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'झटका मांस बेचने वालों को इनाम मिलेगा', बीजेपी विधायक का ऐलान

पश्चिम बंगाल के बीजपुर से बीजेपी विधायक सुदीप्ता दास ने ‘झटका’ मटन की दुकान खोलने वालों को 10 हजार रुपये का नकद इनाम देने का ऐलान किया है. उनका कहना है कि बाजार में ‘हलाल’ के साथ ‘झटका’ मांस का विकल्प भी मिलना चाहिए.

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झटका मीट बेचने वालों को सुदीप्ता दास (दाएं) ने 10 हजार देने का ऐलान किया है. (फोटो- India Today)

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  • बीजपुर के बीजेपी विधायक सुदीप्ता दास ने झटका मटन की दुकान खोलने वालों के लिए 10 हजार रुपये का नकद इनाम देने का ऐलान किया है।
  • हिंदू बंगाली समुदाय में हलाल मटन खरीदने में हिचकिचाहट के कारण झटका मटन की मांग बढ़ रही है, जिसे देखते हुए इस पुरस्कार की योजना बनाई गई।
  • इस घोषणा के बाद झटका मटन दुकानों की संख्या बढ़ने की संभावना है, जिससे ग्राहकों को मांस खरीदने के लिए और विकल्प मिलेंगे।

पश्चिम बंगाल के बीजपुर में ‘झटका’ मटन की दुकान खोलने वाले को 10 हजार रुपये का नकद इनाम दिया जाएगा. ये ऐलान बीजेपी विधायक सुदीप्ता दास ने किया है. वो बीजपुर से विधायक हैं. उनका कहना है कि हिंदू बंगाली मांस प्रेमियों को ‘झटका’ मांस ज्यादा पसंद होता है. वो ‘हलाल’ मीट खरीदने में थोड़ा हिचकिचाते हैं. ऐसे में बाजार में ‘हलाल’ के साथ ‘झटका’ मांस की दुकानें भी होनी चाहिए. दास ने इसी को बढ़ावा देने के लिए ‘झटका’ मांस की दुकान खोलने वालों के लिए पुरस्कार का ऐलान किया है. 

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बीजेपी विधायक ने कहा कि कुछ कस्टमर ‘हलाल’ मटन खरीदने में हिचकिचाते हैं. उन्हें झटका मीट ही चाहिए होता है क्योंकि इसमें जानवर को एक ही झटके में काटा जाता है. उन्होंने आगे कहा, 

मैं खुद को सेक्यूलर व्यक्ति मानता हूं, लेकिन ज्यादातर दुकानें हलाल तरीके से काटा गया मांस बेचती हैं. हिंदू बंगाली आमतौर पर झटका मांस पसंद करते हैं. दोनों तरीकों से काटा गया मांस बेचने वाली दुकानें होनी चाहिए ताकि कस्टमर्स को ऑप्शन मिल सके.

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दास ने आगे कहा कि झटका मीट की दुकान लगाने वालों को 10 हजार रुपये वो अपने पास से देंगे. ये उन सभी लोगों के लिए होगी, जो झटका मीट की दुकानें खोेलेंगे. साथ ही जिनकी पहले से झटका मीट की दुकान है, उन्हें भी ये पुरस्कार मिलेगा. 

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झटका और हलाल मांस क्या होता है?

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झटका और हलाल किसी जानवर को काटने के तरीके होते हैं. इन तरीकों के नाम पर ही मांस को झटका या हलाल कहा जाता है. हलाल एक अरबी शब्द है, जिसका मतलब होता है, जायज. यानी ‘जायज’ तरीके से काटे गए जानवर के मांस को ही खाना सही होता है. इस्लामिक परंपरा के हिसाब से जानवर को काटने का जायज तरीका ये होता है कि उसके गले की नस पहले काटी जाए. इसे ‘हलाल’ करना कहते हैं. इस दौरान दुआ भी पढ़ी जाती है. 

इस विधि से काटे जाने वाले जानवर का पूरा खून उसके शरीर से बाहर निकल जाता है. ऐसा माना जाता है कि जानवर को अगर कोई बीमारी है तो वह भी खून के जरिए बाहर आ जाती है. बिना खून के जानवर के मांस को काफी दिनों तक बिना खराब हुए रखा भी जा सकता है. साथ ही खून न होने की वजह से ये मांस मुलायम भी होते हैं. वहीं ‘झटका’ मांस में जानवर को एक झटके से काटा जाता है. मुस्लिम समाज में आमतौर पर हलाल मांस ही खाया जाता है. वहीं हिंदू और सिख समुदाय के कई लोग झटका मांस प्रेफर करते हैं. यही वजह इसे राजनीतिक रंग भी देती है.

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