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मंदिर में बच्ची से गैंगरेप की पूरी कहानी, जहां पुलिसवाले ने कत्ल से पहले कहा - रुको मैं भी रेप कर लूं

जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में एक तहसील है हीरानगर. इस तहसील में एक गांव है जिसका नाम है रसाना. गांव जंगल से घिरा हुआ है. 17 जनवरी को इस गांव के जंगल में 8 साल की एक लड़की की लाश मिली थी. लड़की बकरवाल समुदाय से ताल्लुक रखने वाली थी, जो पिछले एक हफ्ते से लापता थी. 10 जनवरी को दोपहर करीब 12.30 बजे वह घर से घोड़ों को चराने के लिए निकली थी और उसके बाद वो घर वापस नहीं लौट पाई. जब घरवालों ने हीरानगर पुलिस से लड़की के गायब होने की शिकायत दर्ज करवाई तो पुलिस ने लड़की को खोजने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई और आखिरकार एक हफ्ते के बाद 17 जनवरी को जंगल में उसकी लाश मिली. लाश मिलने के बाद बॉडी का पोस्टमॉर्टम हुआ. इस रिपोर्ट में पता चला कि लड़की के साथ कई बार कई दिनों तक गैंगरेप हुआ है. उसे भूखा रखा गया है, नशे की गोलियां दी गई हैं. उसके दुपट्टे से उसका गला घोंटा गया है और फिर सिर पर पत्थर मारकर उसकी हत्या की गई है. मेडिकल में ये भी साफ हुआ कि जिस दिन लड़की को जंगल में फेंका गया था, उससे 72 घंटे पहले ही उसकी हत्या कर दी गई थी.

गैंगरेप और हत्या के विरोध में पूरे कठुआ में विरोध प्रदर्शन हो रहे थे.

इसके बाद पूरे जम्मू-कश्मीर में हंगामा हो गया. लोग हजारों की संख्या में सड़क पर निकलकर विरोध प्रदर्शन करने लगे. विधानसभा में विपक्षी पार्टियों ने सरकार को कटघरे में खड़ा करना शुरू कर दिया. इसके बाद 20 जनवरी को सरकार की ओर से एसएचओ को सस्पेंड कर दिया गया और मामले की मैजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दे दिए गए. फिर भी हंगामा नहीं थमा. इसके बाद जम्मू-कश्मीर की मुफ्ती सरकार ने 23 मार्च को पूरे मामले को क्राइम ब्रांच को सौंप दिया. क्राइम ब्रांच की ओर से एसआईटी का गठन किया गया और मामले की जांच शुरू हो गई.

सबसे पहले गिरफ्तार हुआ जांच अधिकारी

जांच के दौरान क्राइम ब्रांच ने इस पूरे मामले के जांच अधिकारी रहे सब इन्स्पेक्टर आनंद दत्ता को गिरफ्तार कर लिया. जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि इस गैंगरेप में जम्मू-कश्मीर का एक स्पेशल पुलिस ऑफिसर दीपक खजुरिया भी शामिल है. इसके बाद 10 फरवरी को क्राइम ब्रांच ने दीपक खजुरिया को भी गिरफ्तार कर लिया. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती गई, आरोपियों की संख्या भी बढ़ती रही. इस मामले में पुलिस ने कुल सात लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें से एक नाबालिग है. वहीं इस पूरी वारदात के मुख्य आरोपी ने खुद ही सरेंडर कर दिया. गिरफ्तार होने वालों में शामिल हैं स्पेशल पुलिस आफिसर (एसपीओ) दीपक खजूरिया, पुलिस ऑफिसर सुरेंद्र कुमार, रसाना गांव का परवेश कुमार, असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर आनंद दत्ता, हेड कांस्टेबल तिलक राज, पूर्व राजस्व अधिकारी का बेटा विशाल और उसका चचेरा भाई, जो नाबालिग है. इस मामले में पूर्व राजस्व अधिकारी सांजी राम का नाम मुख्य आरोपी के तौर पर सामने आया, जिसके बाद उसके खिलाफ गैर जमानती वॉरंट जारी कर दिया गया. जब पुलिस ने उसके बेटे विशाल को गिरफ्तार कर लिया तो सांजी राम ने भी सरेंडर कर दिया.

प्रदर्शन इतने उग्र हुए कि मामले को क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया. इसका बीजेपी ने विरोध किया और पुलिस को चेतावनी भी दी.
प्रदर्शन इतने उग्र हुए कि मामले को क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया. इसका बीजेपी ने विरोध किया और पुलिस को चेतावनी भी दी.

