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अश्मिता चालिहा घुटने की चोट से लौटीं, अब कोरिया मास्टर्स में मचा रहीं गदर!

26 साल की भारतीय शटलर Ashmita Chaliha ने सेमीफाइनल के रोमांचक मुकाबले में अपनी ही हमवतन Rakshita Ramraj को हराया. अब वो अपने पहले BWF वर्ल्ड टूर खिताब से बस एक कदम दूर हैं.

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अश्मिता चालिहा कोरिया मास्टर्स 300 के फाइनल में पहुंचीं. (फोटो-BAI)

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  • अश्मिता चालिहा ने कोरिया मास्टर्स सुपर 300 टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में 19 साल की रक्षिता रामराज को हराकर अपने करियर में पहली बार BWF वर्ल्ड टूर सिंगल्स फाइनल में जगह बनाई है।
  • अश्मिता ने अपने दाहिने घुटने की चोट से उबरने के बाद मई में वापसी की और कोच पार्क ताए-सांग के मार्गदर्शन में वर्ल्ड नंबर 22 हिना अकेची को क्वार्टर फाइनल में हराया।
  • अश्मिता का अगला मुकाबला 9 अगस्त को चीन की हान कियानशी से होगा, जिसका परिणाम भारतीय बैडमिंटन के लिए आने वाले समय में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

अश्मिता चालिहा. भारतीय बैडमिंटन का वो नाम, जो इन दिनों दक्षिण कोरिया में गदर काट रहा है. खेल में वापसी करना कभी आसान नहीं होता. खासकर तब, जब आपके घुटने में चोट लगी हो. आप तीन महीने तक कोर्ट से दूर रहे हों. लेकिन, 26 साल की अश्मिता ने इक्सान में चल रहे कोरिया मास्टर्स सुपर 300 टूर्नामेंट में जो खेल दिखाया है, उसने हर इंडियन फैन का दिल जीत लिया है.
8 अगस्त को हुए ऑल-इंडियन सेमीफाइनल में अश्मिता ने 19 साल की अपकमिंग स्टार रक्षिता रामराज को हरा दिया. 48 मिनट तक चले इस रोमांचक मुकाबले को अश्मिता ने 21-13, 16-21, 21-13 से अपने नाम किया. इसी के साथ वो करियर में पहली बार किसी BWF वर्ल्ड टूर सिंगल्स फाइनल में भी पहुंच गईं.

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सेमीफाइनल में दिखा अनुभव vs युवा जोश

इस मुकाबले में पल-पल पासा पलटा. शुरुआत से ही अश्मिता ने अपना दबदबा दिखाया.पहला गेम आसानी से 21-13 से जीत लिया. लेकिन, पुलेला गोपीचंद एकेडमी की ट्रेनी रक्षिता ने भी आसानी से हार नहीं मानी. उन्होंने दूसरे गेम में अश्मिता की गलतियों का फायदा उठाया. ये  गेम 21-16 से जीतकर मैच में वापसी कर ली.

लेकिन, असली खेल तो तीसरे और निर्णायक गेम में होना था. अश्मिता ने अपने अनुभव का पूरा इस्तेमाल किया और कोर्ट पर आते ही 9-1 की ऐसी बढ़त बनाई, रक्षिता इससे उबर ही नहीं पाईं. दबाव में रक्षिता से गलतियां हुईं और अश्मिता ने मुकाबला अपनी मुट्ठी में कर लिया.

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चोट से लेकर फाइनल तक 

अश्मिता की ये कामयाबी इसलिए भी खास है क्योंकि कुछ ही महीने पहले वो अपने दाहिने घुटने की चोट से जूझ रही थीं. फिलहाल वर्ल्ड नंबर 50 की रैंकिंग वाली इस खिलाड़ी ने मई में वापसी की. मशहूर कोच पार्क ताए-सांग की कोचिंग में अश्मिता ने अपने खेल को उस मुकाम पर ला खड़ा किया है, जहां उन्होंने इस टूर्नामेंट के क्वार्टर फाइनल में जापान की वर्ल्ड नंबर 22 हिना अकेची को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया.

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अश्मिता और उनके पहले BWF वर्ल्ड टूर खिताब के बीच अब चीन की हान कियानशी की चुनौती है. हान कियानशी दुनिया की 35वें नंबर की खिलाड़ी हैं और टूर्नामेंट की चौथी सीड हैं. ये मुकाबला 9 अगस्त को खेला जाना है.

अश्मिता की ये जीत भारतीय बैडमिंटन के लिए एक और खुशखबरी लेकर आई है. पिछले सप्ताह ताइपे ओपन जीतने वाली तन्वी शर्मा के बाद, अश्मिता लगातार दूसरे हफ्ते किसी वर्ल्ड टूर फाइनल में पहुंचने वाली दूसरी भारतीय सिंगल्स खिलाड़ी बन गई हैं. अब पूरे देश की निगाहें रविवार को होने वाले इस खिताबी मुकाबले पर हैं. 

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