाहर आना कई ताकतवर लोगों के लिए मुसीबत बनने वाला था. ये अमेरिकी सेना और खुफिया एजेंसियों से जुड़े डॉक्युमेंट्स थे. जंग के मैदान से आए ऐसे कागज़ जिन्होंने दुनिया को वो तस्वीर दिखाई जिनमें ह्यूमन राइट्स का झंडा बुलंद करने वाले ‘अंकल सैम’ (USA) का सबसे घिनौना चेहरा छुपा था. सिर्फ अमेरिका ही नहीं विकीलीक्स ने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से जुड़े दस्तावेज और ईमेल सामने लाने शुरू किए. 

हॉलीवुड से लेकर बॉलीवुड और सऊदी अरब से लेकर अपने देश भारत तक. सबसे जुड़े कई खुलासे हुए. पेशे से पत्रकार असांजे ने मीडिया तक को नहीं छोड़ा. एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि पिछले 50 साल के युद्धों के पीछे सबसे बड़ी वजहों में मीडिया और उसके झूठ रहे. यानी उनके मुताबिक जंग सिर्फ बंदूकों से नहीं लड़ी जाती. नैरेटिव से भी लड़ी जाती है. इन बातों और खुलासों ने असांजे और विकीलीक्स पर दुनिया को दो हिस्सों में बांट दिया. असांजे पर कई आरोप भी लगे. 

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तो चलिए जानते हैं जूलियन असांजे और उनकी वेबसाइट विकीलीक्स के तथाकथित खुलासों के बारे में. 

अपाचे हेलीकॉप्टर के वीडियो ने तहलका मचाया

साल 2006 की जूलियन असांजे ने विकीलीक्स की शुरुआत की. इसका आइडिया सीधा था. इंटरनेट पर एक ऐसा ठिकाना बनाना, जहां दुनिया के किसी भी कोने में बैठा कोई भी whistleblower कॉन्फिडेंशियल डाक्यूमेंट्स बिना अपनी पहचान बताए पहुंचा सके. जो सीधा जनता तक पहुंचे. कोई सरकारी बाबू हो, सेना का जवान हो या किसी बड़ी संस्था के अंदर काम करने वाला. अगर उसके पास ऐसा डाक्यूमेंट्स है, जिसे वो दुनिया के सामने लाना चाहता है तो वो अपनी पहचान छिपाकर उसे दुनिया के सामने ला सकता है. शुरुआती कुछ सालों तक विकीलीक्स लाखों वेबसाइट की भीड़ में गायब रही. 

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विकीलीक्स पर सामने आया अपाचे हेलीकॉप्टर से लिया गया वीडियो (COURTSEY- Wikileaks)

फिर एक वीडियो सामने आया और सब कुछ बदल गया. विकीलीक्स ने एक अमेरिकी Apache हेलिकॉप्टर का वीडियो पब्लिक कर दिया. वीडियो में इराक की राजधानी बगदाद की एक सड़क थी. लोगों का एक ग्रुप था, जिन पर अमेरिकी हेलिकॉप्टर से गोलीबारी होती दिखाई दे रही थी. इस घटना में कई लोग मारे गए थे. इनमें Reuters के दो जर्नलिस्ट भी शामिल थे. विकीलीक्स ने इस वीडियो को “Collateral Murder” नाम दिया. वीडियो दुनिया भर में तेजी से फैल गया.

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अमेरिका को खटकने लगा Wikileaks 

अब दुनिया अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसियों की नजरें जूलियन असांजे और उनकी वेबसाइट विकीलीक्स पर थीं. लेकिन कहानी अब सिर्फ कॉन्फिडेंशियल डाक्यूमेंट्स और खुलासों की नहीं रही. असांजे की मुश्किलें हर नए खुलासे के साथ बढ़ने लगी. अगस्त 2010 में स्वीडन की पुलिस ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया. आरोप दो अलग-अलग सेक्शुअल असॉल्ट का था. ये आरोप असांजे के स्टॉकहोम दौरे के समय उनसे मिली दो औरतों ने लगाए थे. असांजे ने ख़ुद पर लगे आरोपों को गलत और पॉलिटिकली मोटिवेटेड बताया. 

