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भूख से मरी बच्ची की मां के साथ सरकार से ज़्यादा गलत उसके गांववालों ने किया है

झारखंड के सिमडेगा में भात-भात करते मर गई थी बच्ची, अब मां को पीटा गया.

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कोयली देवी ने कहा था कि उसके गांववालों ने उसके साथ मारपीट की और उसे गांव से बाहर निकाल दिया.
झारखंड का सिमडेगा. कैसे भूल सकते हैं इस नाम को. जिसने भी पढ़ा होगा, पता होगा. कोयली देवी नाम की महिला ने कहा कि उसकी 11 साल की बच्ची संतोषी भात-भात कहते हुए मर गई. सरकारी अधिकारियों ने कहा कि बच्ची को मलेरिया था, इसलिए मर गई. वजह चाहे जो भी हो, हकीकत ये है कि बच्ची मर गई. भूख से मरी तो इल्जाम पीडीएस के अधिकारियों और डीएम पर है. अगर मलेरिया से मरी तो इल्जाम सीएमओ और स्वास्थ्य अधिकारियों पर है. आखिर जिम्मेदारी इन्हीं सरकारी अधिकारियों की ही तो है. मामला 28 सितंबर का है. इसकी जांच की जा रही है और जिम्मेदारी तय की जा रही है.
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कोयली देवी की बच्ची की मौत 28 सितंबर को हो गई थी.

इसी बीच एक और दिल दहलाने वाली खबर आई है, जिसके लिए जिम्मेदार इस बार सरकारी अधिकारी नहीं, गांव के लोग हैं. बताया जा रहा है कि जिस महिला की बच्ची की मौत हुई थी, गांववालों ने उसे मारपीट कर गांव से बाहर निकाल दिया है. गांववालों का कहना है कि महिला ने अपनी बच्ची की मौत के बाद मीडिया को बयान देकर गांव की बदनामी करवाई है, इसलिए उसे गांव में रहने का हक नहीं है.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 20 अक्टूबर की रात को सिमडेगा के करिमाती गांव में रहने वाली कोयली देवी के घर गांव की कुछ महिलाएं पहुंची. उन्होंने कोयली देवी के साथ मारपीट की और कहा कि उसने गांव का नाम बदनाम किया है. 21 अक्टूबर की सुबह किसी तरह से कोयली देवी अपने पास के गांव में सामाजिक कार्यकर्ता तारामणि साहू के घर पहुंची. तारामणि ने अखबार को बताया-
"कोयली को गांव से बाहर निकालने की कोशिश की गई और उसका सामान फेंक दिया गया. कोयली मेरे पास आई, जिसके बाद उसकी सुरक्षा के लिए एसडीएम को सूचना दी गई है."
वहीं सिमडेगा के डिप्टी एसपी एके सिंह ने अखबार को बताया-
"जलडेगा के थाना इंचार्ज और बीडीओ को करिमाती गांव भेजा गया है. कोयली देवी को तारामणि साहू के घर से वापस उनके गांव करिमाती लाया गया है."
पुलिस ने दावा किया है-
"घर में तोड़फोड़ के निशान नहीं मिले हैं. जांच में पता चला है कि गांव की कुछ महिलाओं से कोयली देवी की बहस हो गई थी. हालांकि कोयली देवी ने न तो इसकी कोई लिखित शिकायत की है और न ही किसी महिला की शिनाख्त की है. अगर ऐसा होता है, तो हम केस दर्ज कर कार्रवाई करेंगे."
पुलिस का दावा जो भी हो, लेकिन कोयली देवी के साथ गांववालों ने जो किया है, वो बेहद शर्मनाक है. एक मां की 11 साल की बच्ची की मौत हो जाती है, तो क्या उसके पास ये भी अधिकार नहीं है कि वो अपनी बेटी की मौत की वजह लोगों को बता सके. क्या वो महिला इस बात के लिए चुप हो जाए कि उसे अपनी बेटी की मौत की खबर देने भर से गांव की बदनामी हो जाएगी.
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इसी बच्ची की मौत हुई थी, जिसमें अलग-अलग दावे में कहा गया कि मौत की वजह भूख और मलेरिया है.
गांववालो, बदनामी इस बात से नहीं हो रही है कि सरकारी तंत्र में उलझकर एक बच्ची की मौत हो गई, बदनामी तो इस बात से हो रही है कि पूरा गांव मिलकर 11 साल की बच्ची को इतना भी खाना नहीं दिला सका कि उसकी सांसे चल सकें.
इसलिए नाम और बदनामी की बात छोड़कर उस महिला के दुख में शरीक होने की कोशिश करो, जिसने अपनी बच्ची को खो दिया है. इस बात की कोशिश करो कि भविष्य में गांव में इस तरह की कोई घटना न हो, जिससे गांव की बदनामी हो. अगर ऐसा नहीं कर सकते तो हर गांव में संतोषी जैसी लड़की मरती रहेगी और हर गांव के लोग बदनामी की बात कहकर कोयली देवी जैसी महिला के साथ मारपीट करते रहेंगे. उसे गांव से बाहर निकालते रहेंगे.
इस घटना के बाद 22 अक्टूबर को न्यूज़ एजेंसी एनआई ने ट्वीट कर बताया कि कोयली देवी की सुरक्षा में पुलिस को तैनात किया गया है. इससे पहले कोयली देवी ने कहा था-
"मुझे डर के साए में जीना पड़ रहा है. गांव के लोग मुझे गालियां दे रहे हैं और धमकी दे रहे हैं. मुझसे गांव छोड़कर जाने के लिए कहा जा रहा है."
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