Submit your post

Follow Us

कुमार विश्वास और केजरीवाल के बीच हुई लड़ाई की असल वजह

759
शेयर्स

फिल्म ‘एन इनसिग्निफिकेंट मैन’ का एक सीन है. अरविंद केजरीवाल, कुमार विश्वास और पार्टी के कुछ कार्यकर्ता कमरे में बैठे हैं. चुनाव प्रचार में ऑटो के पीछे लिखी एक लाइन पर मजाक शुरू होता है. केजरीवाल हंसने लगते हैं. विश्वास और बाकी सब भी हंस रहे होते हैं. केजरीवाल के मजाक का जवाब देते हुए कुमार विश्वास हंसते-हंसते कहते हैं:

गंभीर नहीं हो आप आंदोलन को लेकर. हमें गंभीर बनाकर आप खुद मजे ले रहे हो. हम अच्छे-खासे अपने काम में लगे थे.

हमने जान-बूझकर ऐसा फ्रेम चुना है, जिसमें विश्वास और केजरीवाल दोनों एक ही दिशा में देख रहे हैं. असल में इनके रिश्तों के साथ भी ऐसा ही हुआ. दोनों एक सी महत्वाकांक्षा में आगे बढ़ते रहे. साथ बने रहना तो नहीं हो पाता ऐसे में.
हमने जान-बूझकर ऐसा फ्रेम चुना है, जिसमें विश्वास और केजरीवाल दोनों एक ही दिशा में देख रहे हैं. असल में इनके रिश्तों के साथ भी ऐसा ही हुआ. दोनों एक सी महत्वाकांक्षा में आगे बढ़ते रहे. साथ बने रहना तो नहीं हो पाता ऐसे में (फोटो: इनसिग्निफिकेंट मैन)

फिल्म देखते समय लगा नहीं था कि मजाक में कही गई बात कुमार विश्वास के मन की बात बन जाएगी. 3 जनवरी को आम आदमी पार्टी (AAP) ने राज्यसभा के अपने पत्ते खोले. एकाएक कुमार विश्वास और केजरीवाल की दोस्ती दीमक खाई लकड़ी जैसी नजर आने लगी. भरभराकर ढहकर धड़ाम. साफ हो गया कि पार्टी में विश्वास का कोई काम नहीं. ऐसे मौकों पर अक्सर कहावतें सूझती हैं. जैसे ये वाली- ताबूत में आखिरी कील. ये राज्यसभा की राह विश्वास और केजरीवाल के बीच धंसी वो ही आखिरी कील थी. दीमक एक दिन में दीवार नहीं खाती. अंदर-अंदर फैलते हुए बड़ा वक्त लगता है उसको. विश्वास और केजरीवाल के बीच भी ऐसा ही हुआ. धीरे-धीरे दोस्ती दरक गई. कुछ खास वजहें रहीं इसकी. नीचे मोटा-मोटी जान लीजिए:

1. पार्टी की शुरुआत के लिए राजी नहीं थे विश्वास, बाद में जुड़े
टीम अन्ना में थे. राजनीतिक पार्टी के लिए रेडी नहीं थे. बाद में जुड़े मनीष सिसोदिया के कहने पर. काफी दिनों तक अन्ना-अन्ना करते रहे. कई लोगों ने तो ये तक कहा कि शुरुआत में मंच संचालन के लिए पैसे भी लिए. हालांकि कुमार समर्थक इसे फालतू की बकवास करार देते हैं.

आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा के लिए जब अपने पत्ते खोले, तो खूब पार्टी और केजरीवाल दोनों की खूब आलोचना हुई. एक तरफ ये हो रहा था और दूसरी तरफ केजरीवाल अपने पक्ष में लिखे गए ट्वीट्स को रिट्वीट करने में जुटे थे. जैसे ये वाला ट्वीट.
आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा के लिए जब अपने पत्ते खोले, तो पार्टी और केजरीवाल दोनों की खूब आलोचना हुई. एक तरफ ये हो रहा था और दूसरी तरफ केजरीवाल अपने पक्ष में लिखे गए ट्वीट्स को रीट्वीट करने में जुटे थे. जैसे ये वाला ट्वीट.