मामला आगे बढ़ा और दिसंबर 2010 में असांजे लंदन पहुंचे. यहां उन्होंने खुद पुलिस के सामने सरेंडर किया. उन्हें गिरफ्तार किया गया और बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया. इसके बाद शुरू हुई एक लंबी कानूनी लड़ाई. एक तरफ स्वीडन का गिरफ्तारी वारंट. दूसरी तरफ ब्रिटेन की अदालतें और बीच में जूलियन असांजे. सवाल था- क्या असांजे को स्वीडन भेजा जाएगा, जहां उन पर लगे आरोपों को लेकर उनसे पूछताछ होनी थी? 

मामला ब्रिटेन की अदालतों तक पहुंचा. मई 2012 में UK सुप्रीम कोर्ट ने भी असांजे के खिलाफ फैसला दिया. तय किया कि उन्हें स्वीडन भेजा जा सकता है. लेकिन असांजे ने ऐसा होने नहीं दिया. फैसला आने के अगले ही महीने जून 2012 में वो लंदन में मौजूद इक्वाडोर की एम्बेसी पहुंच गए. सीन पूरा फिल्मी था. भेस बदल कर एम्बेसी के गेट पर पहुंचे. खुद को कुरियर बॉय बताया. जैसे ही अंदर घुसे असायलम की मांग रख दी. इक्वाडोर की एम्बेसी ने उन्हें शरण भी दी. 
 

Julian Assange
इक्वाडोर की एम्बेसी की बालकनी में जूलियन असांजे (COURTSEY- X)

इसके बाद एम्बेसी की बालकनी से असांजे मीडिया और अपने सपोर्टर्स से मिलने आए. ये फोटो दुनिया भर में वायरल हुई. उसी बालकनी से अमेरिका को सीधी चुनौती दी. उन्होंने अमेरिका से WikiLeaks और अपने खिलाफ चल रही कार्रवाई को बंद करने को कहा. लगभग सात साल तक इक्वाडोर की एम्बेसी ही उनका ठिकाना थी. ये दुनिया के आगे सुपरपॉवर बनते देशों को चिढ़ाने जैसा था. क्योंकि ये एम्बेसी लंदन पुलिस हेडक्वाटर से महज़ दो किलोमीटर दूर थी. 

2012 से 2019 तक असांजे इसी दूतावास के अंदर रहे. बाहर निकलते तो गिरफ्तारी का खतरा था लेकिन मई 2017 में स्वीडन ने असांजे पर चल रहे सभी केसेस को पूरी तरह बंद करने का ऐलान कर दिया लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई.

इक्वाडोर सरकार के ही खिलाफ चले गए असांजे

एम्बेसी के अंदर असांजे की हालत लगातार खराब हो रही थी. अक्टूबर 2018 तक इक्वाडोर ने उनके लिए नए और बेहद सख्त house rules लागू कर दिए. उसी महीने ये भी सामने आया कि असांजे ने इक्वाडोर की सरकार के खिलाफ ही कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है. उनका आरोप था कि सरकार उनके “अधिकारों और आज़ादी” को खत्म कर रही है. अब पानी में रहकर मगरमच्छ से बैर कौन ही करता है. लेकिन असांजे ने किया. क्योंकि असांजे एम्बेसी की चारदीवारी के अंदर अपनी आज़ादी बचाने की कोशिश कर रहे थे. उसी समय पर्दे के पीछे अमेरिका अपनी चाल चल रहा था. 

