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मक्का डिफेन्स पैक्ट में ईरान भी होगा शामिल? ट्रंप के मित्र देशों ने बड़ा प्लान बनाया

Iran Mecca Pact invite: मक्का डिफेन्स पैक्ट में तुर्किये, पाकिस्तान और सऊदी अरब शामिल हैं. अब एक रिपोर्ट में बताया गया कि ईरान को मक्का पैक्ट में शामिल होने का इनविटेशन आया है. अगर ऐसा हुआ तो मिडिल ईस्ट का पूरा समीकरण बदल जाएगा.

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ईरान को मक्का डिफेन्स पैक्ट में शामिल होने का न्योता मिला है. (फाइल फोटो-रॉयटर्स)

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  • 7 अगस्त को मक्का में सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान के बीच एक "जॉइंट डिफेन्स पैक्ट" पर हस्ताक्षर हुए, जिसमें अब एक चौथा देश ईरान के शामिल होने की संभावना पर विचार चल रहा है।
  • मिडिल ईस्ट में अमेरिकी-ईरान लड़ाई और क्षेत्रीय तनाव के कारण इन तीन देशों ने सुरक्षा मजबूत करने के उद्देश्य से यह म्यूचुअल डिफेन्स पैक्ट बनाया, जिसमें सदस्य देशों पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा।
  • अगर ईरान इस समझौते में शामिल हो जाता है, तो यह मिडिल ईस्ट की राजनीतिक और सुरक्षा स्थिति को प्रभावित कर सकता है, जिससे क्षेत्र में नए समन्वय और रणनीतियां बन सकती हैं।

सऊदी अरब के मक्का शहर में 7 अगस्त को सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान के बीच ‘जॉइंट डिफेन्स पैक्ट’ साइन हुआ था. अब खबर आई है कि इस पैक्ट में चौथे देश का नाम भी जुड़ सकता है. बताया गया कि उस देश को पैक्ट में शामिल होने का न्योता भेजा गया है. लेकिन अभी फैसला नहीं लिया गया है. और सबसे ज़रूरी बात ये है कि वो देश पहले से ही जंग लड़ रहा है. बात हो रही है ईरान की. वेस्ट एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच जंग अभी ख़त्म नहीं हुई है. ऐसे में क्या ये डिफेन्स पैक्ट पूरे डायनामिक्स को ही बदल देगा?

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लेबनान बेस्ड न्यूज़ एजेंसी अल-मायादीन ने इसे रिपोर्ट किया है. एजेंसी ने ईरानी संसद की आधिकारिक न्यूज़ एजेंसी खानेह मिल्लत के मुखिया मेहदी रहीमी के हवाले से ये दावा किया है. मेहदी रहीमी ने अल मायादीन को बताया कि ‘ईरान को मक्का पैक्ट में शामिल होने का इनविटेशन आया है और अभी प्रोसेस अंडर रिव्यू चल रहा है.’ 

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उनका कहना है कि मिडिल ईस्ट में देशों की सुरक्षा के लिए ये प्रस्ताव रखा गया है. लेकिन ये सभी जानकारी आधिकारिक नहीं है. न ईरान की तरफ से और न ही पैक्ट के तीनों सदस्यों की ओर से. 

क्या है मक्का डिफेन्स पैक्ट?

‘मक्का डिफेन्स पैक्ट’ एक म्यूचुअल डिफेन्स पैक्ट है. जहां पैक्ट के सदस्यों में से अगर किसी एक भी देश पर हमला होता है तो उसे सभी देशों पर हमला माना जाएगा. यानी अगर कोई देश पाकिस्तान पर हमला करता है तो उसे तुर्किये और सऊदी अरब पर भी हमला माना जाएगा. तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने इसकी तुलना NATO के आर्टिकल 5 से की है. लेकिन ये भी कहा कि इसका मकसद किसी एक देश को निशाना बनाना नहीं है. 

तुर्किये और पाकिस्तान ने कहा कि इस पैक्ट में और भी देशों को शामिल किया जा सकता है. इसमें सबसे अव्वल मिस्र यानी Egypt का नाम लिया गया था. बांग्लादेश ने भी इसमें शामिल होने की दिलचस्पी दिखाई थी. पैक्ट को लेकर ईरान ने विरोध नहीं किया बल्कि ये कहा कि इसमें चिंता की कोई बात नहीं है. अपनी सुरक्षा का इंतज़ाम खुद करना पड़ेगा.      

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ईरान का शामिल होना अहम क्यों?

तेहरान और रियाद के बीच शिया-सुन्नी का विवाद चलता आया है. और दूसरी तरफ यमन में भी ईरान और सऊदी अरब एक दूसरे के आमने-सामने हैं. हाल ही में ईरान के सहयोगी गुट हूतियों ने सऊदी अरब पर हमला किया था. अमेरिका-ईरान की जंग में ईरान ने कई दफा सऊदी अरब में अमेरिकी बेस पर बम भी बरसाए हैं. 

रिपोर्ट के मुताबिक, मेहदी रहीमी ने इस पैक्ट को ‘सिक्योरिटी अम्ब्रेला’ बताया है. एक्सपर्ट मोहसिन रज़ा खान बताते हैं कि पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब अमेरिका के मित्र देश हैं. इन्हें विश्वास नहीं है कि अमेरिका उनकी मदद करेगा, इसलिए ये पैक्ट बनाया है. ये अलायन्स खास तौर पर इजरायल के खिलाफ है. अगर इस पैक्ट में ईरान शामिल हो जाता है तो मिडिल ईस्ट की तस्वीर बदल सकती है. 

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