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अमेरिका ने ईरान के 140 ठिकानों पर की बमबारी, तेहरान ने होर्मुज पर ले लिया बड़ा फैसला

US-Iran fresh strikes: अमेरिका ने ईरान के कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले किए हैं. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने हमले की ज़िम्मेदारी लेते हुए कहा कि ये एक्शन राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के आदेश पर हुआ है. जवाबी हमले में ईरान ने भी मिडिल ईस्ट में अमेरिकी बेस पर निशाना साधा है.

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अमेरिका ईरान के बीच तनाव ने स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज पर सवाल खड़े कर दिए हैं. (फोटो- X/CENTCOM)

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  • अमेरिका ने ईरान के दक्षिणी हिस्सों और केश्म द्वीप पर मिसाइल हमले किए, जो राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के आदेश पर हुए, इसके जवाब में ईरान ने कतर, UAE, और जॉर्डन में अमेरिकी बेसों पर हमला किया।
  • ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे एक कमर्शियल कार्गो जहाज पर मिसाइल दागी थी, जिससे विवाद बढ़ा और双方 के बीच मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग को दरकिनार कर दिया गया।
  • हमलों के परिणामस्वरूप स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद हो गया है और दोनों देशों के बीच पीस डील की बातचीत ठंडे बक्से में चली गई, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है।

अमेरिका और ईरान के बीच कॉन्फ्लिक्ट बढ़ता जा रहा है. दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हमलावर हैं. मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग को दोनों ही देशों ने दरकिनार कर दिया है. इसी कड़ी में अमेरिका ने ईरान पर फिर से हमला किया है. हमले के जवाब में ईरान ने भी कतर, UAE और जॉर्डन में अमेरिकी बेस पर बम बरसाए हैं. यानी मसला हल होने के बजाय और उलझ गया है. और सवाल अब भी वही है कि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज का क्या होगा?  

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एक्सिओस की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी हमले से पहले ईरान ने होर्मुज से गुज़र रहे एक कमर्शियल कार्गो जहाज पर मिसाइल दागी थी, जिसमें वो बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया. IRGC ने इसके बाद धमकी दी कि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज अगले आदेश तक बंद रहेगा. इसी के जवाब में अमेरिका ने ईरान के दक्षिण इलाकों बंदर अब्बास और केश्म द्वीप पर मिसाइलें दागीं. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने हमले की ज़िम्मेदारी लेते हुए कहा कि ये एक्शन राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के आदेश पर हुआ है. 

अमेरिका का तर्क

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने X पर पोस्ट कर बताया कि ईरान लगातार सिविलियन नाविकों पर हमले कर रहा है. होर्मुज से गुजरने वाले कमर्शियल जहाज को बिना किसी कारण के निशाना बना रहा है. उसको सबक सिखाने और उसकी क्षमता को कम करने के लिए अमेरिका ने ये हमला किया है. प्रेसिडेंट ट्रंप का आदेश है कि ईरान को उसके किए का पता चलना चाहिए. 

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रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी मिसाइल सिस्टम, डिफेन्स साइट और स्पीडबोट्स को निशाना बनाया गया है. CENTCOM के मुताबिक, अमेरिकी सशस्त्र बल ने ज़मीन और पानी के रास्ते ईरान के कुल 140 ठिकानों पर हमला किया है. इस हमले में फाइटर एयरक्राफ्ट, नेवल वेसल और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया है. 

CENTCOM ने ये भी बताया कि हमला साइप्रस झंडे वाले जहाज पर हुआ था, जिसके जवाब में अमेरिका ने एक्शन लिया है. हमले की वजह से जहाज में आग लग गई और इंजन रूम डैमेज हो गया, जिसके बाद वो मझधार में ही अटक गया. रिपोर्ट के मुताबिक, एक क्रू मेंबर भी लापता है.  

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ईरान का जवाबी हमला

अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने भी मिडिल ईस्ट में अमेरिकी बेस पर हमले तेज़ कर दिए. कतर, कुवैत, जॉर्डन, ओमान और UAE में कई अमेरिकी संस्थानों पर निशाना साधा है. इनमें अमेरिकी रडार साइट, कंट्रोल एंड कमांड फैसिलिटी और मेंटेनेंस सेंटर पर हमला किया गया है. कुवैत और कतर ने इन हमलों को ‘क्रिमिनल एक्ट’ बताया है.

एक्सिओस के मुताबिक, IRGC का तर्क है कि जिस जहाज पर उसने हमला किया वो होर्मुज में अवैध रास्ते से जा रहा था. ईरान ने हमले से पहले वॉर्निंग दी थी. लेकिन फिर भी जब जहाज ने अपना रास्ता नहीं बदला तब उसपर मिसाइल दागी गई. IRGC ने कहा, ‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज अगले आदेश तक बंद रहेगा. और किसी भी जहाज को यहां से गुजरने की अनुमति नहीं है.’  

इन हमलों के बाद से पीस डील की बातचीत ठंडे बक्से में जा चुकी है. दोनों ही देश एक-दूसरे को धमकी दे रहे हैं. अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ कह रहे हैं ‘ईरान ने बुरा चुन लिया है, अब भुगतना पड़ेगा.’ वहीं ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर ग़लिबाफ ने कहा, ‘एक तरफ़ा डील का दौर चला गया. या तो वादा पूरा करो या फिर कीमत चुकाओ’.

वीडियो: दुनियादारी: क्या ईरान-अमेरिका सीजफायर टूट गया?

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