कहावत है कि जब दवा काम ना आए तो मरीज के पास बस दुआ का ही सहारा होता है. मगर जब मुल्क में कैंसर और हार्ट डिजीज जैसी जानलेवा बीमारियों से बचानी वाली दवाओं का ही अकाल पड़ जाए, तब भी बीमार पड़ने पर बस दुआ का ही सहारा बचता है. हमारे प्यारे पड़ोसी पाकिस्तान का हाल भी कुछ ऐसा ही है. जी हां, वहीं पाकिस्तान जो अरबों डॉलर का कर्ज लेकर चीन से पांचवीं के जंगी जहाज खरीद रहा है. उसी पाकिस्तान के अस्पतालों के गलियारों में मरीज दवाओं के लिए तरस रहे हैं.
दवाओं को तरस रहे हैं कैंसर और दिल के मरीज! हथियारों पर करोड़ों लुटा रही शरीफ-मुनीर की जोड़ी
Pakistan Medical Shortage: 'द डॉन' की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के अस्पतालों से कैंसर और दिल की बीमारियों समेत 100 से ज्यादा जरूरी जीवन रक्षक दवाएं गायब हो चुकी हैं. दवा की किल्लत के चलते मरीजों का बुरा हाल है. मगर इस पर ध्यान देने के बजाय शहबाज शरीफ और असीन मुनीर की जोड़ी अरबों रुपये हथियारों की खरीद में जुटी है.


दवा के लिए तरसते मरीज
पाकिस्तान के समाचार पत्र ‘द डॉन’ ने एक ऐसी रिपोर्ट छापी है, जो पाकिस्तानी वजीर ए आला शहबाज शरीफ और वहां फील्ड मार्शल असीम मुनीर को शर्मशार करने के लिए काफी है. समाचार एजेंसी ANI ने ‘द डॉन’ के हवाले से दावा किया है कि पाकिस्तान में सौ से ज्यादा जीवन रक्षक दवाओं की किल्लत हो गई है. इनमें कैंसर और हृदय रोग जैसी बीमारियों की दवाएं भी शामिल हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक इस ‘दवा किल्लत’ के पीछे मुल्क में इम्पोर्ट किए जाने वाले कच्चे माल की उच्च लागत, डालर के मुकाबले पाकिस्तानी मुद्रा की गिरती वैल्यू (currency depreciation) और नीतिगत देरी जिम्मेदार है. सिर्फ इतना ही नहीं दवाओं के इस किल्लत का फायदा नकली दवा बनाने वाले उठा रहे हैं और खामियाजा भुगत रही है पाकिस्तानी आवाम.
'दवा बनाम गन पाउडर' की दास्तान
पाकिस्तान के अस्पतालों और मेडिकल स्टोर्स में भले लाइफ सेविंग ड्रग्स का टोटा पड़ा है. मगर पाकिस्तान के हुक्मरानों का सारा फोकस पड़ोस में आतंक फैलाने और जानलेवा हथियारों की खरीद पर है. दवाओं की किल्लत दूर करने के लिए भले ही नीतिगत फैसले देर से किए जा रहे हों, मगर रावलपिंडी के मिलिट्री हेडक्वार्टर में नए फाइटर जेट्स और मिसाइल सिस्टम की डील खटाकठ साइन हो रही है.
ये पाकिस्तान का वो कड़वा विरोधाभास है जिसे 'दवा बनाम गन पाउडर' की कहानी कहा जा रहा है. देश की अर्थव्यवस्था वेंटिलेटर पर है, विदेशी मुद्रा भंडार खाली है, लेकिन मुनीर की सेना का शौक कम होने का नाम नहीं ले रहा. पाकिस्तान का आम आदमी समझ नहीं पा रहा कि आखिर एक कंगाल मुल्क बारूद के ढेर पर बैठकर क्या साबित करना चाहता है?
डिफेंस बजट बनाम सोशल सेक्टर: प्राथमिकता का खेल
पाकिस्तान का बजट एक ऐसी पहेली है जिसे समझना मुश्किल नहीं है, बस देखना पड़ता है कि पैसा कहां से बहकर कहां जा रहा है. अगर आप बजट के आंकड़ों को देखेंगे, तो पाएंगे कि पाकिस्तान अपनी जीडीपी का एक बहुत बड़ा हिस्सा सेना पर खर्च करता है.
SIPRI की हालिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि पाकिस्तान का रक्षा बजट उसकी शिक्षा और स्वास्थ्य बजट के कुल जोड़ से कहीं ज्यादा है. जून 2026 में पेश किये गए बजट के मुताबिक पाकिस्तान रक्षा क्षेत्र पर अपना खर्च 18 प्रतिशत बढ़ाकर 3000 अरब रुपये (3 ट्रिलियन) करने जा रहा है.
रणनीतिक थिंक टैंक ‘इंडिया मैटर्स’ रोहित शर्मा इसे ‘दुर्भाग्यपूर्ण विरोधाभास’ करार देते हैं. लल्लनटॉप से बात करते हुए रोहित कहते हैं,
पाकिस्तान के अस्पतालों में लाइफसेविंग ड्रग्स की भारी किल्लत है. कैंसर और डायलिसिस के मरीजों को दवाएं नसीब नहीं हो रही हैं. सरकार कहती है कि खजाना खाली है, लेकिन मिलिट्री बजट में हर साल इजाफा हो जाता है.
