इजरायल जिस प्रोजेक्ट के पूरा होने का बीते कई सालों से इंतजार कर रहा है, उसमें एक बार फिर रुकावट आ गई है. इस प्रोजेक्ट का ठेका एक विदेशी कंपनी को मिला था, लेकिन अब कंपनी ने इजरायल को झटका देते हुए काम करने से इनकार कर दिया है. ये प्रोजेक्ट पश्चिमी यरूशलम को पूर्वी यरूशलम से केबल कार के जरिए जोड़ने का है. दावा किया जाता है कि इसके पूरा होने से फिलिस्तीनी जमीन पर इजरायल का कब्जा और मजबूत होगा. विदेशी कंपनी के केबल कार प्रोजेक्ट से हाथ पीछे खींचने का कारण भारत से जुड़ा है.
फिलिस्तीन पर कब्जा मजबूत करने वाले इजरायली प्रोजेक्ट से इस कंपनी ने हाथ खींचा, वजह भारत!
इजरायल के प्रोजेक्ट से पीछे हटने वाली रोप्स (ROPES) पांचवीं विदेशी कंपनी है. इसका ताल्लुक इटली से है. इससे पहले फ्रांस की तीन और स्विट्जरलैंड की एक कंपनी, केबल कार प्रोजेक्ट पर काम करने से मना कर चुकी हैं.

फिलिस्तीन की जमीन पर इजरायल का गैर-कानूनी कब्जा 1967 में शुरू हुआ. इजरायल ने 1980 में पूरे यरूशलम अपने अंदर मिला लिया. इंटरनेशनल कानून के तहत, फिलिस्तीन के इलाकों पर इजरायल का कब्जा गैर-कानूनी है. भारत भी पूर्वी यरूशलम समेत फिलिस्तीनी इलाकों पर इजरायल के कब्जे को गैर-कानूनी मानता है.
इजरायल का केबल कार प्रोजेक्ट2019 में इजरायल सरकार ने 1.4 किलोमीटर लंबे केबल कार प्रोजेक्ट को मंजूरी दी. 2022 में हाई कोर्ट ने भी इसे सही ठहराया. ये प्रोजेक्ट पश्चिमी यरूशलम को 16,000 वर्ग मीटर के एक टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स से जोड़ेगा. इस कॉम्प्लेक्स को एलाद प्रमोट कर रहा है. एलाद एक इजरायली सेटलर ऑर्गनाइजेशन है, जो कब्जे वाले पूर्वी यरूशलम के फिलिस्तीनी इलाकों पर इजरायली कंट्रोल को मजबूत करना चाहता है.

इस साल सितंबर के आखिर में यरूशलम डेवलपमेंट अथॉरिटी (JDA) ने केबल कार इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी ROPES को बिना खुले टेंडर के कॉन्ट्रैक्ट देने का नोटिस जारी किया. ROPES एक इटैलियन कंपनी है, जो इटली के साउथ टायरॉल में बेस्ड है. JDA ने ROPES के साथ एग्रीमेंट का ऐलान कर दिया. लेकिन, इटैलियन कंपनी ने उसे जोर का झटका दिया.
इजरायल को झटका देने वाली 5वीं कंपनी20 अक्टूबर को ROPES ने एक इटैलियन मीडिया आउटलेट को बताया कि वो इजरायली केबल कार प्रोजेक्ट से हट गई है. इस प्रोजेक्ट से पीछे हटने वाले ये पांचवीं विदेशी कंपनी है. इससे पहले, फ्रांस की तीन और स्विट्जरलैंड की एक कंपनी केबल कार प्रोजेक्ट पर काम करने से मना कर चुकी हैं.
भारत से जुड़ा है कारणROPES के चीफ एग्जीक्यूटिव स्टीफन ओबेक्सर ने ब्रिटिश अखबार द गार्डियन को बताया कि उनकी कंपनी ने भारत में एक और कमिटमेंट की वजह से इजरायली प्रोजेक्ट पर काम करने से मना कर दिया है.
एक इजरायली नॉन- गवर्नमेंट ऑर्गनाइजेशन (NGO) एमेक शावेह के मुताबिक, यरूशलम के पूर्व मेयर नीर बरकत ने केबल कार प्रोजेक्ट को टूरिस्ट्स को ये समझाने का तरीका बताया था, 'असल में शहर का मालिक कौन है'.
एमेक शावेह ने हाल ही में एक बयान में कहा,
"ये प्रोजेक्ट फिलिस्तीनियों और यरूशलम के ऐतिहासिक केंद्र के हमेशा से दिखने वाले नजारों के लिए खतरा है. ये साफ है कि प्रोजेक्ट का मेन मकसद उन इलाकों में बसने वालों (गैर-कानूनी इजरायली बस्ती) की पकड़ को मजबूत करना है, ताकि फिलिस्तीनियों को ऐतिहासिक बेसिन से हटाया जा सके और यरूशलम के सांस्कृतिक नजारों को नया आकार दिया जा सके."
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वेस्ट बैंक जैसे बड़े फिलिस्तीनी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में इजरायली गैर-कानूनी तरीके से बस रहे हैं. भारत समेत दुनिया भर के देश इन अवैध इजरायली बस्तियों पर चिंता जता चुके हैं. इजरायल का केबल कार प्रोजेक्ट भी फिलिस्तीनी जमीन पर कब्जा करने की कोशिशों के बीच आया.
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