नवंबर 2018 में खबर आई कि अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ़ जस्टिस ने असांजे के खिलाफ आपराधिक आरोप दाखिल कर दिए. इसमें बड़ी बात ये थी कि यही नहीं बताया गया कि आरोप क्या लगाए हैं. उन्हें सील करके रखा गया था. अमेरिका उनके खिलाफ एक बिल्कुल नई कानूनी लड़ाई की तैयारी कर चुका था. फिर आया अप्रैल 2019. इक्वाडोर ने असांजे का पॉलिटिकल असायलम खत्म कर दिया. लंदन की मेट्रोपोलिटन पुलिस सादे कपड़ों में इक्वाडोर की एम्बेसी में घुसी. असांजे को खींचती हुई बाहर ले आई. वजह थी 2012 में मिली बेल की शर्तों का उल्लंघन करना. इसके बाद उन्हें लंदन की हाई-सिक्योरिटी वाली जेल बेलमार्श प्रिज़न ले जाया गया. 

50 हफ्ते की सजा सुनाई गई

मई 2019 में जूलियन असांजे की कानूनी मुश्किलें और बढ़ गईं. ब्रिटिश अदालत ने बेल की शर्तों तोड़ने के आरोप में उन्हें 50 हफ्ते की जेल की सजा सुनाई. इसी महीने अमेरिका ने उन पर एस्पिनाज एक्ट के तहत 17 नए आरोप लगाए, जिससे अमेरिका में उनके खिलाफ कुल 18 मामले हो गए. इसी दौरान स्वीडन ने भी यौन उत्पीड़न की पुरानी जांच दोबारा शुरू कर दी. यानी असांजे एक साथ ब्रिटेन की जेल, अमेरिका के extradition case और स्वीडन की जांच का सामना कर रहे थे. 

नवंबर 2019 में स्वीडन की जांच बंद हो गई. लेकिन अमेरिका को एक्स्ट्राडिशन किए जाने की लड़ाई कई साल तक चलती रही. जनवरी 2021 में ब्रिटिश अदालत ने अमेरिका की एक्स्ट्राडिशन रिक्वेस्ट खारिज कर दी. अदालत ने अमेरिकी जेल में असांजे की हालत, उनकी मेंटल हेल्थ को लेकर चिंता जताई. अमेरिका ने इस फैसले को चुनौती दी और दिसंबर 2021 में अपील में उसे सफलता मिली. जून 2022 में ब्रिटिश सरकार ने असांजे को अमेरिका एक्सट्रैडाइट करने का आदेश दे दिया. इसके बाद भी असांजे के वकील लगातार कानूनी अपील करते रहे. 

फरवरी 2024 में उन्होंने England और Wales की High Court में एक और अपील दाखिल की. मई में अदालत ने उन्हें एक्स्ट्राडिशन के खिलाफ नई अपील का अधिकार दे दिया. लेकिन इसके बाद मामला अदालत में आगे बढ़ने के बजाय समझौते की तरफ चला गया. 19 जून 2024 को असांजे ने अमेरिका के साथ प्ली एग्रीमेंट यानी समझौता साइन किया. अंत में 24 जून 2024 को असांजे ब्रिटिश जेल से रिहा कर दिए गए. अगले दिन 25 जून को अमेरिका में चल रहा मामला भी सेटल हुआ. 

अब असांजे आज़ाद थे. 26 जून 2024 को अपने देश Australia की राजधानी कैनबरा पहुंचे. यहां उनका परिवार उनका इंतजार कर रहा था. करीब एक दशक लंबी चली कानूनी लड़ाई आखिरकार खत्म हुई. अब सवाल ये है कि असांजे ने ऐसा क्या किया था? जो उन्हें लगभग डेढ़ दशक जेल या जेल जैसे माहौल में काटने पड़े.

विकीलीक्स के बड़े खुलासे? 

