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तेल का खेल अब ईरान पर भारी, अमेरिका ने पुराना टैंकर निकालने पर मजबूर कर दिया

ईरान का खार्ग द्वीप देश के तेल का 90 फीसदी से ज्यादा हिस्सा प्रोड्यूस करता है. यहां 3 करोड़ बैरल कच्चे तेल की स्टोरेज कैपेसिटी है. ये कैपिसिटी लगभग पूरी होने के कगार पर है. ईरान ने स्टोरेज कैपिसिटी बढ़ाने के लिए 30 साल पुराने टैंकर का इस्तेमाल करने का फैसला किया है.

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ईरान ने तेल स्टोरेज के लिए 30 साल पुराना टैंकर निकाला है. (प्रतीकात्मक तस्वीर, Reuters)

ईरान और अमेरिका के बीच शुरू हुए युद्ध के बाद से ही स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से ईंधन की सप्लाई ठप है. पहले तो ईरान ने यहां से गुजरने वाले तेल टैंकरों पर रोक लगाई. इससे पूरी दुनिया में तेल का निर्यात बाधित हुआ. फिर देखा देखी अमेरिका ने भी नाकेबंदी की. अब खबर है कि अमेरिकी नाकेबंदी ने तेहरान की परेशानी बढ़ा दी है.

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तेल की सप्लाई ठप होने के चलते ईरान का भंडार भरता जा रहा है. तेल स्टोर करने की जगह तक नहीं बची. इस परेशानी का हल निकालने के लिए ईरान ने 30 साल पुराने और बेकार हो चुके विशालकाय टैंकर 'नशा' को फिर से समंदर में उतार दिया है, ताकि उसमें तेल स्टोर किया जा सके.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान अचानक तेल का उत्पादन बंद नहीं कर सकता, क्योंकि इससे तेल कुओं को नुकसान हो सकता है. दूसरी ओर अमेरिकी प्रतिबंध और हॉर्मुज में नाकेबंदी के कारण उसका निर्यात ठप हो गया है. ऐसे में ईरान ने एक्सट्रा तेल स्टोर करने के लिए एक अस्थायी समाधान निकाला है. वह 30 साल पुराने टैंकर को समुद्र में उतारकर उसमें तेल जमा करेगा. ईरान का 30 साल पुराना टैंकर 'नशा' कई सालों से बेकार पड़ा था. लेकिन अब इसे समुद्र में 'फ्लोटिंग स्टोरेज' के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा.

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ईरान का खार्ग द्वीप देश के तेल का 90 फीसदी से ज्यादा हिस्सा प्रोड्यूस करता है. यहां 3 करोड़ बैरल कच्चे तेल की स्टोरेज कैपेसिटी है. ये कैपिसिटी लगभग पूरी होने के कगार पर है. यहां केवल 1.3 करोड़ बैरल तेल रखने की जगह बची है, जबकि रोजाना वहां 10 से 11 लाख बैरल तेल आ रहा है. इस हिसाब से अगले 12-13 दिनों में स्टोरेज पूरी तरह से भर सकता है.

यह स्थिति ईरान के लिए बड़ी चुनौती बन गई है. अगर स्टोरेज पूरी तरह से भर गया तो उसे तेल उत्पादन कम करना पड़ेगा या बंद करना पड़ेगा. अगर तेल के कुएं को बंद किया जाता है तो इससे स्थायी नुकसान हो सकता है, क्योंकि इनको लगातार चलाए रखना जरूरी होता है. वहीं तेल निर्यात रुकने से ईरान की जेब को भी भारी नुकसान होगा.

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को बंद करने की अमेरिकी रणनीति एक सैन्य रणनीति भर नहीं रह गई है. यह ईरान के लिए एक आर्थिक दबाव साबित हो रहा है. मामला गंभीर इसलिए भी है, क्योंकि खार्ग द्वीप ईरान के कच्चे तेल का एक्सपोर्ट गेटवे (निर्यात द्वार) है. यहां कोई भी दिक्कत हुई तो ये पूरे देश के लिए आर्थिक संकट साबित हो सकती है. नशा टैंकर को फिर से चालू करना तेहरान के लिए समय खरीदने जैसा है, जो उसके हाथ से रेत सा फिसलता जा रहा है.  

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