मध्य प्रदेश के इंदौर में प्रशासन ने पिछले दो दिनों में शहर के अलग-अलग धार्मिक स्थलों से कुल 437 लाउडस्पीकर हटा दिए हैं. प्रशासन सख़्त है कि सभी को नियमों का पालन करना होगा. ख़बर है कि एक मुस्लिम प्रतिनिधिमंडल इस क़दम पर आपत्ति जताने के लिए अफ़सरों से मिला है.
MP सरकार ने धार्मिक स्थलों से उतरवाए लाउडस्पीकर, मुसलमानों के ग्रुप ने SC का नाम ले क्या आपत्ति जताई?
Madhya Pradesh के Indore में प्रशासन लाउडस्पीकर को लेकर सख़्त है. कहा है कि सभी को नियमों का पालन करना होगा. एक मुस्लिम प्रतिनिधिमंडल इस क़दम पर आपत्ति जताने के लिए अफ़सरों से मिला. हालांकि, CM Mohan Yadav पहले ही इस मसले पर अपना रुख साफ़ कर चुके हैं.

एडिशनल DCP राजेश दंडोतिया ने मीडिया को बताया कि राज्य सरकार के निर्देशानुसार, पिछले 48 घंटों में शहर के अलग-अलग समुदायों के कुल 258 धार्मिक स्थलों से ये लाउडस्पीकर हटाए गए हैं.
मध्यप्रदेश सरकार के आदेश के तहत शनिवार, 25 मई को धार्मिक स्थलों से ध्वनि विस्तारक यंत्रों (लाउड स्पीकर) को हटाने की कार्रवाई की गई. 258 विभिन्न धार्मिक स्थलों से कुल 437 लाउडस्पीकर हटाए गए, जिनकी आवाज़ निर्धारित मानदंडों से ऊपर थी. चाहे मंदिर हो या मस्जिद, सभी कमेटियों से बात करने के बाद ही ये कार्रवाई की गई है.
पुलिस ने ये अपील भी की है कि भविष्य में यहां लाउडस्पीकर इस्तेमाल न करें.
इंडियन एक्सप्रेस अख़बार में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक़, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हाल ही में पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की. उन्होंने अफ़सरों से लाउडस्पीकर के ही संबंध में दिशा-निर्देश लागू करने के लिए कहा था. उसी के बाद ये कार्रवाई हुई है.
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पिछले साल मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने के मात्र एक दिन बाद ही मोहन यादव ने इस मामले पर अपना रुख साफ़ कर दिया था. धार्मिक समारोहों और पब्लिक स्पेस पर तय सीमा से ज़्यादा आवाज़ वाले लाउडस्पीकर/डीजे पर बैन लगाने के आदेश जारी किए थे.
सोमवार, 27 मई को इंदौर के शहर क़ाज़ी मोहम्मद इशरत अली के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल कलेक्टर आशीष सिंह से मिला. इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई. बैठक के बाद मोहम्मद अली ने कहा,
मंदिर हो या मस्जिद, शहर के सभी धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटा दिए गए हैं. हमारी मांग है कि सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार तय शोर सीमा के अंदर लाउडस्पीकर की अनुमति दी जाए.
लोग शादियों में डीजे से शोर की शिकायत करते हैं. ऐसे में डीजे पर भी प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए. केवल धार्मिक स्थलों पर क्यों?
अभी प्रशासन और जनता के बीच यथास्थिति बनी हुई है.
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