ब्राज़ील के दक्षिणपंथी नेता फ्लावियो बोल्सोनारो को चुनावी हार के बाद अमेरिका के मियामी शहर में देखा गया है. ब्राज़ीलियन अखबार ओ ग्लोबो ने दावा किया कि फ्लावियो मंगलवार 27 अक्टूबर को मियामी में लैंड हुए. उन्हें उनके भाई एडुआर्डो रिसीव करने पहुंचे थे. वहीं चुनाव में विजयी रहे लूला दा सिल्वा ने इसे ‘शर्मनाक’ बताया है.
जेल में बंद पिता को छोड़ अमेरिका भाग गए फ्लावियो, ब्राजील चुनाव में हार के बाद देश छोड़ा
ब्राज़ील के दक्षिणपंथी नेता फ्लावियो बोल्सोनारो को चुनाव में मिली हार के बाद देश छोड़कर अमेरिका चले गए हैं. लूला दा सिल्वा ने फ्लावियो को हराकर चौथी बार जीत दर्ज की. अब फ्लावियो को अमेरिका के मियामी में देखा गया है.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने रॉयटर्स के हवाले से लिखा कि फ्लावियो को ब्राज़ील के सुप्रीम कोर्ट ने 24 घंटे के अंदर पासपोर्ट जमा करवाने को कहा था. मगर उन्होंने ऐसा नहीं किया. ये आदेश मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक केस में दिया गया था, ताकि वो देश छोड़ के न जा सकें. मगर फ्लावियो ने उनपर लगे सभी आरोपों को नकारा है.
रविवार, 25 अक्टूबर को ब्राज़ील में चुनावी नतीजे आए. फ्लावियो नतीजों के दो दिन बाद ही अमेरिका चले गए. लूला को करीब 51.75 फीसदी वोट मिले, जबकि फ्लावियो को 48.25 फीसदी वोट मिले थे. हालांकि फ्लावियो ने अभी तक अपनी हार मंजूर नहीं की है.
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्लावियो के भाई एडुआर्डो पिछले साल से अमेरिका में रह रहे हैं. वो वहां राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप से अपने पिता के लिए पैरवी करने गए थे. उनके पिता जायर बोल्सोनारो ब्राज़ील के पूर्व राष्ट्रपति रह चुके हैं. फिलहाल ब्राजील की ही एक जेल में बंद हैं. इससे पहले ऐसी खबरें आई थीं कि ट्रंप प्रशासन फ्लावियो और उनके परिवार को वीज़ा दे सकता है. अब उन्हें अमेरिका में देखा गया है.
फ्लावियो बोल्सोनारो ने पहले भी ट्रंप के साथ अपने संबंधों का जिक्र किया है. वे इस साल मई में वाइट हाउस भी गए थे. भले ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने लूला के खिलाफ हुए रनऑफ चुनाव में बोल्सोनारो का खुलकर समर्थन नहीं किया. लेकिन उन्होंने बिना किसी सबूत के ये कह दिया कि ब्राजील के चुनाव में "धांधली" हुई थी. वहीं, AP ने रिपोर्ट किया है कि फ्लावियो को देश छोड़ने का सुझाव उनके भाई ने ही दिया था.
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ब्राजील के मौजूदा राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा ने कहा कि बोलसोनारो का देश छोड़कर जाना "शर्मनाक" है. AFP की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रासीलिया में अपने 81वें जन्मदिन के जश्न के दौरान लूला ने टिप्पणी की, "जो व्यक्ति चुपके से अपना देश छोड़कर चला जाए, जाहिर है कि वह कुछ छिपा रहा होगा. ब्राजील छोड़कर जाने का ये कदम शर्मनाक है."
फ्लावियो ने इससे पहले दावा किया कि उनका “देश छोड़ने का कोई इरादा नहीं है”. इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में उन्होंने कहा कि ब्राजील से उनके बाहर जाने पर लगी रोक, डराने-धमकाने की एक चाल है. उन्होंने आगे कहा कि वो वामपंथी सरकार के खिलाफ विपक्ष का नेतृत्व करेंगे. मगर अब वो अमेरिका चले गए.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक, फ्लावियो शायद वही गलती दोहरा रहे हैं जो उनके पिता ने की. फ्लावियो ने अपने पिता की तरह ही लूला की जीत को नहीं माना और अमेरिका चले गए. जायर बोल्सोनारो जब बाद में ब्राज़ील लौटे तो उन्हें एक केस में 27 साल कैद की सज़ा सुना दी गई.
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