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बंगाल की खाड़ी में नाव डूबने से 500 लोगों की मौत की आशंका

Bay of Bengal में 2 नावों के डूबने से 500 से ज्यादा Rohingya Refugees के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है. United Nations की दो एजेंसियों ने अपने एक ज्वाइंट स्टेटमेंट में ये जानकारी दी है.

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रोहिंग्याओं से भरी 2 नाव डूबने से 500 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की खबर. (फाइल फोटो- इंडिया टुडे)

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  • बंगाल की खाड़ी में दो नावें डूबने की घटना में लगभग 530 रोहिंग्या शरणार्थी मारे जाने की आशंका जताई गई है, यह जानकारी 16 जुलाई को IOM और UNHCR द्वारा जारी संयुक्त बयान में दी गई।
  • म्यांमार में रोहिंग्या समुदाय पर सेना द्वारा जारी हिंसा और उत्पीड़न के कारण यह समुदाय बेहतर जीवन की तलाश में असुरक्षित समुद्री मार्गों से यात्रा करने को मजबूर हैं, जिससे इस दुर्घटना की पृष्ठभूमि बनी।
  • इस हादसे के बाद विश्व खाद्य कार्यक्रम और शरणार्थी एजेंसियां आपदा राहत कार्यों में जुट गई हैं और समुद्री यात्रा की सुरक्षा बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कदम उठाने की संभावनाएं बढ़ रही हैं।

बंगाल की खाड़ी से गुजर रही 2 नावों के डूबने की खबर है. हादसे में बहुत बड़ी संख्या में लोगों की मौत होने की आशंका जताई गई है. मारे गए लगभग सभी लोग शरणार्थी रोहिंग्या बताए जा रहे हैं. ये समुदाय म्यांमार में लंबे वक्त से जारी हिंसा झेल रहा है.

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गुरुवार, 16 जुलाई को UN की इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (IOM) और यूनाइटेड नेशंस हाई कमिश्नर फॉर रिफ्यूजी (UNHCR) की ओर से एक ज्वाइंट स्टेटमेंट जारी किया गया. इसी में इस हादसे के बारे में जानकारी दी गई. कहा गया कि मारे गए लोग बेहतर जिंदगी और सुरक्षा की तलाश में ऐसे खतरनाक समुद्री रास्तों से यात्रा करने के लिए ‘मजबूर’ थे.

IOM UN Migration की रिपोर्ट के मुताबिक, एजेंसियों ने शुरुआती जानकारी के आधार पर बताया कि ज्यादातर रोहिंग्या रिफ्यूजियों से भरी 2 नावें जून 2026 के आखिरी दिनों में म्यांमार के रखाइन राज्य से निकली थीं. नावों में सवार कुछ लोग बांग्लादेश के शरणार्थी कैंपों से भी आए थे. बयान में कहा गया,

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‘हादसे में मरने वालों की संख्या की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन IOM और UNHCR इस बड़ी घटना को लेकर काफी परेशान हैं.’

बयान में बताया गया है कि समुद्र में हादसे का शिकार हुई पहली नाव में करीब 250 लोग सवार थे. यात्रा शुरू करने के कुछ समय बाद ही इस नाव का कॉन्टैक्ट टूट गया. दूसरी नाव में करीब 280 लोग सवार थे, जो 8 जुलाई को म्यांमार के इरावदी तट के पास डूब गई. एजेंसियों ने बताया कि इन नावों ने खराब मौसम में अपनी यात्रा शुरू की थी. यानी ऐसे समय पर जब समुद्र में खतरनाक लहरें उठती हैं.

IOM और UNHCR ने बताया कि म्यांमार सेना के हिंसक उत्पीड़न की वजह से रोहिंग्या मुसलमान बड़ी संख्या में बांग्लादेश के शरणार्थी कैंपों में चले गए. लेकिन बहुत ज्यादा भीड़ और बुनियादी सुविधाओं की किल्लत के चलते उनका यहां भी रहना मुश्किल हो रहा है. वे किसी दूसरी सुरक्षित और बेहतर जगह, जैसे मलेशिया, इंडोनेशिया या थाईलैंड, की तलाश में निकल रहे हैं. बिना दस्तावेज ऐसा करने का एक ही रास्ता है, समुद्र. बिना सुरक्षा और कमजोर नावों में ज्यादा से ज्यादा संख्या के साथ वे ऐसी यात्राएं करने का जोखिम उठा रहे हैं.

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पिछले साल अंडमान सागर और बंगाल की खाड़ी में भी कई हादसे हुए थे. इनमें करीब 900 रोहिंग्या शरणार्थियों की मौत हो गई या वो लापता हो गए.

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