अमेरिका की सबसे ताकतवर आर्थिक संस्था Federal Reserve ने जब अपनी मौद्रिक नीति यानी Monetary Policy की समीक्षा के लिए पांच बड़े टास्क फोर्स बनाए, तो इन टीमों में तीन भारतीय मूल के नामों ने सबका ध्यान खींच लिया. इनमें सबसे बड़ा नाम है भारत के पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन का. उनके साथ अर्थशास्त्री राज चेट्टी और माइक्रोसॉफ्ट की एग्जीक्यूटिव आशा शर्मा को भी इन अहम पैनलों में जगह मिली है.
अमेरिकी Federal Reserve में रघुराम राजन की एंट्री, RBI से Fed तक कैसे पहुंचा भारत का ये बड़ा नाम?
पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन को अमेरिकी Federal Reserve की Balance Sheet Policy Task Force में शामिल किया गया है. जानिए क्यों Fed ने दुनिया के बड़े अर्थशास्त्रियों के साथ राज चेट्टी और आशी शर्मा जैसे भारतीय मूल के विशेषज्ञों को चुना और इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ सकता है.


इंडिया वालों के लिए ये सिर्फ किसी इंटरनेशनल कमेटी के किसी भारतीय के शामिल होने की खबर भर नहीं है. इस खबर में एक बड़ा संदेश छिपा है. संदेश दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका अपनी आर्थिक नीतियों को आने वाले वक्त की चुनौतियों के हिसाब से ढालना चाहती है और इसके लिए उसने दुनिया के चुनिंदा अर्थशास्त्रियों, केंद्रीय बैंक विशेषज्ञों और टेक्नोलॉजी लीडर्स को साथ जोड़ा है.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, Federal Reserve के नए चेयरमैन केविन वॉर्श ने पांच टास्क फोर्स बनाने का ऐलान किया है. इनका काम होगा कि Fed की नीतियों, काम करने के तरीकों और आर्थिक आंकड़ों के इस्तेमाल की समीक्षा की जाए.
रघुराम राजन को मिली Balance Sheet Policy की जिम्मेदारी
रघुराम राजन को Federal Reserve के Balance Sheet Policy Task Force में शामिल किया गया है. इस पैनल में उनके साथ हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की अर्थशास्त्री कैरेन डायनन और Federal Reserve के पूर्व गवर्नर जेरेमी स्टीन भी हैं.
Balance Sheet Policy आखिर होती क्या है?
जब भी किसी देश का केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था में पैसे की तरलता को कंट्रोल करने के लिए बॉन्ड खरीदता या बेचता है, तो उसका असर उसकी बैलेंस शीट पर पड़ता है. 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद अमेरिकी Fed ने बड़े पैमाने पर सरकारी बॉन्ड और अन्य सिक्योरिटीज खरीदीं, जिसे Quantitative Easing कहा गया.
इससे बाजार में पैसा बढ़ा और अर्थव्यवस्था को सहारा मिला. लेकिन इसके साथ कई सवाल भी खड़े हुए. जैसे इतनी बड़ी बैलेंस शीट को लंबे समय तक रखना कितना सही है? इससे महंगाई, वित्तीय स्थिरता और बाजार व्यवहार पर क्या असर पड़ता है?
रघुराम राजन का अनुभव इसी क्षेत्र में काफी अहम माना जाता है. वो 2013 से 2016 तक भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रहे और इससे पहले International Monetary Fund यानी IMF में Chief Economist रह चुके हैं.
राजन ने 2008 के वित्तीय संकट से पहले ही वैश्विक वित्तीय जोखिमों को लेकर चेतावनी दी थी. बाद में उनकी किताब "Fault Lines" भी वैश्विक वित्तीय असंतुलनों पर चर्चा के लिए चर्चित रही.
राज चेट्टी और आशा शर्मा को भी बड़ी जिम्मेदारी
इस पूरी कवायद में दो और भारतीय मूल के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है. राज चेट्टी को Data Task Force में रखा गया है. राज चेट्टी हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्री हैं और उनका काम आर्थिक असमानता, सामाजिक गतिशीलता यानी Economic Mobility और लेबर मार्केट पर केंद्रित रहा है.
उनकी खासियत ये है कि वो पारंपरिक आर्थिक आंकड़ों के अलावा बड़े प्रशासनिक डेटा और रियल टाइम डेटा का इस्तेमाल करके आर्थिक बदलावों को समझते हैं.