2. विधायकी के रिस्क के लिए राजी नहीं हुए, अमेठी लड़े तो अकेले पड़ गए
फिर आए 2013 में दिल्ली के चुनाव. अरविंद की तरह कुमार को भी लड़ने के लिए कहा गया. तब सर्वे भी आप को 5-10 सीटें दे रहे थे. केजरीवाल के दिल्ली से लड़ने को मूर्खतापूर्ण कह रहे थे. कुमार ने पार्टी के लिए प्रचार किया, मगर लड़ने की हिम्मत नहीं जुटा सके. जब जुटाई तब तक कांटा बदल चुका था. अमेठी गए, उन्हें लगा कि राहुल को चुनौती देंगे तो मीडिया अटेंशन भी मिलेगा और काडर की इज्जत भी. जैसी केजरीवाल को दिल्ली से लड़ने पर मिली. मगर दो बदलाव हुए. बीजेपी ने अमेठी से स्मृति ईरानी को उतार दिया. मीडिया अटेंशन उधर गया. ये राहुल बनाम स्मृति हो गया. कुमार पीछे छूट गए. दूसरा, संगठन ने साथ नहीं दिया. सब केजरीवाल के कारज में लगे थे. कुमार को ये अखरा.

3. केजरीवाल को आका मानने के लिए तैयार नहीं
ये सबसे बड़ी वजह है – अरविंद आया तो मैंने बोला, तुम्हें इस तरह नहीं करना चाहिए… ऐसे सिर्फ कुमार बोलते हैं. अरविंद और मनीष के आगे जी नहीं खर्चते. हमारे हिसाब से अच्छा है. मगर अरविंद को ये नहीं जमा. कुमार अपनी स्वतंत्र शख्सियत पर जोर देते रहे. उन्हें पता था कि वो अरविंद की टक्कर के पॉपुलर और भीड़ खिंचाऊ हैं. काडर के बीच भी सम्मानित. और पार्टी फोरम में वो अरविंद की हां में हां नहीं मिलाते.

अन्ना आंदोलन के बाद जब केजरीवाल ने पार्टी बनाने और राजनीति में आने का फैसला किया, तो बड़ी आलोचना हुई उनकी. उनके साथ के लोग खिलाफ हो गए. पहले विश्वास भी इस फैसले से खुश नहीं थे. मगर बाद में वो साथ आ गए.
अन्ना आंदोलन के बाद जब केजरीवाल ने पार्टी बनाने और राजनीति में आने का फैसला किया, तो बड़ी आलोचना हुई उनकी. उनके साथ के लोग खिलाफ हो गए. पहले विश्वास भी इस फैसले से खुश नहीं थे. मगर बाद में वो साथ आ गए.

4. पंजाब में अनदेखी के बाद बढ़ी तल्खी
कुमार को पता था. दिल्ली फतेह के बाद पंजाब जीते तो पार्टी देश में जगमगा सकती है. उन्होंने नशे के इर्द-गिर्द वीडियो बनाया. वायरल हुआ. मगर फिर उनकी खालिस्तान पर पुरानी स्पीच मीडिया में प्लांट की गईं. विरोध हुआ तो कुमार को पंजाब में प्रचारकों की लिस्ट से हटा लिया गया. कुमार को बुरा लगा. उन्हें ये भी समझ आ गया कि संजय सिंह अपनी टैरिटरी में उन्हें नहीं चाहते. और संजय केजरीवाल से कमांड ले रहे थे. तो संदेश और साफ हो गया.

पंजाब में हार के बाद कुमार उस खेमे में थे जो जवाबदेही और कार्रवाई चाहते थे. मगर हार के बाद भी संजय और दुर्गेश के कद में कोई कमी नहीं आई.

अन्ना आंदोलन के समय की एक तस्वीर. दादी-नानी कहती हैं कि मछली खाने के बाद दूध नहीं पीना चाहिए. दोनों की तासीर अलग होती है. अरविंद केजरीवाल और कुमार विश्वास का हाल ऐसा ही है. दोनों की तासीर ही अलग है. कुंडली मिले तो मिले कैसे.
अन्ना आंदोलन के समय की एक तस्वीर. दादी-नानी कहती हैं कि मछली खाने के बाद दूध नहीं पीना चाहिए. दोनों की तासीर अलग होती है. अरविंद केजरीवाल और कुमार विश्वास का हाल ऐसा ही है. दोनों की तासीर ही अलग है. कुंडली मिले तो मिले कैसे.

5. कपिल मिश्रा को आगे कर तख्तापलट प्लान (मैं योंगेद्र नहीं हूं नेता जी)
फिर आया फाइनल एक्ट. लुटियंस दिल्ली के बतकहीबाजों की मानें तो कुमार विश्वास ने एक पार्टी बुलाई. इसमें दर्जनों आप विधायक पहुंचे. प्रस्ताव रखा गया कि अरविंद केजरीवाल संयोजक के काम पर फोकस करें. पूरे देश में पार्टी को फैलाएं. और दिल्ली की कमान कपिल मिश्रा को सौंप दें. पार्टी में आई लाचारी का जिक्र हुआ. करप्शन के इल्जामों का जिक्र हुआ. भ्रष्ट हुए कुछ विधायकों का जिक्र हुआ. कई विधायकों ने हां में मुंडी हिला दी. अरविंद केजरीवाल तक खबर पहुंची, तो कपिल मिश्रा को नाप दिया गया. उनके लिए अब सचिवालय नहीं, राजघाट बचा था. टीवी ने कुछ दिन सास-बहू ड्रामा चलाया, उसके बाद कपिल चला हुआ कारतूस हो गए. इन सबके पीछे कुमार थे, ये अरविंद को पता था, मगर वो अपने आप्त वचन पर कायम रहे. मारेंगे, मगर शहीद नहीं होने देंगे. अनुराग कश्यप चाहें, तो वासेपुर के इस परवर्धित संस्करण पर मुस्कुरा सकते हैं.

