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कठुआ: पिता की अर्जी से फंस गया खुद को नाबालिग बताने वाला आरोपी

अर्जी में वो नाबालिग ही है, लेकिन उसके पिता ने एक बड़ी गलती कर दी.

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फोटो - thelallantop
कठुआ गैंगरेप. आठ साल की बच्ची के साथ सामूहिक बलात्कार करने के बाद उसकी हत्या. इस केस का एक आरोपी खुद को नाबालिग मनवाने का जतन कर रहा है. ताकि सजा से बच सके. या फिर सजा हो, तो कम से कम हो. उसके इस जतन पर उसके ही पिता ने अस्सी घइला पानी उड़ेल दिया है. उसके पापा ने करीब 14 साल पहले एक आवेदन दिया था. स्थानीय तहसीलदार के नाम. अपने तीनों बच्चों के जन्म का रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए. इस ऐप्लिकेशन में बहुत झोल है. इतना झोल कि अपने बच्चों के पैदा होने की जो तारीखें उन्होंने बताई हैं, वो फर्जी मालूम पड़ती हैं. क्राइम ब्रांच के हाथ ये ऐप्लिकेशन लग गई है. इसे लेकर वो जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट पहुंच गई है. इस अपील के साथ कि नाबालिग को नाबालिग मानकर मुकदमा न चलाया जाए. उसे बालिग माना जाए. मेडिकल की रिपोर्ट भी नाबालिग आरोपी के खिलाफ है. डॉक्टरों के मुताबिक, उसकी उम्र 19 से कम नहीं है. और 23 से ज्यादा नहीं है. दोनों ही सूरतों में नाबालिग को माइनर वाली सहूलियत नहीं मिल सकेगी.
पुजारी सांजी राम का बेटा और भतीजा, दोनों इस केस के मुख्य आरोपी हैं. उनके अलावा इस केस में छह और आरोपी हैं.
पुजारी सांजी राम का बेटा और भतीजा, दोनों इस केस के मुख्य आरोपी हैं. उनके अलावा इस केस में छह और आरोपी हैं.

पहले और दूसरे बच्चे के जन्म में सिर्फ तीन महीने का फर्क! ये खबर इंडियन एक्सप्रेस ने की है. खबर के मुताबिक, 15 अप्रैल, 2004. इस तारीख को आरोपी के पिता ने ये आवेदन लिखा था. जमा किया हीरानगर तहसीलदार के पास. इसमें उन्होंने अपने बड़े बच्चे के जन्म की तारीख बताई है 23 नवंबर, 1997. मंझले बच्चे की पैदाइश 21 फरवरी, 1998. और सबसे छोटे बेटे, जो कि कठुआ केस का नाबालिग आरोपी है, उसके पैदा होने की तारीख बताई है 23 अक्टूबर 2002. ध्यान दीजिए तारीखों पर. पहले और दूसरे बच्चे के पैदा होने में बस दो महीने, 28 दिन का फर्क है. एक ही मां-बाप के औलाद हैं दोनों. तो फिर दोनों के पैदा होने में बस इतने का फर्क कैसे? क्राइम ब्रांच ने इसी झोल पर उंगली उठाई है. कहा है कि अगर पहले और दूसरे बच्चे के जन्म की तारीखों में इतनी गड़बड़ी है, तो फिर बहुत मुमकिन है कि तीसरे बच्चे के जन्म की तारीख भी फर्जी हो.
ये केस न केवल अपनी दरिंदगी की वजह से, बल्कि और भी वजहों से एक केसस्टडी है. एक आठ साल की बच्ची के साथ हुई दरिंदगी पर हर किसी को बिफर पड़ना चाहिए था. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. आरोपियों का धर्म देखकर उन्हें पुचकारने और बचाने वाले भी खूब सारे मिले.
ये केस न केवल अपनी दरिंदगी की वजह से, बल्कि और भी वजहों से एक केसस्टडी है. एक आठ साल की बच्ची के साथ हुई दरिंदगी पर हर किसी को बिफर पड़ना चाहिए था. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. आरोपियों का धर्म देखकर उन्हें पुचकारने और बचाने वाले भी खूब सारे मिले. उनके समर्थन में तिरंगा यात्रा तक निकाली गई.

कोई सर्टिफिकेट नहीं, बस रेंडम तारीख बता दी है इतना ही नहीं, बल्कि आवेदन बहुत रेंडम भी है. इसके साथ न तो नगरपालिका कमिटी और न ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का सर्टिफिकेट दिया गया है. जबकि नाबालिग यहीं पैदा हुआ था. ये बात खुद आरोपी के पिता ने आवेदन में लिखी है. पहले दोनों बच्चों के जन्म की जगह का जिक्र नहीं किया है. लेकिन छोटे बेटे (जो कि आरोपी है) के बारे में लिखा है कि वो हीरानगर के सरकारी अस्पताल में पैदा हुआ था. क्राइम ब्रांच ने इस अस्पताल के रेकॉर्ड्स दिखवाए. 23 अक्टूबर, 2002 के दिन इस अस्पताल में आरोपी के मां के नाम की कोई एंट्री नहीं है. माने आरोपी के जन्म की ये तारीख फर्जी है.
कठुआ कांड के बाद देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन हुए.
कठुआ कांड के बाद देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन हुए. बस यही राहत की बात थी. कि आरोपियों का बचाव करने वालों की थू-थू करने वालों में  हर धर्म, हर जाति, हर समुदाय के लोग शामिल थे.

मुख्य आरोपी ये नाबालिग ही है क्राइम ब्रांच के ताजा सबूतों पर ट्रायल कोर्ट विचार करेगा. मगर फिलहाल तो वो नाबालिग की ही तरह ट्रीट किया जा रहा है. उसके खिलाफ जुवेनाइल कोर्ट में सुनवाई चल रही है. बाकी के सातों आरोपियों के खिलाफ पठानकोट में केस चल रहा है. ये नाबालिग इस केस का मुख्य आरोपी है. क्राइम ब्रांच का कहना है कि बच्ची के अपहरण से लेकर उसके गैंगरेप और फिर उसके मर्डर में भी इसने सबसे बढ़-चढ़कर काम किया. क्राइम ब्रांच ने कोर्ट से अपील की है कि न्याय के नाम पर इस आरोपी को बालिगों की तरह ट्रीट किया जाए.


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