चीन इस वक्त कई बड़े महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है. यारलुंग त्सांगपो नदी पर दुनिया का सबसे बड़ा डैम बनाना भी इसमें शामिल है. ये भारत-चीन सीमा से महज़ 50 किलोमीटर की दूरी पर है. अब चाइनीज जियोलॉजिस्ट ने चेताया है कि जिस जगह पर ये मेगा डैम बन रहा है वहां भूस्खलन और भूकंप का खतरा है. वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर यहां डैम बन भी जाए तब भी उसका स्ट्रक्चर कभी भी तबाह हो सकता है. इस प्रोजेक्ट ने भारत के लिए भी चिंता खड़ी कर दी है.
चीन का मेगा डैम प्रोजेक्ट होने वाला है फेल? भारत की बड़ी टेंशन होगी दूर
China mega-dam project: चीन के कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि चीन का सबसे बड़ा हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट जहां बन रहा है वहां भूकंप का खतरा है. भारत के लिए हमेशा से ये चिंता का विषय रहा है. ये डैम चीन के यारलुंग त्सांगपो नदी पर बन रहा है.


पिछले महीने एक चाइनीज जर्नल ‘Sedimentary Geology and Tethyan Geology’ में एक रिसर्च छपी. रिसर्च के मुताबिक, ‘paizen’ फॉल्ट लाइन सीधे उस इलाके से होकर गुज़रती है जहां ये हाइड्रो पावर पोजेक्ट बन रहा है. रिसर्चर्स का कहना है कि इस फॉल्ट लाइन की वजह से आस पास के पहाड़ कमज़ोर पड़ गए हैं, जो किसी भी इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट की बुनियाद को कमज़ोर कर सकते हैं.
क्या छपा है रिसर्च में?रिपोर्ट में छपा है कि इस फॉल्ट लाइन की वजह से ही 2017 में तिब्बत में भूकंप आया था. जिससे यह स्पष्ट होता है कि ये लाइन अभी भी एक्टिव है. रिसर्चर्स का कहना है कि जिस इलाके में हाइड्रोपावर प्लांट बन रहा है वो कमज़ोर है और आपदा आने पर सामंजस्य नहीं बन पाएगा.
ये भी बताया गया कि ये प्रोजेक्ट नदी के "ग्रेट बेंड" के पास स्थित है, जहां नदी 2,000 मीटर गहरी खाई में गिरती है. अनुमान है कि ये प्रोजेक्ट समय सीमा के अंदर साल 2033 तक पूरा हो सकता है.
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भारत के लिए खतरा क्यों?चीन की यारलुंग त्सांगपो नदी जब बहकर भारत आती है तो वो ब्रह्मपुत्र बन जाती है. ये नदी भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों से होते हुए बांग्लादेश जाती है. इस नदी से लाखों लोगों का जीवनयापन होता है. भारत का डर है कि डैम के निचले इलाकों पर इसका असर पड़ सकता है.
भारत का तर्क है कि इस प्रोजेक्ट की वजह से नदी की इकोलॉजी और वॉटर फ्लो पर असर पड़ सकता है, जिससे कई लोगों की ज़िंदगियां बाधित हो सकती है. भारत सरकार इस स्थिति पर नज़र बनाए हुए है. 2025 में विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बीजिंग यात्रा पर भी इस मुद्दे को उठाया था.
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