पाकिस्तान एक ओर ईरान और अमेरिका के बीच सुलह कराने के काम में लगा है. दूसरी ओर देश के अंदर महंगाई से त्रस्त जनता के सब्र का बांध टूटने को उतारू है. यहां पेट्रोल और खाने-पीने की चीजों की आसमान छूती कीमतों को लेकर लोगों में नाराजगी लगातार बढ़ रही है. यह गुस्सा 7 अगस्त को सड़कों पर भी फूट पड़ा. इस दिन देश की कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी 'जमात-ए-इस्लामी' ने सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के लिए लोगों का आह्वान किया था.
'IMF और आप भाड़ में जाओ', पाकिस्तान में सरकार के खिलाफ लोग इतने गुस्से में क्यों हैं?
कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी 'Jamaat-E-Islami' ने लोगों को लामबंद पर सरकार का विरोध शुरू किया. उनके बुलावे पर हजारों लोग पेट्रोल पर नए टैक्स और बढ़ती महंगाई के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए.

जमात के बुलावे पर हजारों लोग पेट्रोल पर नए टैक्स और बढ़ती महंगाई के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए. एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, कराची, लाहौर, पेशावर, क्वेटा, इस्लामाबाद, रावलपिंडी और एबटाबाद में प्रदर्शन हुए. इन प्रदर्शनों और रैलियों की वजह से मुख्य हाईवे और सड़कों पर ट्रैफिक जाम हो गया. प्रदर्शनकारियों के हाथों में ऐसे पोस्टर थे जिन पर लिखा था,
बहुत हो गया, टैक्स वापस लो, राहत दो. हमें बिना किसी टैक्स के 225 रुपये में पेट्रोल चाहिए.
अधिकतर मामलों में पाकिस्तानी सरकार का पक्ष लेने वाली जमात-ए-इस्लामी इस बार सरकार के विरोध में है. जमात के प्रमुख हाफिज नईम-उर-रहमान ने सरकार की टैक्स नीतियों की निंदा की. जमात प्रमुख ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और उनकी कैबिनेट को कड़ी चेतावनी दी है. नईम ने कहा,
यह (शहबाज शरीफ) सरकार, इससे पहले की सरकार और उससे भी पहले की सरकार सभी एक ही गड़बड़झाले में शामिल हैं. इसीलिए यह लेवी (टैक्स) मंजूर नहीं है... शहबाज शरीफ और उनके मंत्री मेरी बात साफ-साफ सुन लें. आपको पीछे हटना होगा. आपको यह लेवी टैक्स खत्म करना होगा.
पाकिस्तान में पेट्रोलियम उत्पादों पर प्रति लीटर के हिसाब से एक फिक्स्ड टैक्स वसूला जाता है. यही पेट्रोलियम लेवी है, जिसका लोग विरोध कर रहे हैं. पाकिस्तानी चैनल जियो टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, रहमान ने दावा किया कि सरकार ने पेट्रोलियम लेवी के जरिए 8 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये जमा किए हैं. रहमान का आरोप है कि सरकार अपनी नाकामी और भ्रष्टाचार को छिपाने की कोशिश कर रही है. लोगों को राहत देने के बजाय, सरकार प्रभावशाली समूहों को फायदा पहुंचा रही थी. जमात प्रमुख ने सरकार के उस तर्क को भी खारिज कर दिया कि इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने इस्लामाबाद को अरबों डॉलर का बेलआउट दिया है. रहमान ने कहा,
आप दावा करते हैं कि IMF इसकी इजाजत नहीं देगा. तो भाड़ में जाएं आप और आपका IMF. गरीबों पर जुल्म करना बंद करें. छात्रों पर जुल्म करना बंद करें. हमें यह लेवी मंजूर नहीं है.
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ये ट्रेलर था, पिक्चर बाकी हैरहमान ने कहा कि शुक्रवार का प्रदर्शन केवल एक ट्रेलर था. रहमान के मुताबिक अभियान का मुख्य चरण अभी शुरू होना बाकी है. रहमान ने 9 अगस्त को ईंधन की भारी कीमतों, पेट्रोलियम लेवी और बिजली बिल के खिलाफ लाहौर में पंजाब के मुख्यमंत्री के घर और कराची, पेशावर और क्वेटा में गवर्नर हाउस के बाहर धरना देने का आह्वान किया है. रहमान ने चेतावनी दी कि जरूरी लगने पर धरना लंबा खींचा जा सकता है.
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