पश्चिम बंगाल चुनाव में सभी पार्टियां अपनी पूरी ताकत से प्रचार कर रही हैं. इस चुनाव से पहले जो सबसे बड़ा मुद्दा था, वो वोटर लिस्ट की समीक्षा यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़ा था. विपक्ष ने इसे लेकर खूब विरोध किया. SIR की टाइमिंग पर सवाल उठाए गए. आरोप लगाया गया कि चुनाव आयोग सत्ता पक्ष के इशारे पर काम कर रहा है. इस बीच इंडिया टुडे की टीम पहुंची बंगाल की राजधानी कोलकाता के चाइना टाउन में. ये जगह सिर्फ नाम का चाइना टाउन नहीं है. यहां का पूरा कल्चर चीन का है. बस रहने वाले लोग चीनी नहीं है. इस एरिया में एक चाइनीज काली मंदिर भी है.
कोलकाता में रहने वाले इन चाइनीज लोगों को भारतीय होने का गर्व, लेकिन SIR ने डरा दिया
बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक जगह है, नाम है चाइना टाउन. ये जगह सिर्फ नाम का चाइना टाउन नहीं है. यहां का पूरा कल्चर चीन का है. बस रहने वाले लोग चीनी नहीं है. ये लोग कई पीढ़ियों पहले भारत आए थे. यहां तक कि इस एरिया में एक चाइनीज काली मंदिर भी है.


इंडिया टुडे से जुड़े पत्रकार अनिर्बन ने इस इलाके का दौरा किया. यहां के लोगों से उनकी समस्या, चुनावी मुद्दों और SIR जैसी चीजों पर बात की. उनका रिक्शा जैसे ही इलाके में घुसा, उन्हें वहां दीवारों पर चाइनीज में पेंटिंग्स बनी मिली. तृणमूल कांग्रेस का का प्रचार भी इस इलाके में चाइनीज भाषा में ही किया जा रहा था. चुनावी कवरेज के दौरान अनिर्बन एक घर के दरवाजे पर पहुंचे. अंदर से एक महिला आईं. उन्होंने अपना नाम सेसिलिया बताया. उनसे पूछा कि क्या SIR में उनका नाम आया है? इस पर जवाब देते हुए महिला ने कहा कि अभी तक उनका नाम वोटर लिस्ट में नहीं है. लेकिन उनसे कहा गया है कि उनका नाम आ जाएगा. महिला ने कहा,
हम लोग वोट करना चाहते हैं. लेकिन हमारा नाम नहीं है. हमारी पैदाइश यहीं की है. मेरे माता-पिता गुजर चुके हैं. लेकिन वो भी यहीं के थे. हमें किसी का डर नहीं. हम गर्व से कहते हैं कि हम भारतीय हैं. हम इंडियन चाइनीज हैं. बचपन से यहां हैं. हमें खुद को भारतीय कहने पर गर्व है.
इसके बाद अनिर्बन घूमते हुए पहुंचे दूसरे परिवार के पास. ये परिवार भी अपने आप को 'चाइनीज इंडियन' कहता है. इस घर में इंडिया टुडे को एक महिला मिली जिनका नाम शयली कू है. शयली ने SIR के दौरान आई दिक्कतों का जिक्र किया. वोटर लिस्ट में नाम आने की बात पर उन्होंने कहा,
मेरा नाम अब तो लिस्ट में है. लेकिन पहले नहीं था. मेरे पति का नाम आ गया था, लेकिन मेरा नाम नहीं था. अपने पति की डिटेल्स देने पर मेरा नाम जुड़ पाया. आप समझ सकते हैं कि इससे कितना हैरासमेंट झेलना पड़ा. पहले हम लोगों ने कहा कि हम वोट नहीं करेंगे. लेकिन हम कोई रिफ्यूजी तो हैं नहीं. यहीं की पैदाइश हैं.
उन्होंने आगे कहा कि उनसे बर्थ सर्टिफिकेट और माता-पिता का डॉक्यूमेंट मांगा गया. उस जमाने के किस व्यक्ति के पास बर्थ सर्टिफिकेट होगा. उन्होंने कहा,
हम, हमारे माता-पिता यहीं पैदा हुए. 4 पीढ़ी से हम भारत में हैं. मैं इंडियन चाइनीज हूं और मुझे इस पर गर्व है. हमने कहा कि ऐसे कागज बनाने में अगर हमारा हैरासमेंट करेंगे तो हम वोट ही नहीं देंगे. फिर उन्होंने बोला कि ठीक है, पासपोर्ट ले आओ. फिर जाकर हमारा नाम लिस्ट में आया.
इस पूरे इलाके में रहने वाले अधिकतर लोग चाइनीज समुदाय से हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, इस समुदाय के कई लोगों का नाम वोटर लिस्ट में नहीं आया है. इस कवरेज के दौरान अनिर्बन ने एक व्यक्ति से बात की. फ्रांसिस नाम के इस व्यक्ति ने बताया कि SIR में उनके समुदाय कई लोगों का नाम काट दिया गया है. फ्रांसिस बताते हैं कि उनकी मां और तीन बहनों का नाम नहीं आया है. वो लोग भागदौड़ कर रहे हैं कि उनका नाम आ जाए. 4 पीढ़ीयों से भारत में रह रहे फ्रांसिस कहते हैं कि उन्हें भविष्य का डर है, जिस तरह से उनके लोगों का नाम काटा जा रहा है, इससे उन्हें डर है. वोट से नाम हटाया जा चुका है. इसलिए अनिश्चितता बनी हुई है.
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