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नेतन्याहू की पार्टी को नहीं मिला बहुमत, चुनाव नतीजे देख कहा- 'बेईमानी हो गई'

इजरायल चुनाव के बाद नेतन्याहू की पार्टी लिकुड ने अरब पार्टियों पर धांधली का आरोप लगाया है. चुनाव आयोग शिकायतों की जांच कर रहा है. किसी भी गठबंधन को बहुमत नहीं मिला है. सरकार बनाने में अरब पार्टियों की भूमिका अहम हो सकती है.

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नेतन्याहू की पार्टी लिकुड ने अरब पार्टियों पर धांधली का आरोप लगाया. (Courtesy- ITG)

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  • इजरायल में 27 अक्टूबर को हुए चुनाव के बाद किसी भी पक्ष को संसद में 61 सीटें नहीं मिलीं, जिससे सरकार गठन के लिए गठबंधन आवश्यक हो गया है।
  • प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की पार्टी लिकुड ने चुनाव में अरब पार्टियों द्वारा मतदाता प्रभावित करने और चुनाव प्रचार में गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है।
  • चुनाव आयोग ने शिकायतों की जांच शुरू कर दी है और अगर सरकार गठन के लिए आवश्यक समर्थन नहीं मिला तो इजरायल में फिर से चुनाव कराने की संभावना बनी हुई है।

इजरायल में चुनाव के बाद सरकार बनाने की लड़ाई तेज हो गई है. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की पार्टी लिकुड ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाया है. पार्टी का कहना है कि अरब पार्टियों ने चुनाव को ‘चुरा लिया’. उसने पुलिस और इजरायल की घरेलू खुफिया एजेंसी शिन बेट (Shin Bet) से जांच कराने की मांग की है. हालांकि, ये महज़ आरोप हैं. चुनाव आयोग ने कहा है कि उसे मिली शिकायतों की जांच की जा रही है.

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किसी को बहुमत नहीं मिला 

इजरायल की संसद नेसेट में कुल 120 सीटें हैं. सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सीटें चाहिए. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिलने का अंदाजा है. वहीं, पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें मिल सकती हैं. अरब पार्टियों राम (Ra’am) और जॉइंट लिस्ट को मिलाकर 19 सीटें मिलने का अनुमान है. ऐसे में सरकार बनाने के लिए इन पार्टियों का समर्थन अहम हो सकता है. 

लिकुड ने क्या आरोप लगाए?

बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने आरोप लगाया कि अरब पार्टियों ने वोटरों को प्रभावित करने के लिए गंभीर अपराध किए. पार्टी ने कहा,

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‘इजरायल में चुनाव उन अरब पार्टियों ने चुरा लिया, जो आतंकवाद का समर्थन करती हैं और यहूदी राष्ट्र को खत्म करना चाहती हैं. उन्होंने मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए रिश्वतखोरी, धमकी, हिंसा, जालसाजी और अवैध सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल जैसे गंभीर आपराधिक काम किए.’ 

पार्टी ने दावा किया कि वह पुलिस, शिन बेट और केंद्रीय चुनाव आयोग को सैकड़ों गवाहियों और दूसरे सबूतों के दस्तावेज सौंप रही है. उसने ये भी आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर एक से ज्यादा लोग एक साथ वोटिंग बूथ में गए और कुछ जगहों पर डाले गए वोटों की गिनती में गड़बड़ी हुई. 

चुनाव आयोग ने क्या कहा?

रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल के केंद्रीय चुनाव आयोग ने बताया कि उसे लिकुड की शिकायत मिल गई है. आयोग के मुताबिक, उसने चुनाव में गड़बड़ी की शिकायतों की जांच शुरू कर दी है. आयोग के डायरेक्टर जनरल डीन लिवने ने 25 अक्टूबर को सभी राजनीतिक पार्टियों को इस प्रक्रिया की जानकारी दी थी. मतदान से दो दिन पहले पार्टियों से उन पोलिंग बूथों की जानकारी मांगी गई थी, जहां उन्हें रिजल्ट्स की दोबारा जांच की जरूरत लगती थी. अंतिम चुनावी नतीजे 4 नवंबर तक आने की उम्मीद है. अभी लाखों विशेष मतों की गिनती बाकी है.  

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अरब पार्टियों की भूमिका अहम 

अरब पार्टियों को 19 सीटें मिलने का अनुमान है. ऐसे में सरकार बनाने की कोशिश कर रहे दोनों पक्षों के लिए उनका समर्थन अहम हो सकता है. नेतन्याहू पहले अरब पार्टियों के साथ गठबंधन करने का विरोध करते रहे हैं. डेमोक्रेट्स लीडर यायर गोलान ने कहा कि अरब प्रतिनिधियों के साथ मिलकर सरकार बनाने के विकल्प पर विचार होना चाहिए. जॉइंट लिस्ट के अध्यक्ष यूसुफ जबरीन ने भी यही रास्ता अपनाने का संकेत दिया.

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘खून-खराबे वाली सरकार, वर्चस्व की राजनीति, नस्लवाद और लोगों को बाहर रखने की सोच के मुकाबले हम एक बिल्कुल अलग विकल्प पेश करते हैं.’

उन्होंने आगे कहा, ‘बदलाव यहूदी और अरब लोगों की साझेदारी से आएगा. यह साझेदारी सच्ची और बराबरी की होनी चाहिए.’

फिर चुनाव हो सकते हैं?

इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने सभी पार्टियों से अपील की है कि वे बातचीत के दौरान खुले मन से आगे बढ़ें और दोबारा चुनाव से बचने की कोशिश करें. उन्होंने कहा, ‘हमें एक और चुनाव से बचने के लिए हर संभव कोशिश करनी चाहिए. इसलिए मैं उम्मीद करता हूं कि बातचीत के लिए आने वाला हर पक्ष खुले मन से आए.’ 

चुनाव मंगलवार 27 अक्टूबर को हुआ था और गिनती अभी जारी है, इसलिए आंकड़े बदल सकते हैं. लेकिन सवाल ये है कि क्या नेतन्याहू या विपक्ष 61 सीटों का समर्थन जुटा पाएगा. अगर कोई भी पक्ष सरकार बनाने के लिए जरूरी समर्थन नहीं जुटा सका, तो इजरायल में फिर से चुनाव हो सकते हैं.

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