The Lallantop

रिश्तेदारों के 12 लाख अपने अकाउंट में डाले, मिला टैक्स नोटिस, अब 10 साल बाद हुआ न्याय

Income Tax Notice: अगर आपके अकाउंट में आपके यार, मित्र, सखा, बंधु, पड़ोसी, दूर के मामा या पास के फूफा का पईसा आया तो भी आपको बड़ी दिक्कत हो सकती है. जो रकम आपकी नहीं, अगर वो आपके अकाउंट में पड़ी है तो आप इनकम टैक्स के चक्कर में पड़ सकते हैं.

Advertisement
post-main-image
दोस्ती यारी के चक्कर में कहीं इनकम टैक्स का नोटिस ना मिल जाए

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) ने रमजान मुल्ला के बैंक खाते में रिश्तेदारों के पुराने नोट के जमा पैसे को वैध मानते हुए पूरी टैक्स डिमांड रद्द कर दी, जो 2026 में फैसला सुनाया गया।
  • साल 2016 की नोटबंदी के दौरान रमजान मुल्ला के खाते में उनके पांच बुजुर्ग रिश्तेदारों के पुराने नोट जमा किए गए थे, जिनके पास बैंक खाता नहीं था या वे बैंक जाने में असमर्थ थे, जिससे टैक्स विभाग से विवाद उत्पन्न हुआ।
  • आयकर विभाग के नोटिस और विवाद के चलते भविष्य में खातों में अन्य लोगों की रकम रखने वाले व्यक्तियों को उचित दस्तावेजी सबूत रखने की सलाह दी गई है ताकि वे अनावश्यक टैक्स नोटिस से बच सकें।

आपके अकाउंट में अगर साइबर ठगी का पईसा आया तो आपका अकाउंट फ्रीज हो सकता है. ये बात तो आपको पता होगी. लेकिन अगर आपके अकाउंट में आपके यार, मित्र, सखा, बंधु, पड़ोसी, दूर के मामा या पास के फूफा का पईसा आया तो भी आपको बड़ी दिक्कत हो सकती है. जो रकम आपकी नहीं, अगर वो आपके अकाउंट में पड़ी है तो आप इनकम टैक्स (income tax notice) के चक्कर में पड़ सकते हैं. शायद ऐसे आपको हमारी बात कोरी गप लगेगी इसलिए आपको पहले आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) के पास ले चलते हैं.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement
इनकम टैक्स का नोटिस

कर्नाटक के एक छोटे बिजली व्यापारी रमजान मुल्ला ने साल 2016 की नोटबंदी के दौरान अपने बैंक खातों में कुल 20.99 लाख रुपये जमा किए थे. रमजान के मुताबिक इस पैसे के दो हिस्से थे. 8.73 लाख रुपये उनकी दुकान की नकद बिक्री यानी कमाई का पैसा था. बचे 12.26 लाख रुपये उनके पांच बुजुर्ग रिश्तेदारों के थे. ये पुराने यानी नोटबंदी में बंद होने वाले नोट थे. क्योंकि उन बुजुर्गों के पास या तो बैंक खाता नहीं था या वे खुद बैंक जाने में असमर्थ थे, इसलिए उन्होंने पुराने नोट बदलने के लिए रमजान को दिए थे.

ये भी पढ़ें: अकाउंट में आये 100 रुपये भी आपकी पूरी सेविंग्स पर ताला लगवा सकते हैं

Advertisement

रमजान ठहरे छोटे व्यापारी इसलिए उनको रोजमर्रा का पूरा बही-खाता रखने की जरूरत नहीं थी. हालांकि वो सरकार की प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम (धारा 44AD) के तहत टैक्स भरते थे. सब ठीक था मगर दिक्कत तब हुई, जब आयकर विभाग ने 20.99 लाख रुपये को 'अघोषित आय' मान लिया और भारी टैक्स का नोटिस थमा दिया. अपनी बात को सच साबित करने के लिए उन्होंने सेल्स रजिस्टर, वैट रिटर्न, बैंक स्टेटमेंट और अपने उन पांचों रिश्तेदारों के लिखित शपथ पत्र (एफिडेविट) भी आयकर विभाग को सौंपे. लेकिन आयकर अधिकारी (AO) इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुए. उनका मानना था कि कोई भी व्यक्ति अपने रिश्तेदारों के पुराने नोट अपने खाते में जमा नहीं कर सकता.

थोड़ी राहत मिली मगर

रमजान ने फैसले के विरोध में अपील की, तो बड़े अधिकारियों (CIT-A) ने थोड़ी राहत देते हुए बिजनेस के आधे पैसे माने 8.73 लाख रुपये को तो सही माना, लेकिन रिश्तेदारों के पूरे 12.26 लाख रुपये पर टैक्स के फैसले को सही ठहराया. इसके बाद यह मामला टैक्स कोर्ट यानी ITAT के पास पहुंचा. अब जाकर साल 2026 में कोर्ट ने रमजान के सभी दस्तावेजों जैसे वैट रिटर्न और रिश्तेदारों के शपथ पत्रों को सही पाया. कोर्ट ने रमजान के पक्ष में फैसला सुनाते हुए आयकर विभाग द्वारा लगाई गई पूरी टैक्स डिमांड को रद्द कर दिया. माने जैसे तैसे रमजान भाई बच गए. मगर जरूरी नहीं कि आप भी बच जाओ. इसलिए अगर आप भी अपने बैंक अकाउंट में किसी दूसरे शख्स की रकम जमा कर रहे हैं या करवा रहे हैं तो इस बात का पुख्ता सबूत अपने पास जरूर रखें कि वह रकम आपकी नहीं है.

इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने का महीना चल रहा है. इसलिए काम की बात बता दी. 

Advertisement

वीडियो: खर्चा-पानी: अब बैंककर्मियों की बारी? HDFC ने हजारों को निकाला

Advertisement