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नए सिस्टम से EPFO मेंबर्स को क्लेम मिलेंगे ताबड़तोड़, ब्याज वाला नियम तो सोने पे सुहागा है!

नए आर्किटेक्चर (EPFO New technology helps clear claims faster ) से सर्विस रिक्वेस्ट को अलग-अलग रीजनल ऑफिस तक सीमित रखने के बजाय नेशनल लेवल पर प्रोसेस किया जा सकता है. माने पहले जो आप कोई भी सर्विस रिक्वेस्ट करते थे तो वो पहले रीजनल ऑफिस जाती थी, फिर उसे कोई आगे बढ़ाता था. अब मामला सीधे नेशनल लेवल पर जाएगा.

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EPFO के 34 करोड़ मेंबर्स के खाते में 2025-26 का ब्याज डाल कर दिया गया है

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  • EPFO ने 3 जुलाई को CITES का नया वर्जन लॉन्च किया, जिसके तहत 14 जुलाई को एक ही दिन में 11 लाख क्लेम में 3,000 करोड़ रुपये प्रोसेस किए गए और 34 करोड़ मेंबर्स के खाते में ब्याज डाला गया।
  • CITES के नए वर्जन में बदलाव किए गए ताकि क्लेम ऑटो-प्रोसेसिंग बढ़ाई जा सके, जिससे पहले 70% क्लेम्स की तुलना में अब 83% क्लेम्स ऑटो-प्रोसेस हो रहे हैं और प्रोसेसिंग नेशनल लेवल पर सीमित है।
  • नए सिस्टम के कारण एडवांस क्लेम की सीमा बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई है, और आधार-इनेबल्ड UAN होल्डर्स को ऑटोमैटिक ट्रांसफर का लाभ मिलेगा जिससे क्लेम प्रोसेसिंग में तेजी आएगी।

EPFO ने 3 जुलाई को सेंट्रलाइज्ड आईटी इनेबल्ड सर्विसेज (CITES) का नया वर्जन लॉन्च किया था. इसके बाद मंगलवार यानी 14 जुलाई को एक ही दिन में 3,000 करोड़ रुपये के 11 लाख क्लेम प्रोसेस किए गए. 34 करोड़ मेंबर्स के खाते में 2025-26 का ब्याज डाल कर दिया गया है. CITES के नए वर्जन और नियमों में हुए बदलाव की वजह से सब्सक्राइबर्स के 83 फीसदी क्लेम अब ऑटो-प्रोसेस हो रहे हैं. पहले यह आंकड़ा 70 फीसदी था. ऐसे में ये जानना तो जरूरी हो जाता है कि आखिर नया सिस्टम है क्या?

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CITES 2.01 आर्किटेक्चर

आर्किटेक्चर शब्द से परेशान होने की जरूरत नहीं. तकनीक के लिए थोड़ा क्लासी शब्द है आर्किटेक्चर. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक नए आर्किटेक्चर से सर्विस रिक्वेस्ट को अलग-अलग रीजनल ऑफिस तक सीमित रखने के बजाय नेशनल लेवल पर प्रोसेस किया जा सकता है. माने पहले जो आप कोई भी सर्विस रिक्वेस्ट करते थे तो वो पहले रीजनल ऑफिस जाती थी, फिर उसे कोई आगे बढ़ाता था. अब मामला सीधे नेशनल लेवल पर जाएगा.

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आसान नियमों और सेंट्रलाइज़्ड डेटाबेस की वजह से, सदस्य अब साफ तौर पर देख सकते हैं कि वे अपने प्रोविडेंट फंड अकाउंट से कितनी रकम निकाल सकते हैं. अभी तक आपको सिर्फ ये पता होता था कि कितनी रकम जमा है. अंदाजे से रकम निकालनी पड़ती थी. इस वजह से कई बार 100 रुपये मांगने पर 70 ही अकाउंट में आते थे. कुल जमा बात ये है कि पूरा प्रोसेस ऑटोमेटिक किया गया है. इंसानी दखल कम से कम होगा. इसके साथ और क्या बदला है, वो भी जान लीजिए.

# एडवांस क्लेम के लिए ऑटो-सेटलमेंट की सीमा बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई है. इतनी रकम तक सारा काम सिस्टम खुद ही कर देगा.

# फ़ाइनल सेटलमेंट पर ब्याज का कैलकुलेशन अब फाइनल पेमेंट के लिए मंज़ूरी मिलने वाले दिन तक किया जाएगा. माने आपने सर्विस रिक्वेस्ट आज दी और पैसा 15 दिन बाद आया तो सिस्टम ने जिस दिन उसे ओके किया होगा, ब्याज तब तक मिलेगा. बोले तो 12वें दिन या 13वें दिन तक.

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# आधार-इनेबल्ड UAN होल्डर्स को नौकरी बदलने पर प्रोविडेंट फंड के ऑटोमैटिक ट्रांसफर का फ़ायदा मिलेगा, जिससे अलग से ट्रांसफर एप्लीकेशन जमा करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी. माने जैसे ही आपके अकाउंट में नई कंपनी का पीएफ का पैसा आया, पुरानी का काम अपने आप खत्म. हां इसके लिए आपका आधार UAN से कनेक्ट होना चाहिए.

# लगभग 7 लाख ऐसे निष्क्रिय खाते, जिनमें 1,000 रुपये तक की राशि है, उनके पैसे बिना किसी क्लेम एप्लीकेशन या कागज़ी कार्रवाई के अपने-आप जारी कर दिए जाएंगे. बोले तो EPFO अपना सिस्टम हल्का करेगा.

# EPFO का दावा है कि पढ़ाई या इलाज के लिए आंशिक निकासी के क्लेम एक ही दिन में प्रोसेस किए जा सकते हैं. अभी इसमें तीन दिन तक लगते हैं.

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