पाकिस्तान के सिंध प्रान्त में एक कोर्ट ने दो नाबालिग लड़कियों की उनके घर वापस जाने की याचिका ख़ारिज कर दी है. इंटरनेट पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें लड़कियां कोर्ट के बाहर रो-रो कर कह रही हैं कि ‘मुझे घर जाना है.’ दोनों लड़कियां हिंदू बहनें हैं. दोनों के परिवार आरोप है कि जबरन उनका धर्म परिवर्तन कराया गया है. कोर्ट ने उन दोनों को घर वापस भेजने के बजाय एक सेफ हाउस में शिफ्ट करने का आदेश दिया है.
पाकिस्तान: हिंदू लड़कियों का जबरन धर्मांतरण और शादी, कोर्ट ने भी नहीं मानी 'घर वापसी' की गुहार
पाकिस्तान के सिंध प्रांत में दो हिंदू लड़कियों के अपहरण और जबरन शादी करने का केस सामने आया है. परिवार का आरोप है कि दोनों लड़कियों का जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया और फिर उनकी शादी कराई गई. हालांकि, कोर्ट ने उनकी घर वापसी की याचिका खारिज कर दी.

इंडिया टुडे के मुताबिक कराची बेस्ड जर्नलिस्ट वींगास ने इस घटना को रिपोर्ट किया है. उनकी रिपोर्ट के मुताबिक, घटना सिंध प्रान्त के टंडो अल्लाहयार जिले की है. लड़कियों की उम्र 13 और 14 साल है. पीड़ित लड़कियों का नाम सीता और रूपी बताए जा रहे हैं. बता दें पहले भी हिंदू नाबालिगों के अपहरण और धर्म परिवर्तन की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं. इस मामले ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
पूरा मामला क्या है?रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों लड़कियां कच्छी कोली हिंदू समुदाय की सदस्य हैं. घरवालों का आरोप है कि पहले लड़कियों का अपहरण किया गया, फिर उनका जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया. इसके बाद उनकी जबरन शादी करा दी गई. आरोप है कि उनकी शादी अमजद सोलंगी और मंसूर सोलंगी से कराई गई. वींगास का कहना है कि पिछले दस दिनों में सिंध प्रान्त में करीब 6 हिन्दू लड़कियों का अपहरण कर उनका जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया.
9 सितंबर को रिपोर्टर ने एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें लडकियां कोर्ट के बाहर मदद की गुहार लगा रही हैं.
एक्टिविस्ट ने क्या कहा?इस वीडियो पर पाकिस्तान के सोशल एक्टिविस्ट की भी प्रतिक्रिया आई है. एक एक्टिविस्ट सोरठ सिंधु का कहना है कि लड़कियों ने कोर्ट में साफ़ कहा था कि उन्हें घर वापस जाना है. उन्होंने इन्साफ की मांग की है.
मगर कोर्ट ने उन्हें दो दिन के लिए सेफ हाउस में भेज दिया है. अभी तक अपहरण, कथित धर्म परिवर्तन और जबरन शादी की जानकारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. हालांकि परिवार का आरोप है कि नाबालिगों को अगवा किया गया था. परिवार का दावा है कि ऑफिसियल डॉक्यूमेंट के हिसाब से लड़कियों की उम्र 13 और 14 साल है. सिंध चाइल्ड मैरिज रेस्ट्रेंट एक्ट 2013 के तहत पाकिस्तान में दोनों जेंडर के लिए शादी की न्यूनतम उम्र 18 साल है.
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सिंध में पहले के मामलेसिंध के टंडो अल्लाहयार में हिंदुओं पर ज़्यादतियों से जुड़ा यह कोई पहला विवाद नहीं है. जुलाई 2025 में, खेंची कोल्ही, लता देवी मेघवार और मीना मेघवार के परिवारों ने सुल्तानबाद पुलिस स्टेशन में अलग-अलग FIR दर्ज कराईं. उन्होंने आरोप लगाया कि लड़कियों का अपहरण कर ज़बरदस्ती धर्म परिवर्तन कराया गया था.
पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग के अनुसार, बाद में ये तीनों सिंध हाई कोर्ट की हैदराबाद सर्किट बेंच के सामने पेश हुईं. तीनों ने कहा कि उन्होंने अपनी मर्ज़ी से धर्म परिवर्तन किया और शादी की थी. जुलाई 2025 में, वींगास ने X पर किया गया सवाल पूछा कि क्या हिंदू माएं अपनी बेटियों को धर्म परिवर्तन के लिए जन्म देती हैं? क्या मुसलमान अपनी बेटियों को अजनबियों को देंगे? अब माइनॉरिटी राइट एक्टिविस्ट ने इस मामले में स्वतंत्र जांच की मांग की है.
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