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जापान में भूकंप ने मचाई भारी तबाही, हाईटेक देश अंधेरे में डूबा, पानी के लिए भी तरसे लोग

जापान के कुमामोटो में 28 जुलाई को 7.1 तीव्रता का भूकंप आया. इसमें 30 लोगों की मौत हो गई, यात्सुशिरो में भारी तबाही हुई और 58,000 घरों में बत्ती-पानी गुल है. हाईटेक टेक्नोलॉजी वाला देश भी प्राकृतिक आपदा की वजह से लाचार नजर आ रहा है.

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भूकंप से मरने वालों की संख्या बढ़कर 30 हो गई है. (फोटो: इंडिया टुडे)

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  • 28 जुलाई को जापान के कुमामोटो प्रांत में 7.1 तीव्रता के भूकंप से कम से कम 30 लोगों की मौत हुई और यात्सुशिरो शहर में कई घर, सड़कें और इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं।
  • जापान टेक्टोनिक प्लेटों के मिलने वाले क्षेत्र में स्थित है, इसलिए यहां भूकंप का खतरा अधिक है, जिसके कारण देश ने भूकंप 대비 एडवांस्ड वॉर्निंग सिस्टम और कड़े निर्माण कोड लागू किए हैं।
  • प्रमुख सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन में हजारों मिलिट्री कर्मी जुटाए गए हैं, साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में जल और बिजली की आपूर्ति बहाल करने हेतु कार्य जारी है, जिसमें समय लगने की संभावना है।

जापान के दक्षिणी हिस्से में आए भूकंप से मरने वालों की संख्या बढ़कर 30 हो गई है. 28 जुलाई को कुमामोटो प्रान्त में 7.1 तीव्रता का एक शक्तिशाली भूकंप आया. इस भूकंप से भारी तबाही हुई. यात्सुशिरो शहर में कई घर जमींदोज हो गए. साथ ही सड़कें फट गईं और इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं. इस शहर के लगभग 58,000 घरों में बिजली और पानी की सप्लाई ठप है. जनजीवन पूरी तरह से बेहाल है.

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हजारों लोग प्रभावित, अंधेरे में डूबे घर

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बचावकर्मी मलबे में फंसे लोगों को बचाने के लिए तेजी से काम कर रहे हैं. प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन को मजबूत करने के लिए हजारों मिलिट्री के लोगों को भेजा है. समुद्र के किनारे बसे यात्सुशिरो शहर के लगभग 58,000 घरों में से कई में अभी भी पानी और बिजली नहीं है. 

एक अधिकारी मात्सुशिता ने कहा कि अभी यह अंदाजा लगाना जल्दबाजी होगी कि बुरी तरह खराब पानी की मेन लाइनें कब ठीक होंगी. उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रोसेस में दिन, हफ्ते या महीने भी लग सकते हैं. उन्होंने कहा कि गर्मी में पानी की कमी से खास तौर पर मुश्किल हो रही है. 

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बिल्डिंग के टॉयलेट इस्तेमाल करने लायक नहीं रहे, इसलिए अधिकारियों ने बाहर सीवर मैनहोल पर टेम्परेरी इमरजेंसी टॉयलेट लगा दिए. वहां रहने वालों को लगभग 35°C (95°F) के टेम्परेचर और ह्यूमिडिटी का सामना करना पड़ रहा था.

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सबसे ज्यादा भूकंप वाला देश

जापान दुनिया के सबसे ज्यादा भूकंप आने वाले देशों में से एक है, क्योंकि यह ऐसी जगह पर है, जहां चार बड़ी टेक्टोनिक प्लेट मिलती हैं. CNN के मुताबिक, लगातार खतरे के बावजूद, जापान ने भूकंप की तैयारी में भारी निवेश किया है. इसमें एडवांस्ड अर्ली वॉर्निंग सिस्टम, डिजास्टर रिस्पॉन्स मैकेनिज्म, निकासी प्रोटोकॉल और भूकंप-रेजिस्टेंट इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं.

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जापान ने 1980 के दशक में बिल्डिंग बनाने के लिए कड़े नियम लागू किए, जो 1995 के कोबे भूकंप के दौरान बहुत असरदार साबित हुए. उस भूकंप में 6,000 से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी. जांच में पता चला कि जो ज्यादातर इमारतें गिरी थीं, वे बदले हुए कोड लागू होने से पहले बनी थीं.

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