वेस्ट एशिया की जंग (West Asia War) ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait Of Hormuz) के बंद होने की वजह से इस समय दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल सप्लाई बाधित हुई है. परेशानी सिर्फ आपूर्ति तक सीमित नहीं है. अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुल भी जाए तो भी स्थिति पहले जैसी नहीं हो पाएगी. ईरान के हमलों से खाड़ी देशों में मौजूद एनर्जी प्लांट्स को भी नुकसान पहुंचा है. इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर ने बताया कि अगर युद्ध रुक भी गया तो पहले की तरह स्थिति होने में कम से कम 2 साल लग जाएंगे.
मिडिल-ईस्ट की तबाही अगले 2 साल तक परेशान करेगी, तेल सप्लाई पर IEA ने क्या बता दिया?
Strait Of Hormuz के बंद होने की वजह से इस समय दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत Oil Supply बाधित हुई है. लेकिन दिक्कत बस सप्लाई की नहीं है. अगर स्ट्रेट ऑफ होरमुज खुल भी जाए तो भी स्थिति पहले जैसी नहीं हो पाएगी.


स्विट्जरलैंड के अखबार Neue Zurcher Zeitung से बातचीत के दौरान IEA के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर फतीह बिरोल ने बताया कि सप्लाई जिस तरीके से बाधित हुई है, उससे उबरने में दुनिया को कम से कम 2 साल लगेंगे. उन्होंने कहा कि ऐसा भी नहीं है कि पूरा वेस्ट एशिया 2 साल में पहले जैसा हो जाएगा. ये इस पर निर्भर करेगा कि किस देश में किस तरह से री-कंस्ट्रक्शन का काम होगा. उन्होंने यह भी कहा कि स्थिति सामान्य होने में कितना समय लगेगा, यह देशों के इन्फ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर करेगा। इराक और सऊदी अरब का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इराक में स्थिति सामान्य होने में जितना समय लगेगा, निश्चित तौर पर सऊदी को उससे कम समय लगेगा. क्योंकि सऊदी अरब का इंफ्रास्ट्रक्चर, जाहिर तौर पर इराक से बेहतर है.
एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर बिरोल ने यह चेतावनी भी दी कि वर्तमान में सामने आ रही जियोपॉलिटकल अस्थिरता, वैश्विक अर्थव्यवस्था को बुरी तरह से प्रभावित कर सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि इसे (वैश्विक अर्थव्यवस्था) मुट्ठी भर हथियारबंद तत्वों द्वारा "बंधक" बनाया जा सकता है. उन्होंने इसके लगातार पड़ने वाले प्रभावों का अनुमान लगाया, जिनमें ट्रैवल में रुकावट, सप्लाई चेन में दिक्कत और न्यूक्लियर एनर्जी में नए सिरे से बढ़ती दिलचस्पी शामिल है.
इसके अलावा, अमेरिका और ब्रिटेन के अधिकारियों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री सुरक्षा पर चर्चा की है. क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा सीजफायर 22 अप्रैल को खत्म होने वाला है. खबरों के मुताबिक, अमेरिकी सेना बड़े पैमाने पर समुद्री नाकेबंदी भी लागू कर रही है. ये नाकेबंदी ईरान को पोर्ट्स से निकलने वाले जहाजों को रोकने के लिए की गई है. दूसरी ओर यूरोप के नेता शिपिंग वाले रूट्स को सुरक्षित करने और शांति प्रयासों को समर्थन देने के लिए एक वर्चुअल शिखर सम्मेलन की योजना बना रहे हैं.
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