पाकिस्तान की जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को इस्लामाबाद के एक अस्पताल में शिफ्ट किया गया है. उनकी पार्टी ‘पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ’ (PTI) ने बताया कि यह कदम सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उठाया गया. कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि इमरान खान को बेहतर इलाज मुहैया कराया जाए.
इमरान खान को जेल से अस्पताल में शिफ्ट किया गया, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की एक नहीं सुनी
Pakistan के पूर्व प्रधानमंत्री Imran Khan को जेल से Islamabad के शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल में शिफ्ट किया गया है. उनकी पार्टी PTI के मुताबिक, यह कदम सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उठाया गया. क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं.

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 21 अगस्त को इमरान खान (73) को अदियाला जेल से शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल ले जाया गया. PTI ने पत्रकारों को भेजे एक मैसेज में यह जानकारी दी. इस कदम से उनकी पार्टी और पाकिस्तान की ताकतवर मिलिट्री के बीच तनाव कम होने की उम्मीद है.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उठाया कदम
सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त को अधिकारियों को आदेश दिया था कि वे इमरान खान को 48 घंटे के भीतर शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल में शिफ्ट करें. कोर्ट ने उनके स्वास्थ्य की निगरानी करने के लिए मेडिकल बोर्ड बनाने का भी आदेश दिया था. आदेश के मुताबिक, इमरान की निजी डॉक्टर और उनकी बहन डॉ. उजमा खान भी बोर्ड की सदस्य होंगी. कोर्ट ने आदेश दिया कि इमरान खान 16 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई तक अस्पताल में ही रहें.
सरकार ने जताया था विरोधसरकार शुरू में इस आदेश को लागू करने के लिए सहमत हो गई थी. लेकिन बाद में उसने सुप्रीम कोर्ट से इस निर्देश की समीक्षा करने और इसे वापस लेने की मांग की. इमरान खान के वकीलों का आरोप है कि जेल में रहने के दौरान उनकी सेहत बिगड़ी है और उनकी दाहिनी आंख की रोशनी काफी कम हो गई है. हालांकि, सरकार का कहना है कि मेडिकल रिपोर्ट में ऐसी कोई स्थिति नहीं दिखी जिसके लिए उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत हो.
2023 से जेल में बंद हैं इमरान
क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं. उन्हें सबसे पहले 9 मई 2023 को गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद पूरे पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन और हिंसा हुई. उन्हें उसी साल 5 अगस्त को भ्रष्टाचार के मामलों में फिर से गिरफ्तार किया गया. इनमें तोशाखाना मामला भी शामिल है. इस मामले में सरकारी तोहफों को कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीके से बेचने का आरोप है.
तब से वे जेल में हैं और अपने खिलाफ कई मामलों में मिली सजा और मुकदमों को चुनौती दे रहे हैं. उनका कहना है कि उन पर चल रहे मामले राजनीतिक कारणों से दर्ज किए गए हैं. पाकिस्तान सरकार ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है.
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इमरान 2018 में प्रधानमंत्री बने, लेकिन चार साल बाद संसद में अविश्वास प्रस्ताव हारने के बाद उन्हें पद से हटा दिया गया. इसके बाद उनकी पार्टी और देश की सेना के बीच लंबे समय तक टकराव चला. 2024 के आम चुनाव से पहले पार्टी पर कई तरह की पाबंदियां लगाई गईं. साथ ही उन्हें अपने पारंपरिक चुनाव चिह्न के साथ चुनाव लड़ने से रोक दिया गया.
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