नवंबर 2007: ग्वांटानामो बे की जेल के लिए बना एक Special Operating Procedure यानी SOP लीक हुआ. ये SOP 2003 में ग्वांटानामो बे में तैनात अमेरिकी सैनिकों के लिए था. ग्वांटानामो बे क्यूबा में मौजूद अमेरिकी मिलिट्री बेस है. 9/11 हमले के बाद अमेरिका ने यहां एक डिटेंशन सेंटर बनाया, जहां आतंकवाद के आरोपों में पकड़े गए लोगों को रखा गया. लीक हुए डॉक्युमेंट्स से पता चला कि अमेरिकी सेना ने कैदियों को छिपाकर रखा. कैदियों को टॉर्चर भी किया. इस लीक के बाद अमेरिका और तब के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश की काफी फ़ज़ीहत हुई. 

अप्रैल 2010: विकीलीक्स ने इराक की राजधानी बगदाद में अमेरिकी हेलीकॉप्टर के हमले का वीडियो जारी किया. 

जुलाई 2010 में विकीलीक्स ने ‘The Afghan War Logs’ नाम से 75,000 से ज्यादा कॉन्फिडेंशियल डॉक्यूमेंट जारी किए. इनमें अफगानिस्तान में अमेरिकी और दूसरी विदेशी सेनाओं की मिलिट्री ऑपरेशन्स की डिटेल थी. डाक्यूमेंट्स में ऐसे कई मामलों की इंफॉर्मेशन थी, जिसमें अमेरिकी सेना ने आम बेकसूर लोगों को मारा. इनमें ओसामा बिन लादेन की तलाश और उसे पकड़ने की कोशिशों से जुड़ी खुफिया जानकारी भी शामिल थी.

अक्टूबर 2010 में विकीलीक्स ने ‘Iraq War Files’ के नाम से इराक युद्ध से जुड़े करीब 4 लाख कॉन्फिडेंशियल डाक्यूमेंट्स पब्लिक कर दिए. 2003 में अमेरिका ने इराक पर हमला किया. इन डाक्यूमेंट्स में आम इराकी लोगों की मौत से जुड़ी ऐसी जानकारियां भी थीं. ये उस वक़्त अमेरिका के डिफेंस इतिहास का सबसे बड़ा खुलासा था.

एक करोड़ से अधिक डॉक्यूमेंट्स लीक हुए

विकीलीक्स का दावा है कि उसने अब तक एक करोड़ से ज्यादा डाक्यूमेंट्स पब्लिश किए हैं. ऐसे डाक्यूमेंट्स, जिनके बारे में उसका कहना है कि उन्होंने सत्ता के उन हिस्सों को जनता के सामने रखा, जो बंद कमरों में छिपे थे. लेकिन विकीलीक्स की कहानी सिर्फ डाक्यूमेंट्स की कहानी नहीं है. ये कहानी है सत्ता और सच के बीच की उस लड़ाई की, जिसमें एक तरफ सरकारें हैं और उनकी काली करतूतें हैं जिन्हें कॉन्फिडेंशियल और क्लासिफाइड जैसा भारी नाम दे दिया जाता है. और दूसरी तरफ है नेशनल सिक्योरिटी का तर्क. और वो लोग, जो कहते हैं कि अगर सत्ता जनता के नाम पर काम करती है, तो जनता को ये जानने का हक़ भी होना चाहिए कि उसके नाम पर क्या किया जा रहा है. 

(यह भी पढ़ें: जूलियन असांज: वो मास्टरमाइंड, जो किसी के लिए क्रिमिनल है तो किसी के लिए क्रांतिकारी)

जूलियन असांजे इस बहस के सबसे विवादित चेहरों में से एक बन चुके हैं. किसी के लिए वो whistleblower हैं. और कोई उनके तरीकों और खुलासों पर सवाल खड़े करता है. लेकिन एक बात तय है. अगर ‘I am back’ का मतलब ये है कि आने वाले समय में और भी कॉन्फिडेंशियल इंफॉर्मेशन जनता के सामने आने वाली हैं. तो सत्ता और सत्ता में बैठे कइयों का गेम ख़राब होने वाला है.

वीडियो: विकीलीक्स के फाउंडर जूलियन असांजे के लॉयर्स ने कहा, ट्रंप ने माफी के बदले क्या शर्त रखी?

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