ईरान और खाड़ी देशों के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर होने वाली एक बेहद अहम बैठक फिलहाल टल गई है. उम्मीद थी कि इस बैठक में शायद इस बेहद ज़रूरी समुद्री रास्ते से तेल और दूसरे सामान की आवाजाही को लेकर कोई रास्ता निकल जाएगा. लेकिन बैठक टलने से अब तनाव कम करने की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है. इससे सस्ते तेल की उम्मीदें टूट गई हैं, क्योंकि तेल की सप्लाई में सुधार के तुरंत कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं. सप्लाई में रुकावटें जरूर बढ़ रही हैं.
हूती अटैक, ईरान-यमन मीटिंग टली, सऊदी की पाइपलाइन ठप... महंगाई अब बढ़ने वाली है?
यमन के नजदीक बाब अल-मंदेब से तेल की सप्लाई पर अड़ंगा लग रहा है. अटैक फिर हुआ है. इसका मतलब ये है कि दुनिया के तेल और सामान की सप्लाई पर दबाव सिर्फ एक रास्ते से नहीं, बल्कि दो ज़रूरी समुद्री रास्तों से बढ़ रहा है. एक तरफ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और दूसरी तरफ बाब अल-मंदेब. जानिए क्यों महंगाई अब बढ़ने वाली है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज समुद्र का एक ऐसा रास्ता है, जो फारस की खाड़ी को दुनिया के बाकी समुद्री रास्तों से जोड़ता है. दुनिया का करीब 20 फीसदी तेल और गैस इसी रास्ते से जहाजों में भरकर दूसरे देशों तक जाता है. होर्मुज पर ईरान की पाबंदी और अमेरिका की नाकाबंदी से जहाजों की आवाजाही रुकी है. इसका असर सिर्फ ईरान या अरब देशों पर नहीं, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ रहा है.
ईरान-खाड़ी देशों की बैठक टलीइसी वजह से ओमान की मदद से ईरान और खाड़ी के अरब देशों के बीच बातचीत की कोशिश की जा रही थी. बैठक में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही को लेकर एक व्यवस्था बनाने पर चर्चा होनी थी. ईरान की न्यूज एजेंसी फार्स ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के हवाले से बताया कि ओमान में होने वाली एक जरूरी बैठक फिलहाल टाल दी गई है.
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के एक अधिकारी ने कहा कि कुछ खाड़ी देशों ने बैठक टालने को कहा था. इसके बाद ईरान और ओमान ने मिलकर बैठक को आगे बढ़ाने का फैसला किया. अब ईरान और ओमान बात करके बैठक की नई तारीख तय करेंगे.
सऊदी अरब की ऑयल पाइपलाइन बंदइसी समय दूसरी तरफ हालात और खराब हो रहे हैं. सऊदी अरब की एक बेहद ज़रूरी तेल पाइपलाइन 'ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन' पर ड्रोन हमला हुआ. इसके बाद सऊदी अरब ने 'ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को फिलहाल बंद कर दिया है.
ये कोई छोटी पाइपलाइन नहीं है. करीब 1,200 किलोमीटर लंबी ये पाइपलाइन सऊदी अरब के पूर्वी क्षेत्र से तेल को पूर्वी क्षेत्र के यानबू पोर्ट तक ले जाती है, जो रेड सी से सटा है. इससे सऊदी को दुनिया भर में तेल सप्लाई करने के लिए होर्मुज से इतर दूसरा समुद्री रास्ता मिल जाता है.
यही सबसे बड़ी बात है कि ये इस पाइपलाइन के जरिए सऊदी अरब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बायपास कर सकता है. यानी अगर पूर्वी छोर पर होर्मुज से जहाज नहीं जा पा रहे हैं, तो पश्चिम छोर से तेल को दूसरे रास्ते से भेजने के लिए ये पाइपलाइन बेहद जरूरी है. फिलहाल के लिए ये रास्ता भी बंद हो गया है.
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस पाइपलाइन से हाल के महीनों में रोजाना करीब 40 से 50 लाख बैरल तेल भेजा जा रहा था. यह दुनिया की कुल तेल सप्लाई का लगभग 4 से 5 प्रतिशत है. अगर ये पाइपलाइन ज्यादा समय तक बंद रहती है, तो सऊदी अरब के लिए परेशानी बढ़ सकती है.
सऊदी अरब के रेड सी के बंदरगाह यानबू में इतना तेल मौजूद है कि पाइपलाइन बंद रहने की स्थिति में वहां से करीब 5 से 7 दिन तक एक्सपोर्ट जारी रखा जा सकता है. लेकिन उसके बाद क्या होगा, इसे लेकर चिंता बढ़ रही है.