कपिल मिश्रा तक बात आते-आते वैसे भी बात बिगड़ चुकी थी. कुमार और केजरीवाल की दोस्ती अब पहाड़ की ढलान पर थी, तेजी से नीचे फिसलती हुई. इसका मुंह के बल गिरना तय था.
कपिल मिश्रा तक बात आते-आते वैसे भी बात बिगड़ चुकी थी. कुमार और केजरीवाल की दोस्ती अब पहाड़ की ढलान पर थी, तेजी से नीचे फिसलती हुई. इसका मुंह के बल गिरना तय था.

6. अमानतुल्ला की आड़ में फाइनल सैटलमेंट, जनवरी का इंतजार
फाइनल एक्ट का फाइनल मोमेंट आया ओखला के विधायक के बयान से. उन्होंने कुमार विश्वास को बीजेपी का एजेंट कहा. कुमार कार्रवाई के लिए अड़ गए. बोले, अगर किसी विधायक ने ये बात मनीष सिसोदिया या केजरीवाल के लिए कही होती तो क्या करते आप लोग. आखिरी में सेटलमेंट सस्पेंशन पर रुका.  कुमार को लगा कि अभी आखिरी गोली चलाने का वक्त नहीं आया. मगर अरविंद ने इंतजार नहीं किया. पार्टी संगठन पर सवाल उठाने वाले कुमार को राजस्थान का संगठन पकड़ा दिया. लोगों को लगा प्रमोशन है. मगर इसे यूं समझें. कुमार से पहले लक्ष्मी नगर के विधायक नितिन त्यागी ये काम देख रहे थे. सब जानते हैं कि राजस्थान में पार्टी की क्या संभावनाएं हैं. खैर कुमार को लगा कि एक पैड मिल गया लॉन्च होने के लिए. वो वहां धड़ाधड़ मीटिंग करने लगे. स्टूडेंट यूनियन चुनाव में भी सक्रिय रहे. मगर तब तक उन्हें दिल्ली में उनके सियासी कत्ल की तैयारियों की खबर मिलने लगी थी. इसके बाद उन्होंने बयान दिया. दिल्ली के पार्टी मुख्यालय में हर हफ्ते बैठूंगा. कार्यकर्ताओं से मिलूंगा. आज तक वगैरह को इंटरव्यू दिए. लोगों ने कहा कि ये कुमार की तरफ से सुलह के लिए आखिरी बयान है. पांडवों के पांच गांव जैसा कुछ. यहां गांव नहीं, राज्यसभा की सीट थी. जो जनवरी में बांटी जानी थी. केजरीवाल चुप रहे. विपश्यना ये सिखा देता है. चुप्पी के बीच मुरैठा बांधे नजर भी आए. सुशील गुप्ता के बेटे की शादी में. तब किसी की नजर नहीं गई. अजय माकन ने भी एक और इस्तीफा समझ कागज ड्रॉअर में खिसका दिया.

कुमार विश्वास ने खुद को 'लाश' कह दिया है. राजनीति में लाश हो जाना आमतौर पर होता नहीं. एक जगह के रास्ते बंद हो जाते हैं, तो इंसान दूसरे रास्ते खोज लेता है. कुमार क्या करते हैं, ये तो देखने की बात है.
कुमार विश्वास ने खुद को ‘लाश’ कह दिया है. राजनीति में लाश हो जाना आमतौर पर होता नहीं. एक जगह के रास्ते बंद हो जाते हैं, तो इंसान दूसरे रास्ते खोज लेता है. कुमार क्या करते हैं, ये तो देखने की बात है.