इस टास्क फोर्स का काम होगा कि Federal Reserve आर्थिक फैसले लेते समय जिन आंकड़ों पर निर्भर करता है, उन्हें ज्यादा सटीक और समय के हिसाब से बेहतर कैसे बनाया जाए.
वहीं Microsoft की एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट और Xbox की CEO आशा शर्मा को Productivity and Jobs Task Force में जगह मिली है. इस पैनल में टेक्नोलॉजी और खास तौर पर Artificial Intelligence यानी AI जैसी नई तकनीकों के आर्थिक असर का अध्ययन किया जाएगा. ये इसलिए भी जरूरी है क्योंकि पूरी दुनिया में AI को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि ये नौकरियां खत्म करेगा या नई नौकरियां पैदा करेगा? Productivity यानी कम संसाधनों में ज्यादा उत्पादन बढ़ाने में AI की भूमिका क्या होगी? Fed इसी तरह के सवालों पर नीति बनाने के लिए विशेषज्ञों की राय लेगा.
आखिर Fed को समीक्षा की जरूरत क्यों पड़ी?
Federal Reserve दुनिया का सबसे प्रभावशाली केंद्रीय बैंक माना जाता है. अमेरिका में ब्याज दरों का फैसला सिर्फ वहां की अर्थव्यवस्था को नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के बाजारों को प्रभावित करता है.
महंगाई, रोजगार, तकनीकी बदलाव और वैश्विक वित्तीय संकट जैसी चुनौतियां पहले से काफी बदल चुकी हैं. कोरोना महामारी के बाद सप्लाई चेन में बदलाव आया, महंगाई कई दशकों के उच्च स्तर तक पहुंची और AI जैसी तकनीकों ने रोजगार की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी.
Federal Reserve के चेयरमैन केविन वॉर्श ने कहा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था पिछली एक पीढ़ी में काफी बदल चुकी है और मौजूदा समय में बदलाव की रफ्तार सबसे ज्यादा है.
Fed के मुताबिक, ये सभी टास्क फोर्स स्वतंत्र रूप से काम करेंगी. इन्हें Fed का स्टाफ सपोर्ट करेगा लेकिन इनका काम होगा स्वतंत्र समीक्षा करना और Federal Open Market Committee यानी FOMC को सुझाव देना.
इन पैनलों में कौन-कौन बड़े नाम शामिल हैं?
Federal Reserve ने इन टास्क फोर्स में सिर्फ अर्थशास्त्रियों को नहीं बल्कि केंद्रीय बैंक के पूर्व अधिकारियों, बिजनेस लीडर्स और टेक्नोलॉजी विशेषज्ञों को भी शामिल किया है.
इनमें पूर्व Bank of England Governor , Nobel Prize विजेता , Walmart के पूर्व CEO Doug McMillon और Silicon Valley निवेशक Marc Andreessen जैसे नाम शामिल हैं.
Inflation Frameworks Task Force में महंगाई को समझने और उससे निपटने के तरीकों की समीक्षा होगी. वहीं Communications Task Force ये देखेगा कि अनिश्चित समय में Fed अपनी नीतियों को जनता और बाजार तक कैसे बेहतर तरीके से पहुंचा सकता है.
भारत के लिए इसका क्या मतलब है?
रघुराम राजन का अमेरिकी Federal Reserve की इस प्रक्रिया का हिस्सा बनना भारत के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है. केंद्रीय बैंकिंग, वित्तीय स्थिरता और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भारतीय विशेषज्ञों की पकड़ को दुनिया की बड़ी संस्थाएं लगातार महत्व दे रही हैं.
ये नियुक्ति कोई नीतिगत पद नहीं है और रघुराम राजन Fed के फैसले नहीं लेंगे. उनकी भूमिका सलाह देने और समीक्षा करने वाले विशेषज्ञ की होगी.
लेकिन जिस समय दुनिया की अर्थव्यवस्था महंगाई, AI, रोजगार और वित्तीय अस्थिरता जैसी नई चुनौतियों से जूझ रही है, उस समय तीन भारतीय मूल के विशेषज्ञों का दुनिया की सबसे अहम आर्थिक समीक्षा प्रक्रिया का हिस्सा बनना अपने आप में बड़ी बात है.
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