हूती का दखल बढ़ता जा रहाईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों की यमन में लगातार बढ़त ने सऊदी अरब समेत अरब देशों के लिए हालात और चिंताजनक बना दिए हैं. हूती ने रविवार, 13 सितंबर की रात सऊदी अरब पर फिर से हमला किया. सऊदी पर नए सिरे से मिसाइल और ड्रोन हमले हुए.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, हूती मिलिट्री के स्पोक्सपर्सन, ब्रिगेडियर जनरल याह्या सारी ने एक बयान जारी किया. इसमें कहा कि उन्होंने सऊदी अरब के नजरान इलाके के शरुराह प्रांत में एक मिलिट्री बेस को निशाना बनाया. उन्होंने हमले का कोई सबूत नहीं दिया और ना ही बताया कि हमला कब हुआ. इससे पहले 8 सितंबर को भी हूती ने सऊदी अरब के चार शहरों पर हमले किए थे, जिनमें कई लोग घायल हो गए.
हूती को लेकर चिंता इसलिए भी बढ़ गई, क्योंकि हूती लड़ाके रेड सी इलाके में अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं. हाल ही में हूती ने यमन की इंटरनेशनल लेवल पर मान्यता प्राप्त सरकार से रेड सी से सटा मुखा द्वीप कब्जा लिया. इसके अलावा, हूतियों ने पेरिम आइलैंड पर भी कब्जा कर लिया, जो बाब अल-मंदेब के बेहद करीब है.
इस पूरी कहानी में बाब अल-मंदेब एक और महत्वपूर्ण जगह है. ये भी समुद्र का एक बेहद ज़रूरी रास्ता है. ये रेड सी के मुहाने पर है और एशिया, यूरोप और वेस्ट एशिया के बीच जहाजों की आवाजाही के लिए बहुत अहम है.
हूती बाब अल-मंदेब से अरब देशों के तेल की सप्लाई में अड़ंगा लगाता है. इसका मतलब ये है कि दुनिया के तेल और सामान की सप्लाई पर दबाव सिर्फ एक रास्ते से नहीं, बल्कि दो ज़रूरी समुद्री रास्तों से बढ़ रहा है. एक तरफ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और दूसरी तरफ बाब अल-मंदेब.
सप्लाई घटने का डर, तेल महंगाजब तेल की सप्लाई को लेकर डर बढ़ता है, तो तेल की कीमत बढ़ने लगती है. यही अब देखने को मिल रहा है. तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच चुकी है. सोमवार 14 सितंबर को ब्रेंट क्रूड करीब 108 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी 100 डॉलर के ऊपर कारोबार कर रहा था.
इसे एक छोटे से एग्जाम्पल से समझिए. मान लीजिए आपके घर तक दूध पहुंचाने वाली सड़क बंद हो जाए. फिर दूसरी सड़क पर भी ट्रैफिक शुरू हो जाए. इससे दूध की सप्लाई में दिक्कत होगी. सप्लाई पर असर होगा, तो डिमांड जल्दी और आसानी से पूरी नहीं होगी. जब डिमांड अच्छी होती है, और सप्लाई कम होती है, तो सामान का प्राइस बढ़ जाता है.
वैसे भी दोनों रास्तों पर रुकावटों की वजह से दूध वाले के लिए आपके घर तक दूध पहुंचाना और मुश्किल हो जाएगा. दूसरे रूट से ले जाने में ज्यादा लागत आएगी, जिसकी भरपाई के लिए वो दूध की कीमत बढ़ा सकता है. ऐसे में दूध महंगा हो सकता है.
तेल के साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा है. दुनिया को डर है कि अगर वेस्ट एशिया से तेल की सप्लाई लंबे समय तक प्रभावित हुई, तो बाजार में तेल कम पड़ सकता है. जब किसी चीज के कम मिलने का डर होता है, तो उसकी कीमत बढ़ जाती है.
तेल महंगा होगा तो सिर्फ पेट्रोल-डीजल महंगा होने की चिंता नहीं होगी. ट्रक चलाने का खर्च बढ़ सकता है, जिससे सामान ढोने की लागत बढ़ सकती है. इससे कई चीजों की कीमत पर असर पड़ सकता है. यानी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की यह कहानी सिर्फ समुद्र में चल रहे जहाजों की कहानी नहीं है. इसका असर दुनिया भर के लोगों की जेब तक पहुंच सकता है.
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फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यही है कि कूटनीतिक बातचीत कब शुरू होती है, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही कब सामान्य होती है, और सऊदी अरब की तेल पाइपलाइन कब दोबारा शुरू होती है. क्योंकि अगर तनाव बढ़ता रहा और तेल की सप्लाई पर दबाव बना रहा, तो दुनिया को महंगे तेल और बढ़ती महंगाई की एक और बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है.
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