क्राइम ब्रांच की ओर से की जा रही ये जांच 9 अप्रैल को पूरी हो गई, जिसके बाद क्राइम ब्रांच ने 9 अप्रैल को ही इस मामले की 15 पन्ने की चार्जशीट दाखिल कर दी. इस चार्जशीट के मुताबिक गैंगरेप और हत्या का मास्टरमाइंड रिटायर्ड राजस्व अफसर सांजी राम है. उसने अपने बेटे विशाल और नाबालिग भतीजे के साथ ये पूरी वारदात की. वहीं स्पेशल पुलिस ऑफिसर दीपक खजूरिया, सुरिंदर कुमार, परवेश कुमार, सहायक पुलिस इंस्पेक्टर और हेड कांस्टेबल तिलक राज ने पूरे वारदात में भूमिका निभाई, सुबूत नष्ट करने की कोशिश की. वहीं स्पेशल पुलिस अधिकारी दीपक खजूरिया पर लड़की से रेप का भी आरोप चार्जशीट में लगाया गया है. चार्जशीट के मुताबिक-

बच्ची के पिता ने 12 जनवरी को हीरानगर थाने में शिकायत दर्ज करवाई. उन्होंने कहा कि उनकी आठ साल की बेटी 10 जनवरी को करीब 12.30 बजे घोड़ों के बच्चों को चराने के लिए नजदीक के जंगल गई थी. दोपहर दो बजे तक उसे जानवरों के साथ देखा गया. शाम के चार बजे घोड़े तो वापस आ गए, लेकिन वो वापस नहीं लौटी. जब पिता ने शिकायत की तो पुलिस ने केस नंबर 10/2018 के तहत आईपीसी की धारा 363 के तहत केस दर्ज कर लिया.

पूरे राज्य में बेटी बचाओ के पोस्टर लेकर महिलाएं विरोध प्रदर्शन में उतर आई थीं.

बकरवाल समुदाय को गांव से भगाना चाहते थे आरोपी

ये बच्ची बकरवाल समुदाय से ताल्लुक रखती थी, जो घुमंतू समुदाय है. ये एक मुस्लिम समुदाय है, जो कठुआ में अल्पसंख्यक है. इनका कठुआ में रहने वाले हिंदू परिवारों से अवैध स्लॉटर हाउस चलाने और फसलों को बर्बाद करने को लेकर लंबे समय से विवाद रहा है. हिंदू परिवारों की ओर से कई बार इनके खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज करवाई जा चुकी है, लेकिन पुलिस कोई सख्त ऐक्शन कभी नहीं ले सकी. इन दो समुदायों के बीच लंबे समय से चल रही अदावत का खामियाजा उस आठ साल की बच्ची को भुगतना पड़ा. चार्जशीट के मुताबिक कुछ हिंदू लोगों ने बकरवाल समुदाय को सबक सिखाने की ठानी और इसके लिए उस आठ साल की बच्ची को निशाना बनाया गया. सबक सिखाने की पूरी कवायद का मास्टरमाइंड रिटायर्ड राजस्व अधिकारी सांजी राम था. उसने लड़की को कई बार जंगल में आते-जाते देखा था. उसने लड़की के अपहरण, रेप और हत्या की योजना बनाई, ताकि इस घटना के बाद बकरवाल समुदाय दहशत में आ जाए और वो कठुआ छोड़कर कहीं और चला जाए. इसके पीछे सांजी राम की पुरानी रंजिश भी थी. सांजी राम के नाबालिग भतीजे की बकरवाल समुदाय के लोगों ने कुछ दिन पहले पिटाई भी कर दी थी. सांजी और उनका भतीजा इसका बदला भी लेना चाहता था. इसी वजह से वो इस वारदात में शामिल हो गया. पूछताछ में उसने बताया था कि वो शराब, सिगरेट और गुटखे जैसी चीजें खाता था. इसके अलावा लड़कियों से छेड़खानी के आरोप में उसे मॉडर्न पब्लिक स्कूल हीरानगर से निकाल दिया गया था. इसके बाद उसे अपने चाचा सांजी राम के घर भेज दिया गया. जंगलों में सात-आठ बार उसकी मुलाकात उस लड़की से हुई थी. हर बार वो लड़की अपने घोड़ों की तलाश में मिली थी.

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मेरठ से बुलाकर करवाया था रेप, मारने से पहले पुलिसवाले ने भी रेप किया

