चुुनाव आयोग के दिन ठीक नहीं चल रहे. SIR में गड़बड़ियों को लेकर तो कोहराम मचा ही है. अब उत्तर प्रदेश में उसके सॉफ्टवेयर ने ‘कमाल’ कर दिखाया है. आयोग ने पहली बार वोटरों का रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन करते हुए एक सॉफ्टवेयर को काम पर लगाया था. इसकी जिम्मेदारी थी कि अंग्रेजी में लिखे नामों को हिंदी में करे. लेकिन सॉफ्टवेयर उनके मतलब निकालने लगा. फिर जो सीन बना, उस पर आयोग को सफाई देते नहीं बन रहा. अब किसी ‘राम हित यादव’ का नाम सॉफ्टवेयर ‘राम ने यादव को मारा’ कर दे तो आयोग भी क्या ही जवाब दे पाएगा?
‘मूर्ख काली देवी’, 'राम ने यादव को मारा'..., चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर ने तो 'कहर' ढाह दिया
उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों की वोटर लिस्ट में सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी से 158 नामों में गलतियां सामने आईं. अंग्रेजी नामों को हिंदी में लिखने के बजाय सॉफ्टवेयर उनके मतलब निकालने लगा.

ऐसे ही एक वोटर का नाम था राम. यानी अंग्रेजी में ‘RAM’. सॉफ्टवेयर ने इसका ‘हिंदीकरण’ किया तो पर्ची में नाम लिखकर आया- ‘टक्कर मारना’. अब किसी का नाम ‘टक्कर मारना’ कैसे हो सकता है? बताते हैं कैसे हो सकता है. अगर सॉफ्टवेयर का ‘दिमाग खराब’ हो जाए तो हो सकता है. अंग्रेजी में एक शब्द है, Ram. हिंदी में इसका उच्चारण बताएं तो वो है ‘रैम’. इसका मतलब ‘किसी चीज को टक्कर मारना’ होता है. सॉफ्टवेयर को नाम का ‘ट्रांसलिटरेशन’ करना था. लेकिन उसने शब्द का मतलब निकालकर ‘टक्कर मारना’ लिख दिया.
ऐसे ही एक वोटर हैं रवि शर्मा. उनके पिता का नाम है राम हित शर्मा. अंग्रेजी में Ram Hit Sharma को सॉफ्टवेयर ने ‘राम ने शर्मा को मारा’ बना दिया और वोटर लिस्ट में रवि शर्मा के पिता का नाम ‘राम ने शर्मा को मारा’ हो गया.
खालिद अली सईद अंग्रेजी में अपना नाम Khalid Ali Said लिखते हैं. चुनाव आयोग की पर्ची में यह नाम जब हिंदी में लिखा आया तो खालिद अली कुछ नहीं कह पाए. भले उनका नाम ‘खालिद अली ने कहा’ लिखा आया था. ऐसा ही फैज अब्बास सईद के साथ भी हुआ. उनका नाम भी ‘फैज अब्बास ने कहा’ लिखा गया था. सुवैव खां Suvaiv khan का नाम लिखा था ‘सुवैव कहां’. किसी महिला का नाम ‘फूलकाली देवी’ रहा होगा. अंग्रेजी में Fool kali Devi का सॉफ्टवेयर ने हिंदी किया तो उन्हें ‘मूर्ख काली देवी’ बना दिया.
इतना ही नहीं. नरेंद्र यादव नाम के शख्स की डिग्री को ही उनका पिता बना दिया. उनकी पर्ची में पिता के नाम की जगह B.Com लिखा था.
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अब बताते हैं ये मामला कहां का है?
उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 5 स्नातक और 6 शिक्षक निर्वाचन सीटों पर चुनाव हो रहे हैं. ये पूरा केस इसी चुनाव की वोटर लिस्ट का है. चुनाव में दर्ज कुल 14.81 लाख मतदाताओं की सूची में ऐसी 158 गड़बड़ियां सामने आईं. कहीं वोटर का नाम अजीब हो गया. कहीं उनके रिश्तेदारों के नाम के साथ ऐसा प्रयोग हुआ कि पढ़ने वाला भी वोटर होने से मुकर जाए.
ये सब हुआ कैसे?विधान परिषद के चुनावों के लिए वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कराने के लिए पहली बार ऑनलाइन सुविधा दी गई थी. एक सॉफ्टवेयर बनाया गया, जिसका काम अंग्रेजी के रोमन लिपि में लिखे नामों को हिंदी की देवनागरी लिपि में लिखना था. तकनीकी भाषा में इसे ‘ट्रांसलिटरेशन’ कहते हैं. लेकिन सॉफ्टवेयर तो ‘अंग्रेजी का मास्टर’ निकल गया. उसने नामों का उच्चारण लिखने के बजाय उनका अर्थ लगाना शुरू कर दिया. इस घटना ने आयोग की काफी फजीहत कराई.
क्या कहा आयोग ने?गड़बड़ियों का ये जखीरा सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा तो उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा सफाई देने सामने आए. उन्होंने इस ‘ब्लंडर’ के लिए सॉफ्टवेयर की खामी को जिम्मेदार तो ठहराया. साथ ही आयोग के कर्मचारियों की लापरवाही की बात भी मानी.
यूपी चुनाव आयोग की ओर से एक्स पर पोस्ट किया गया कि कोई भी काम पहली बार करने में गलती की आशंका रहती है. विधान परिषद के चुनाव में पहली बार ऐसा हुआ था कि वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की सुविधा दी गई थी. आयोग ने गड़बड़ियों की वजह बताई कि सॉफ्टवेयर को अंग्रेजी में टाइप किए गए नामों को ट्रांसलिटरेट करना था. लेकिन उसने किसकी तकनीकी गड़बड़ी की वजह से नामों को ट्रांसलेट करना शुरू कर दिया.
आयोग ने कहा कि ऐसी गलतियों को ठीक करने के लिए लोग लगाए गए थे. लेकिन जहां भी इसे देखने में सावधानी नहीं रही, वहां गलतियां बनी रहीं. आयोग ने इसे लापरवाही बताते हुए कहा कि कमिश्नर इस वोटर लिस्ट के निर्वाचन रजिस्ट्रेशन अधिकारी (ERO) होते हैं और जिले के डीएम AERO. ऐसे में वोटर लिस्ट की सभी गलतियां ठीक करना इनकी ही जिम्मेदारी होती है. ऐसे अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है.
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