The Lallantop

भारत पर 100% टैरिफ? रूस से तेल खरीदने वालों को नहीं बख्शेगा अमेरिका, सीनेट से बिल पास

अमेरिकी सीनेट ने रूस से तेल खरीदने वाले भारत-चीन समेत टॉप 5 देशों पर 100% टैरिफ लगाने का बिल पास किया है. सीनेट का कहना है कि रूस से व्यापार करने पर उसे यूक्रेन युद्ध के लिए फंड जुटाने में मदद मिलती है. जानिए यह बिल क्या कहता है?

Advertisement
post-main-image
रूस से तेल खरीदने वाले टॉप पांच बड़े खरीदारों पर 100% टैरिफ लग सकता है. (फाइल फोटो: इंडिया टुडे)

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • अमेरिकी सीनेट ने एक बिल पारित किया है जो रूस से ऊर्जा उत्पाद खरीदने वाले टॉप पांच देशों के सामान पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने और रूसी नेताओं पर प्रतिबंध लगाने की अनुमति देता है।
  • यह बिल इस कारण बना है क्योंकि सीनेट का मानना है कि रूस की ऊर्जा निर्यात से यूक्रेन युद्ध के लिए फंडिंग होती है, और इसे रोकने के लिए कड़े प्रतिबंध आवश्यक हैं।
  • अब यह बिल हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में मंजूरी के लिए जाएगा, जहां इसके पारित होने से रूस की ऊर्जा से संबंधित व्यापार प्रभावित हो सकता है।

अमेरिकी सीनेट ने एक बिल को मंजूरी दी है जिसका मकसद रूस और उसके पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के बड़े खरीदारों को सजा देना है. यह बिल अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को रूसी तेल और गैस के टॉप पांच खरीदार देशों के सामान पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की इजाजत देता है. टॉप फाइव में भारत और चीन शामिल हैं. सीनेट का कहना है कि इस तरह के ट्रेड से रूस को यूक्रेन से युद्ध करने के लिए फंड जुटाने में मदद मिलती है.

Advertisement

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस से तेल और गैस आयात करने वाले टॉप पांच देशों में चीन, भारत, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया शामिल हैं. इस बिल में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, रूस के कुलीन वर्ग समेत रूसी नेताओं और अधिकारियों पर भी बैन लगाने का प्रस्ताव है. रूस पर कार्रवाई के साथ यह बिल 1996 के ‘ईरान सैंक्शन्स एक्ट’ को 2031 तक बढ़ा देगा. यह कानून उन कंपनियों को सजा देता है जो ईरान के एनर्जी सेक्टर में इन्वेस्ट करती हैं.

इस बिल को दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने अमेरिकी कांग्रेस के ऊपरी सदन 'सीनेट' में पेश किया था. इसी साल यूक्रेन दौरे से लौटने के बाद 11 जुलाई को ग्राहम का अचानक निधन हो गया. अब उनको सम्मान देने के लिए इस बिल का नाम बदलकर 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' कर दिया गया गया है. इसे 86-11 वोटों से पास किया गया. 

Advertisement

लिंडसे ग्राहम की मौत के बाद उनकी बहन डार्लिन ग्राहम को उनकी सीट पर अपॉइंट किया गया था. उन्होंने कहा, 

“यह बिल उन मुख्य देशों को, जो रूस की इकोनॉमी को चला रहे हैं, एक आसान लेकिन जरूरी चुनाव करने के लिए मजबूर करता है- अमेरिका के साथ बिजनेस करने या सस्ती रूसी एनर्जी खरीदने के बीच चुनाव.”

वोटिंग के बाद, ब्लूमेंथल ने पत्रकारों से कहा कि ग्राहम को इस बात पर गर्व होगा कि हमने क्या किया है. उन्होंने आगे कहा, 

Advertisement

“ये कड़े प्रतिबंध और टैरिफ उन सभी को रोक देंगे जो बहादुर और आजाद लोगों के खिलाफ इस जानलेवा और आपराधिक हमले वाली जंग में शामिल हैं.”

ये भी पढ़ें: रूस से तेल खरीद सकता है भारत, लेकिन अब पहले वाली बात क्यों नहीं रही?

भले ही इस बिल को दोनों पार्टियों का समर्थन हासिल है, लेकिन कुछ डेमोक्रेट्स ने इस बिल को लेकर चिंता भी जताई है. डेमोक्रेटिक कांग्रेसी ग्रेगरी मीक्स और डॉन बेयर ने इस बिल की आलोचना करते हुए कहा, 

"इससे टैरिफ से जुड़े ऐसे नए अधिकार मिलेंगे जिनका राष्ट्रपति ट्रंप मनमाने ढंग से हथियार की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं, जैसा कि उन्होंने पहले भी कई बार किया है."

अब यह बिल 31 अगस्त को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में मंजूरी के लिए जाएगा.

वीडियो: दी लल्लनटॉप शो: अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने की छूट दी, मगर एक शर्त पर!

Advertisement