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ट्रंप तो भारतीयों के पीछे ही पड़ गए, H-1B वीजा में 60 दिन का ग्रेस पीरियड होगा खत्म!

US के Homeland Security Department ने H-1B समेत कुछ अस्थायी वर्क वीजा धारकों के लिए 60 दिन की छूट खत्म करने का प्रस्ताव दिया है. नियम बदला तो नौकरी जाने के बाद अमेरिका में रुककर नया स्पॉन्सर और नई नौकरी ढूंढना मुश्किल हो सकता है.

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प्रेसिडेंट ट्रंप प्रशासन H1-B वीजा पर फैसला ले सकता है (PHOTO- India Today)

प्रेसिडेंट डॉनल्ड ट्रंप के प्रशासन ने एक ऐसा प्रस्ताव दिया है, जिसका असर लाखों भारतीयों पर पड़ सकता है. ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीजा के एक प्रावधान को लेकर एक प्रस्ताव रखा है. इसके मुताबिक H1-B वीजा होल्डर्स को मिलने वाला 60 दिन का 'ग्रेस पीरियड' (छूट की अवधि) खत्म किया जा सकता है. ये ग्रेस पीरियड H-1B वीजा पर आने वाले प्रोफेशनल्स सहित कुछ विदेशी कर्मचारियों को नौकरी छूटने के बाद भी अमेरिका में रहने और नया स्पॉन्सर (काम देने वाली कंपनी) खोजने की इजाजत देता है.

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इस प्रस्तावित बदलाव का भारत के टेक प्रोफेशनल्स पर बड़ा असर पड़ सकता है. क्योंकि H-1B वीजा होल्डर्स में बड़ी संख्या में भारत के लोग अमेरिका में काम करते हैं. ये लोग अमेरिका के टेक्नोलॉजी और सर्विस सेक्टर में काम करते हैं. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक 10 सितंबर को 'फेडरल रजिस्टर' में अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने यह प्रस्ताव दिया है. इसके मुताबिक H-1B और कुछ अन्य अस्थायी वर्क वीजा वाले लोगों को नौकरी खत्म होने के तुरंत बाद अमेरिका छोड़ना होगा. उन्हें दूसरी नौकरी खोजने या देश छोड़ने की व्यवस्था करने के लिए 60 दिन तक का समय नहीं मिलेगा.

2017 से दिया जा रहा है ‘ग्रेस पीरियड’

60 दिन के ग्रेस पीरियड की व्यवस्था 2017 से लागू है. यह 60 दिन विदेशी कर्मचारियों को ऐसा अमेरिकी एम्प्लॉयर माने नौकरी देने वाला खोजने का समय देती है जो उन्हें स्पॉन्सर करने को तैयार हो. यही ग्रेस पीरियड उन्हें देश छोड़ने की व्यवस्था करने का भी मौका देता है. ग्रेस पीरियड का इस्तेमाल लोग घर बदलने और बच्चों के स्कूल से जुड़े मामलों को निपटाने के लिए भी करते हैं.

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भारतीयों पर कितना असर?

H-1B वीजा न सिर्फ वहां काम करने वाले लोगों, बल्कि US की टेक इंडस्ट्री के लिए भी जरूरी है. क्योंकि यह इंडस्ट्री काफी हद तक भारत और चीन के कर्मचारियों पर निर्भर है. भारत की आईटी कंपनियां जैसे टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इन्फोसिस, एच सी एल टेक और LTIMindtree वीजा के लिए स्पॉन्सर करने वाली प्रमुख कंपनियों में शामिल हैं. वहीं डेलॉइट, PwC और अर्न्स्ट एंड यंग जैसी कंसल्टेंसी कंपनियां भी बड़े पैमाने पर लोगों को स्पॉन्सर करती हैं.

(यह भी पढ़ें: ट्रंप का एक और फैसला कोर्ट ने पलटा, H-1B वीजा की 1 लाख डॉलर फीस रद्द, भारतीयों की चांदी होगी!)

कहा जा रहा है कि इस फैसले का सबसे बड़ा असर भारतीयों पर पड़ेगा. क्योंकि इससे नौकरी छूटने (ले-ऑफ) के बाद नया एम्प्लॉयर खोजने के लिए मिलने वाला समय काफी कम हो जाएगा. 

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वीडियो: H-1B वीजा पर डॉनल्ड ट्रंप ने कर दिया बड़ा एलान, जवाब के लिए भारत की क्या तैयारी?

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