प्लास्टिक के इन कणों में नाइलॉन, पॉलीथीन टेरेफथेलेट और पॉलीप्रोपीलीन के अंश मिले हैं. ये उस प्लास्टिक में पाए जाते हैं जिनसे बोतलों के ढक्कन बनते हैं. रिसर्चर ने लिखा है कि बॉटलिंग के दौरान कंपनियों की लापरवाही के चलते पानी में ये कण मिल जाते हैं. अपनी रिसर्च में मेसन ने ये भी कहा है कि इस तरह से पानी में घुले महीन प्लास्टिक से कई तरह के कैंसर, स्पर्म काउंट गिरने से लेकर ऑटिज्म जैसे बीमारियों के बढ़ने का खतरा है. साथ ही कहा है कि इस मामले में नल का पानी पैकेज्ड पानी से ज्यादा सेफ है.
पिछले दिनों इंटरनेट पर ये खबर खूब चली थी कि विराट कोहली कौन सी कंपनी का पानी पीते हैं. तो पता चला था कि वो फ्रांस की मशहूर कंपनी ईवियन का पैकेज्ड वॉटर लेते हैं. इसकी एक लीटर के पानी की बोतल की कीमत 600 रूपए बताई जाती है. इस रिसर्च में उस कंपनी के पानी की जांच में भी ये गड़बड़ी पाई गई है. तो अब किसी कंपनी पर विश्वास करें और किस पर नहीं. मंहगा होने सही में सेफ्टी की गारंटी नहीं देता है. दुनिया भर में इस स्टडी के नतीजों से हड़कंप मच गया है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने भी इसका संज्ञान लेते हुए इस रिसर्च का रिव्यू करवाने की बात की है. Also Read 20 रुपए की पानी की बोतल कैसे आपको जेल पहुंचा सकती है ये जानने के बाद आप प्लास्टिक की बोतल से पानी पीना बंद कर देंगे
एक लीटर पानी के लिए कोहली जितना खर्च करते हैं, उतने में 8 लीटर पेट्रोल आ जाए






















