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भारत के अंतरिक्ष वाले 'मिशन शक्ति' से क्यों नाखुश है नासा?

NASA ने कहा- भारत के परीक्षण से अंतरिक्ष में खतरनाक लेवल पर कचरा बढ़ा

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24 टुकड़े इंटरनेशनल स्पेस सेंटर के पास चक्कर लगा रहे हैं और ये खतरनाक साबित हो सकते हैं- NASA
तारीख 27 मार्च 2019. दिन बुधवार. सुबह 11 बजकर 23 मिनट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ट्वीट किया. लिखा कि पौने 12 बजे से लेकर 12 बजे के बीच एक महत्वपूर्ण संदेश लेकर आपके बीच आऊंगा. टीवी और रेडियो पर जुड़े रहिए.
अब इस खबर के बाद मानो भूचाल आ गया. लोग एटीएम पर पैसे निकालने के लिए खड़े हो गए. मीडिया में पाकिस्तान से युद्ध की खबरें चलने लगीं. जितने लोग उतनी तरह की बातें होने लगीं. लेकिन थोड़ी ही देर में सारी कयासबाजी पर पूर्ण विराम लग गया. पीएम मोदी का राष्ट्र के नाम संदेश प्रसारित हुआ. देशवासियों को जानकारी मिली कि भारत ने स्पेस में सैटेलाइट गिराने की क्षमता हासिल कर ली है. पीएम मोदी ने खुद जानकारी दी कि भारत ने सिर्फ 3 मिनट के भीतर अंतरिक्ष में एक लाइव सैटलाइट को मार गिराया है.
पीएम मोदी ने देश के नाम संबोधन में 'मिशन शक्ति' की जानकारी दी थी. (तस्वीर साभार-ट्विटर)
पीएम मोदी ने देश के नाम संबोधन में 'मिशन शक्ति' की जानकारी दी थी. (तस्वीर साभार-PTI)

ये भारत के लिए एक बड़ी बात थी. क्योंकि इससे पहले ये क्षमता सिर्फ अमेरिका, रूस और चीन के पास ही थी. अब भारत के 'मिशन शक्ति' को NASA ने भयंकर बताया है. NASA के एडमिनिस्ट्रेटर जिम ब्राइडनस्टाइन ने टाउन हॉल मीटिंग के ज़रिए इस बात की जानकारी दी .
ब्राइडनस्टाइन ने कहा कि भारत ने जिस उपग्रह को नष्ट किया उससे अंतरिक्ष के कक्षा में 400 टुकड़ों का मलबा तैयार हुआ. उनके मुताबिक सभी टुकड़े इतने बड़े नहीं है कि उनका पता लगाया जा सके. नासा अभी 10 सेंटीमीटर या उससे बड़े टुकड़ों का ही पता लगा पाया है. जिनकी संख्या 60 बताई गई है.
जिम ब्राइडनस्टाइन के मुताबिक:
ऐसे 24 टुकड़े इंटरनेशनल स्पेस सेंटर के पास चक्कर लगा रहे हैं और ये खतरनाक साबित हो सकते हैं. चिंता की बात ये है कि सैटेलाइट नष्ट होने के मलबा स्पेस सेंटर के ऊपर पहुंच गया है. इस तरह की गतिविधियां फ्यूचर में ह्यूमन स्पेस मिशन के लिए अच्छी साबित नहीं होंगी. हमारे लिए ये एक्सेप्टेबल नहीं है.
नासा चीफ ने ये भी कहा कि पिछले सात दिनों में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से मलबों के टकराने का खतरा 44 प्रतिशत तक बढ़ चुका है. हालांकि अच्छी बात ये है कि ये खतरा समय के साथ कम हो जाएगा. नासा चीफ ने कहा कि चीन ने भी ऐसा ही परीक्षण 2007 में किया था. जिसके बाद भारी मात्रा में मलबा जुटा था. उन मलबों से नासा अभी भी जूझ रहा है.
टाउनहॉल मीटिंग के दौरान नासा चीफ ने ये बात साफ की कि उन्हें डर है कि भविष्य में कहीं दूसरे देश भी ऐसा परीक्षण ना कर दें. क्योंकि जब एक देश ऐसा करता है तो उन्हें भी लगता है कि वो ऐसा कर सकते हैं. इसीलिए नासा इस बात को सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में ऐसा न हो. साथ ही ये बात दुनिया को बतानी पड़ेगी कि ऐसा करने से कितना गहरा असर पड़ता है.
ब्राइडनस्टाइन का पूरा स्टेटमेंट 07:42 से 14:05 के बीच आप सुन सकते हैं:



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