7. पट्टम चुग्गा सब खतम. हारे को हरिनाम
हर अच्छी ट्रैजडी में कॉमेडी होनी जरूरी है. इससे करुणा सूख जाती है. तनिक ज्यादा क्रूर हो जाती है.  3 जनवरी को दोपहर खबर आई कि मीडिया में चल रहे सब नाम खारिज हो गए हैं. तीन नाम फाइनल हुए हैं. संजय सिंह, आशुतोष और कुमार विश्वास. कुमार समर्थकों के चेहरे पर खिंची मुस्कान आई. इस खबर का आधार. पीएसी की मीटिंग में सिर्फ इन्हीं तीन सदस्यों को नहीं बुलाया गया था. बाकी सब थे. पर दो घंटे की मीटिंग में ऐसा कुछ नहीं हुआ. अंडमान से लौटे आलाकमान अरविंद की तरफ से मनीष ने नाम पढ़े. सबने स्वीकृति की. आशुतोष का फोन आया. वो एक दिन पहले से अपने साथियों के मार्फत फायर हो रखे थे. उन्होंने पूछा कि सुशील गुप्ता का क्या योगदान रहा. काडर को क्या जवाब देंगे. पीएसी में कोई कुछ नहीं बोला. मनीष बाहर आए. अरविंद के घर के हॉल में विधायक जमा थे. उन्हें ये नाम पढ़कर सुना दिए. वहां भी सन्नाटा. अस्सी फीसदी विधायकों को तो आप के ट्विटर हैंडल से जीवनी जारी होने के बाद सुशील गुप्ता के बारे में पता चला. आतिशी मरलेना और दूसरे प्रवक्ता अलग परेशान. टीवी पर सुशील को कैसे डिफेंड करें. और कुमार. मुस्कुराते हुए खुद को लाश बता रहे थे. कवि अपने चरम पर था. पर याद रखें. चरमोत्कर्ष के बाद निढाल होना नियति है. ये सियासत है. यहां न तो कवि सत्य होते हैं और न ही पोएटिक जस्टिस.


ये भी पढ़ें: 

आशुतोष नहीं होंगे अगले कुमार, संजय ने उनकी पिछली तनख्वाह बताई…

कुमार विश्वास के ये 10 बयान उनकी बीजेपी में एंट्री रोक सकते हैं

अरविंद केजरीवाल खुद पर बनी इस फिल्म से ये पांच बातें सीख सकते हैं

मफलरमैन बनने और उसके हिट होने की कहानी बड़ी दिलचस्प है

इस बात में फिलहाल केजरीवाल सरकार को कोई टक्कर नहीं दे सकता


केजरीवाल से धोखा खाने के बाद कुमार विश्वास का पहला बयान

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

‘ताई तो कहती है, ऐसी लंबी-लंबी अंगुलियां चुडै़ल की होती हैं’

एक कहानी रोज़ में आज पढ़िए शिवानी की चन्नी.

मोदी जी का बड्डे मना लिया? अब क्विज़ खेलकर देखो कितना जानते हो उनको

मितरों! अच्छे नंबर चइये कि नइ चइये?

कॉन्ट्रोवर्सियल पेंटर एमएफ हुसैन के बारे में कितना जानते हैं आप, ये क्विज खेलकर बताइये

एमएफ हुसैन की पेंटिंग और विवाद के बारे में तो गूगल करके आपने खूब जान लिया. अब ज़रा यहां कलाकारी दिखाइए.

इस क्विज़ में परफेक्ट हो गए, तो कभी चालान नहीं कटेगा

बस 15 सवाल हैं मित्रों!

क्विज़: खून में दौड़ती है देशभक्ति? तो जलियांवाला बाग के 10 सवालों के जवाब दो

इंग्लैंड के सबसे बड़े पादरी ने कहा वो शर्मिंदा हैं. जलियांवाला बाग कांड के बारे में अपनी जानकारी आप भी चेक कर लीजिए.

KBC क्विज़: इन 15 सवालों का जवाब देकर बना था पहला करोड़पति, तुम भी खेलकर देखो

आज से KBC ग्यारहवां सीज़न शुरू हो रहा है. अगर इन सारे सवालों के जवाब सही दिए तो खुद को करोड़पति मान सकते हो बिंदास!

क्विज: अरविंद केजरीवाल के बारे में कितना जानते हैं आप?

अरविंद केजरीवाल के बारे में जानते हो, तो ये क्विज खेलो.

क्विज: कौन था वह इकलौता पाकिस्तानी जिसे भारत रत्न मिला?

प्रणब मुखर्जी को मिला भारत रत्न, ये क्विज जीत गए तो आपके क्विज रत्न बन जाने की गारंटी है.

ये क्विज़ बताएगा कि संसद में जो भी होता है, उसके कितने जानकार हैं आप?

लोकसभा और राज्यसभा के बारे में अपनी जानकारी चेक कर लीजिए.

संजय दत्त के बारे में पता न हो, तो इस क्विज पर क्लिक न करना

बाबा के न सही मुन्ना भाई के तो फैन जरूर होगे. क्विज खेलो और स्कोर करो.