रोहित के मुताबिक ये प्राथमिकता का वो संकट है, जो किसी भी देश को अंदर से खोखला करने के लिए काफी है.

चीन का 'कर्ज जाल' और हथियारों का सौदा
अब बात करते हैं उस दोस्त की जो पाकिस्तान को कर्ज भी देता है और फिर उसी कर्ज से अपने हथियार भी बेचता है. चीन और पाकिस्तान की दोस्ती हथियारों के बाजार में एक बड़ी डील है. ‘डिफेंस सिक्योरिटी एशिया’ समेत कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि पाकिस्तान जल्दी ही चीन से जे-35 फाइटर जेट्स की खरीद करने वाला है. रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि दोनों देशों के बीच 30 से 40 की संख्या में जे-35 की डील हो सकती है.
इसके अलावा कई मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चीन, पाकिस्तान को J-10C फाइटर जेट्स दे रहा है. ये वही विमान हैं जो चीन के पुराने मॉडल पर आधारित हैं. साथ ही शाहीन मिसाइल प्रोग्राम में भी चीन की टेक्नोलॉजी का बड़ा हाथ है.
कुल मिलाकर कहानी ये है कि चीन पहले पाकिस्तान को कर्ज देता है, फिर पाकिस्तान उसी पैसे का इस्तेमाल चीन से हथियार खरीदने में करता है. डिफेंस एक्सपर्ट अलोक रंजन इसे एक ऐसे चक्रव्यूह की तरह देखते हैं, जिसमें पाकिस्तान फंसता चला जा रहा है. लल्लनटॉप से बात करते हुए आलोक कहते हैं,
शहबाज-मुनीर की जोड़ी को खुशफहमी है कि वो मुल्क को मजबूत कर रहे हैं. लेकिन हकीकत में पाकिस्तानी आवाम को चीन के कर्ज की गुलामी में और गहरा धंसा रहे हैं.
तुर्किये से नजदीकी और ड्रोन का मोह
पाकिस्तानी आवाम की ज़िंदगी बचाने वाली दवाओं की जगह हथियारों पर पैसा बहाने की इस कहानी का एक किरदार तुर्किए भी है. SIPRI की एक रिपोर्ट बताती है कि हाल के वर्षों में तुर्किये के ड्रोन और नौसैनिक जहाजों की पाकिस्तान में खूब चर्चा है.
पूर्व वायुसेना अधिकारी और डिफेंस एक्सपर्ट रिटायर्ड ग्रुप कैप्टन डॉ डी.के.पाण्डेय कहते हैं,
पाकिस्तान को लगता है कि तुर्किये के साथ मिलकर वो अपनी नेवी और एयरफोर्स को आधुनिक बना लेगा. लेकिन सवाल ये है कि इन हथियारों की कीमत कौन चुका रहा है? पाकिस्तान की गरीब आवाम…
खुद पाकिस्तानी हुक्मरान भी कई मौकों पर मान चुके हैं कि उनके देश के पास डॉलर नहीं हैं. बावजूद इसके वो हथियारों के शौकों के लिए वो नए कर्ज लेने से गुरेज नहीं करते. डिफेंस एक्सपर्ट्स मानते हैं कि तुर्किये के साथ ये सामरिक बढ़त एक ऐसा दिखावा है, जो आम पाकिस्तानी की थाली से रोटी कम कर रहा है.
भारत के लिए खतरा या छलावा?
अब इन सबके बीच सवाल ये उठता है कि क्या पड़ोसी मुल्क की ये हालत और ऐसी नीयत भारत के लिए खतरा है? डिफेंस एक्सपर्ट्स सेवानिवृत्त कर्नल शैलेद्र त्यागी का मानना है कि,
पाकिस्तान की इस 'आर्म्स रेस' का मॉडल उसे बर्बादी की ओर ले जा रहा है. आपको सोवियत संघ का पतन याद है? सोवियत संघ ने भी हथियारों की होड़ में अपनी अर्थव्यवस्था को दांव पर लगा दिया था और आखिर में वो देश बिखर गया. पाकिस्तान भी ठीक उसी रास्ते पर है.
कर्नल त्यागी कहते हैं कि अगर पाकिस्तान सिर्फ हथियारों पर खर्च करता रहा और अपनी जनता को खाना-दवा नहीं दे पाया, तो अंदरूनी विद्रोह का खतरा बढ़ जाएगा.
इतिसाह गवाह है सिर्फ हथियारों से कोई देश सुरक्षित नहीं होता, अगर उसकी जड़ें यानी अर्थव्यवस्था ही खोखली हो जाए. ‘द डिप्लोमेट’ के मुताबिक अब पाकिस्तान के अंदर भी लोग मानने लगे हैं कि दवाओं की किल्लत के बावजूद हथियारों की ये सैन्य होड़ एक ऐसा छलावा है जो मुल्क को सुरक्षा कम और तबाही की ओर ज्यादा ले जा रही है.
नोट: इस लेख में दी गई जानकारी SIPRI, डॉन और द ट्रिब्यून की रिपोर्टों पर आधारित है. डेटा की प्रामाणिकता के लिए संबंधित लिंक पर क्लिक करें.
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