किस तरह नियुक्तियां की गई थीं?
JNU के एक प्रोफेसर हैं, अतुल सूद. उन्होंने कुलपति जगदीश कुमार द्वारा 9 केंद्रों के अध्यक्षों की नियुक्ति किए जाने के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था. अतुल सूद का कहना था कि अध्यक्षों की नियुक्ति का अधिकार स्पष्ट रूप से कार्यकारी परिषद के पास है. जबकि JNU के 9 केंद्रों के अध्यक्षों का चयन पहले कुलपति ने किया और इसके बाद इन नामों पर कार्यकारी परिषद ने मोहर लगाई. प्रोफेसर सूद ने नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए कोर्ट से नियुक्तियों पर तत्काल रोक लगाने की अपील की थी.वहीं इस मामले में दूसरे पक्ष की वकील मोनिका अरोड़ा ने हाईकोर्ट में कहा कि अध्यक्षों की नियुक्तियां नियम के अनुसार की गई हैं. उनके मुताबिक वीसी जगदीश कुमार ने विश्वविद्यालय के कानून के अनुच्छेद 4(5) के तहत उन्हें दिए गए अधिकार का प्रयोग करते हुए ये नियुक्तियां की हैं.

JNU की एक पुरानी तस्वीर. (साभार- पीटीआई)
अदालत ने फैसला सुनाते हुए क्या कहा?
हालांकि हाईकोर्ट ने अतुल सूद के पक्ष में फैसला सुनाया. जस्टिस राजीव शकधर और जस्टिस तलवंत सिंह की बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा,'प्रथम दृष्टया कुलपति केंद्रों/विशेष केंद्रों के अध्यक्षों को नियुक्त करने की शक्ति का प्रयोग नहीं कर सकते. पहली बार में गौर करने पर लगता है कि कुलपति द्वारा की गई नियुक्तियां अधिकार के बिना हैं.'कोर्ट का यह भी कहना था कि JNU के कानून के तहत कुलपति ऐसी शक्तियों का प्रयोग तभी कर सकता है, जब 'आपातकालीन स्थिति के चलते' तत्काल कार्रवाई करना जरूरी हो, इसके बाद कुलपति की कार्रवाई को संबंधित अथॉरिटी के पास मंजूरी के लिए भेजा जाता है.
सिंगल बेंच को दिया आदेश
प्रोफेसर अतुल सूद के वकील अभिक चिमनी ने इस मामले से जुड़ा एक और मुद्दा बेंच के सामने उठाया. उन्होंने अदालत को बताया कि 28 सितंबर को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने कुलपति द्वारा की गई नियुक्तियों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था. तब कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई 18 फरवरी 2022 तक के लिए स्थगित कर दी थी. अभिक चिमनी के मुताबिक मामला कोर्ट में लंबित होने के बाद भी बीती 8 अक्टूबर को कुलपति जगदीश कुमार ने अपनी आपातकालीन शक्तियों का प्रयोग करते हुए एक अन्य व्यक्ति को स्पैनिश, पुर्तगाली इटैलियन और लैटिन अमेरिकन स्टडीज/स्कूल ऑफ लैंग्युएज, लिट्रेचर और कल्चरल स्टडीज का अध्यक्ष बना दिया.फिलहाल इस मामले की जल्द सुनवाई के लिए अदालत ने एकल न्यायाधीश को निर्देश दिया है. कहा कि सिंगल बेंच सूद की रिट याचिका को 10 नवंबर, 2021 को निर्देशों के लिए सूचीबद्ध करे.