इसके लिए सांजी राम ने अपने नाबालिग भतीजे से बात की और प्लान बनाया. इसके अलावा सांजी राम ने एक स्पेशल पुलिस ऑफिसर दीपक खजूरिया को भी अपनी प्लानिंग के बारे में बताया. 10 जनवरी की शाम को दीपक खजूरिया अपने दोस्त और स्पेशल पुलिस ऑफिसर विक्रम के साथ मिलकर बिटू मेडिकल स्टोर गया. वहां से उसने बेहोश करने वाली दवा इपिट्रिल की 10 गोलियां खरीदीं. इसी दौरान सांजी राम के भतीजे को वो लड़की जंगलों में बाहरी बालिश पेड़ के पास दिख गई. उसने अपने चाचा सांजी राम को लड़की के जंगल में होने की बात कही. लड़की जब जंगल में अपने जानवरों को खोज रही थी, तो उस नाबालिग ने लड़की से कहा कि उसके जानवर जंगल में अंदर हैं. लड़के की बातें सुनकर लड़की उसके साथ जंगल में चली गई. लड़का उसे अपने पिता के जानवर बांधने वाले शेड में ले गया. वहां उसके हाथ रुमाल से बांध दिए. इसके अलावा रस्सी से भी उसने उसके हाथ बांध दिए. इसके बाद उसने लड़की के सलवार का नाड़ा खोल दिया और उससे उसके पैर बांध दिए. उसने गर्दन पकड़कर उसे जमीन पर गिरा दिया. फिर उसकी इतनी पिटाई की कि लड़की बेहोश हो गई. इस दौरान उसका दोस्त मन्नू भी उसके साथ था. लड़की जब बेहोश हो गई, तो दोनों ने उसके साथ रेप किया. वहां रेप करने के बाद दोनों लड़की को उठाकर एक मंदिर में ले आए और वहां के देवस्थान में उसे बंद कर दिया. अगले दिन यानी 11 जनवरी को नाबालिग आरोपी ने मेरठ में अपने चचेरे भाई विशाल को फोन किया. विशाल आकांक्षा कॉलेज मीरापुर में बीएससी का छात्र था. जब विशाल को फोन पर कहा गया कि उसे एक लड़की मिली है और अगर उसे हवस बुझानी है तो वो भी आ जाए. विशाल मान गया.

गैंगरेप और हत्या के विरोध में पूरा कठुआ सड़क पर आ गया था.

12 जनवरी को विशाल रसना पहुंच गया. इसके बाद मन्नू, विशाल, उसका नाबालिग चचेरा भाई और दीपक खजूरिया 12 जनवरी की सुबह फिर से मंदिर पहुंचे. वहां लड़की को नशे की तीन गोलियां दी गईं, जिसके बाद लड़की बेहोश हो गई. बेहोशी के बाद एक बार फिर से उस नाबालिग, मन्नू और विशाल ने उसके साथ गैंगरेप किया. ये सिलसिला 15 जनवरी तक चलता रहा. 15 जनवरी को सांजी राम भी मंदिर पहुंचा. उसने कहा कि अब बच्ची की हत्या कर उसे ठिकाने लगाना होगा. ये कहकर सांजी राम पीछे के रास्ते से निकल गया. वहीं दीपक खजूरिया वहां मौजूद था. उसने कहा कि थोड़ा रुक जाओ, मुझे भी रेप करना है. इसके बाद दीपक खजूरिया ने भी उस नाबालिग से रेप किया. इसके बाद मारने से पहले और भी आरोपियों ने नाबालिग के साथ गैंगरेप किया.

मंदिर में गैंगरेप के बाद गला घोंटा फिर पत्थर मारकर हत्या कर दी

गैंगरेप के बाद सभी ने मिलकर बच्ची का गला घोंट दिया और फिर सर पर पत्थर मारकर उसे मार दिया. इसके बाद उसे 15 जनवरी को शव निकालकर जंगल में फेंक दिया गया. जब बच्ची का शव बरामद हो गया, तो पूरे राज्य में हंगामा हो गया. जगह-जगह पर सैकड़ों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. बवाल इतना बढ़ गया कि पुलिस भी दबाव में आ गई. इसे देखते हुए पुलिस की ओर से बकरवाल समुदाय से कहा गया कि सांजी राम के भतीजे को गिरफ्तार कर लिया गया है. लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं था. सांजी राम की ओर से हेड कॉन्सटेबल तिलक राज को डेढ़ लाख रुपये दिए गए, जो घूस की पहली किश्त थी. इसके बाद तिलक राज सांजी राम के घर पहुंचा, जहां उसे डेढ़ लाख रुपये और दिए गए. ये पैसे सब-इन्स्पेक्टर आनंद दत्ता को देने के लिए थे. इसके बाद भी दबाव बढ़ता जा रहा था. इसे देखते हुए तिलक राज फिर सांजी राम के घर पहुंचा और उसने कहा कि मामला बिगड़ गया है, इसलिए किसी एक आरोपी को तो पुलिस को सौंप दिया जाए. लेकिन सांजी राम नहीं माना. उसने फिर आनंद दत्ता के लिए पैसे भिजवाए और तिलक राज तो पहले ही खुशी से पैसे ले चुका था.

महबूबा मुफ्ती ने तुरंत ही मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी थी.

