इन दिनों ईरान के हालात देखकर किसी का भी दिल पसीज जाए. अमेरिका के साथ चल रहे तनाव और छठे महीने में दाखिल हो चुके संघर्ष ने वहां के आम लोगों की कमर तोड़ दी है. आलम ये है कि लोग अपनी जिंदगी बचाने और दो वक्त की रोटी का इंतजाम करने के लिए अजीबोगरीब तरीकों से पैसे जुटा रहे हैं.
ईरान में भूख का कहर! पेट पालने के लिए कोई बाल और पुराने कपड़े बेच रहा, कोई लैपटॉप किराए पर दे चला रहा घर
Iran-US Conflict Inflation: अमेरिका के साथ संघर्ष और बेकाबू महंगाई के बीच ईरान के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं. लोग अपने बाल, परफ्यूम की खाली बोतलें और पुराने कपड़े बेचने के साथ लैपटॉप किराए पर देकर जीने की जद्दोजहद कर रहे हैं.

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के ऑनलाइन क्लासिफाइड प्लेटफॉर्म्स पर ऐसी चीजें बिक रही हैं, जिन्हें आम दिनों में कोई देखना भी पसंद न करे. लोग हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं ताकि किसी तरह पैसे हाथ आ जाएं.
ईरान की "सर्वाइवल इकोनॉमी"
ईरानी न्यूज एजेंसी ILNA की रिपोर्ट्स बताती हैं कि देश में एक नई "सर्वाइवल इकोनॉमी" यानी जीने के लिए संघर्ष वाली अर्थव्यवस्था पनप रही है. हालात ये हैं कि लोग अपने बाल तक बेचने को मजबूर हैं. जी हां, ब्यूटी सैलून या हेयर एक्सटेंशन के लिए नेचुरल बालों की ऑनलाइन खरीद-फरोख्त तेजी से बढ़ गई है. लोग अपने बालों की लंबाई, रंग और क्वालिटी के हिसाब से इन्हें ऑनलाइन बेच रहे हैं ताकि घर का खर्च चल सके और किसी तरह गुजारा हो सके.
सिर्फ बाल ही नहीं, बल्कि इस्तेमाल किए हुए परफ्यूम की खाली बोतलें, पुराने काम वाले जूते और सेकंड-हैंड कपड़े भी धड़ल्ले से लिस्ट हो रहे हैं. लोग कई छोटी-छोटी और बेकार सी दिखने वाली चीजों को एक साथ एक ही लिस्टिंग में बेच रहे हैं ताकि कोई खरीदार मिल जाए.
इतना ही नहीं, लोग अपने लैपटॉप और जरूरी गैजेट्स किराए पर देने लगे हैं ताकि कुछ एक्स्ट्रा कमाई हो सके. कई परिवार तो ऐसे हैं जो बढ़ती कीमतों की वजह से नया लैपटॉप खरीदने में असमर्थ हैं, इसलिए वो पढ़ाई या ऑफिस के काम के लिए किराए पर लैपटॉप ले रहे हैं.
बेकाबू महंगाई ने तोड़ी कमर
इस आर्थिक तबाही की सबसे बड़ी वजह बेकाबू महंगाई है. ईरान के स्टैटिस्टिकल सेंटर के हवाले से सामने आया है कि सालाना महंगाई दर बढ़कर 66 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जबकि साल-दर-साल महंगाई दर 87.9 प्रतिशत दर्ज की गई है.
हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि लोगों को अब दवाइयों और बेसिक हेल्थकेयर के लिए भी किस्तों का सहारा लेना पड़ रहा है. अमेरिका के साथ शांति वार्ताओं को लेकर चाहे जो दावे किए जा रहे हों, लेकिन सच ये है कि आम ईरानी परिवार के लिए हर एक रियाल और हर एक दिन की जंग सबसे बड़ी सच्चाई बन चुकी है.
वीडियो: दुनियादारी: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान-ओमान का नया प्लान क्या है?












