भोपाल के कमला नेहरू अस्पताल अग्निकांड से जुड़ी बड़ी जानकारी सामने आई है. भोपाल नगर निगम (BMC) के फायर सेफ्टी ऑफिसर केएस परिहार ने बताया है कि कमला नेहरू अस्पताल में फायर सेफ्टी नॉर्म्स का पालन नहीं किया जा रहा था. आजतक से जुड़े रवीश पाल सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक BMC ने इस बाबत कई बार अस्पताल को नोटिस भी दिया था, इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन ने फायर सेफ्टी से जुड़े नियम-कायदों पर गंभीरता नहीं दिखाई. खबर के मुताबिक केएस परिहार ने कहा है,
'कई बार नोटिस देने के बावजूद कमला नेहरू अस्पताल ने फायर सेफ्टी नॉर्म्स का पालन नहीं किया. आग लगने के वक्त पहुंची हमारी टीम को अस्पताल में फायर सेफ्टी के उपकरण चालू नहीं मिले. अस्पताल बिना एनओसी के चल रहा था. उसने फायर सेफ्टी ऑडिट नहीं कराया था.'
केएस परिहार के हवाले से आजतक ने बताया कि अगर अस्पताल में फायर सेफ्टी के उपकरण पूरी तरह काम करते तो इस हादसे में मारे गए चारों मासूम बच्चों की जान बचाई जा सकती थी. साथ ही इसे बड़ा हादसा बनने से रोका जा सकता था.
4 बच्चों की जान चली गई
हमीदिया हॉस्पिटल कैंपस में बने कमला नेहरू अस्पताल में 8 नवंबर की रात आग लग गई थी. उस समय अस्पताल में 40 नवजात बच्चे थे. इनमें से 36 बच्चों को दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया. लेकिन 4 बच्चों की आग में झुलसकर मौत हो गई. कुछ मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक ये संख्या बढ़कर 5 हो गई है. घटना के बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हादसे की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं. उन्होंने इस घटना पर दुःख जताते हुए ट्वीट किया,
भोपाल के कमला नेहरू अस्पताल के चाइल्ड वार्ड में आग की घटना दुखद है. बचाव कार्य तेजी से हुआ. घटना की उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं. जांच एसीएस लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मोहम्मद सुलेमान करेंगे.
वहीं सूबे के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने अंदेशा जताया कि आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी थी. उन्होंने ये भी कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मृतक बच्चों के परिजनों को 4-4 लाख रुपए बतौर मुआवजा देने का ऐलान किया है. साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि जांच के बाद जो भी लोग दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी. इस बीच एक मृतक बच्चे के पिता आमिर की प्रतिक्रिया भी आई. उन्होंने आजतक से बातचीत में कहा,
"मैं 6 बजे अपने बच्चे से मिलकर गया था. 8:30 बजे क़रीब जब मैं वापस आया तो देखा कि यहां आग लगी हुई थी. फ़ायर ब्रिगेड आग बुझाने का काम कर रही थी. बहुत बुरा हाल था. रात 2-3 बजे बच्चों की पहचान के किए अस्पताल में अंदर पहुंचाया गया. वहीं मुझे जानकारी दी गई कि मेरा बच्चा अब नहीं रहा है."
आमिर ने बताया कि उनका बच्चा केवल 4 दिन का था, जिसकी बॉडी अभी तक उन्हें नहीं मिली है.