पुलिस ने लिए थे पैसे, क्राइम ब्रांच ने की गिरफ्तारी

जब तक केस में स्थानीय पुलिस की भूमिका थी, सांजी राम पैसे देकर आरोपियों को बचाता रहा. लेकिन 22 जनवरी को केस क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया और मामला पुलिस से आगे निकल गया. इसके बाद 23 जनवरी के आदेश से क्राइम ब्रांच के एएसपी नवीद पीरजादा के नेतृत्व में इस मामले की जांच शुरू कर दी गई. और जब चार्जशीट दाखिल की गई तो पता चला कि इस आठ साल की बच्ची से कितनी हैवानियत की गई है. आठ लोगों ने एक खास समुदाय को गांव से बाहर निकालने के लिए इस आठ साल की मासूम बच्ची को निशाना बनाया, उसके साथ बर्बरता की सारी हदें पार कर दीं गईं और फिर सारे सबूत मिटाने के लिए पुलिस को पैसे दिए गए और पुलिस ने भी राजी-खुशी ये पैसे ले लिए.

आरोपियों की गिरफ्तारी के विरोध में बीजेपी के दो मंत्रियों ने तिरंगा यात्रा निकाली थी और गिरफ्तारी का विरोध किया था.

बीजेपी के मंत्रियों ने दी थी पुलिस को चेतावनी, मुफ्ती की सख्ती पर हुई 8 गिरफ्तारियां

लेकिन बात यहीं खत्म नहीं होती है. हैवानियत की एक कहानी और भी है, जो इस हैवानियत को अंजाम देने वालों को बचाने के कवायद की कहानी है. इसमें राजनीतिक लोग भी हैं और कानून के जानकार भी. जब पहली बार इस हैवानियत के मामले में स्पेशल पुलिस ऑफिसर को गिरफ्तार किया गया और उसके बाद मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई तो सियासत शुरू हो गई. इस मामले में बीजेपी के जो मंत्रियों के वीडियो वायरल हुए थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि क्राइम ब्रांच को किसी की गिरफ्तारी से पहले सोचना होगा. सत्तारूढ़ पीडीपी के सहयोगी दल बीजेपी के मंत्री लाल सिंह और प्रकाश चंदर गंगा ने पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ आपत्तिजनक बयान दिया. वीडियो में सुनाई दे रहा है कि प्रकाश चंदर गंगा ने जिले के एसएसपी को धमकी भरे अंदाज में कहा कि किसी की भी गिरफ्तारी से पहले उन्हें सोचना होगा और यहां जंगल राज नहीं होगा. प्रदेश के दूसरे बीजेपी मंत्री लाल सिंह ने कहा था कि अगर कार्इम ब्रांच ने इस मामले में किसी को गिरफ्तार किया तो हम आंदोलन करेंगे. जब ये मुद्दा उछला तो सियासत इस कदर हावी हुई कि सत्तारूढ़ पीडीपी और सहयोगी बीजेपी के बीच तल्खी बढ़ती गई. हालांकि मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने किसी तरह से झुकने से इन्कार कर दिया और उसके बाद कुल आठ लोगों की गिरफ्तारी हो पाई.

9 अप्रैल को वकीलों ने चार्जशीट दाखिल करने का विरोध किया और 11 अप्रैल से जम्मू बंद बुलाया.

वकीलों ने किया चार्जशीट का विरोध, सीबीआई जांच की भी मांग

इस मामले में दूसरी बड़ी हैवानियत 9 अप्रैल को देखने को मिली, जब क्राइम ब्रांच चीफ ज्यूडिशियल मैजिस्ट्रेट की कोर्ट में इस मामले की चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी कर रही थी. जब क्राइम ब्रांच को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करनी थी, वकीलों के एक बड़े समूह ने क्राइम ब्रांच का विरोध शुरू कर दिया. उन्होंने इतना हंगाामा किया कि 9 अप्रैल को चार्जशीट दाखिल नहीं हो पाई और फिर क्राइम ब्रांच ने चार्जशीट 10 अप्रैल को दाखिल की. और ये भी तब हो पाया जब जम्मू-कश्मीर के कानून मंत्री ने दखल दिया. इसके बाद छह घंटे के बाद चीफ ज्यूडिशियल मैजिस्ट्रेट ने चार्जशीट स्वीकार कर ली. वहीं पुलिस ने इस मामले में ऐक्शन लिया और विरोध करने वाले वकीलों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया. हालांकि किसी भी वकील के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई, लेकिन वकीलों ने इसका विरोध करते हुए 11 अप्रैल और 12 अप्रैल को पूरे जम्मू-कश्मीर का बंद बुलाया और वो कठुआ जिला जेल के बाहर लगातार प्रदर्शन करते रहे. बताया जाता है कि कठुआ की बार असोशिएसन बीजेपी की राज्य इकाई से जुड़ी हुई है और वो सभी आरोपियों का बचाव कर रही है, क्योंकि सभी आरोपी हिंदू हैं.


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