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पढ़ाई के नाम पर घूसखोरी कोचिंग सेंटर खोल डाला, रेलवे में प्रमोशन भकोसना सिखाते थे

सीबीआई जांच में दावा किया गया है कि वेस्टर्न रेलवे में प्रमोशन परीक्षा से पहले उम्मीदवारों को कथित तौर पर ऐसी कोचिंग दी गई, जहां रिश्वत देने-लेने और विजिलेंस जांच से बचने के तरीके सिखाए गए.

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रिश्वत जुटाने के तरीके सिखाने वाली कोचिंग की बात सीबीआई जांच में सामने आई है. (फोटो- India Today)

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  • CBI की जांच में पता चला कि वेस्टर्न रेलवे में SWI पद के प्रमोशन परीक्षा की तैयारी के नाम पर चलने वाली एक कोचिंग में घूसखोरी के तरीके और विजिलेंस जांच से बचने के पैंतरे सिखाए जा रहे थे।
  • घूसखोरी को बढ़ावा देने वाली ये कोचिंग एक सीनियर रेलवे अधिकारी की पत्नी के नाम पर किराए की जमीन पर संचालित थी, जहां परीक्षा में नकल और लोन लेने के तरीके भी बताए जाते थे।
  • घूसखोरी के आरोपों के बाद वेस्टर्न रेलवे के विजिलेंस विभाग की शिकायत पर मामला CBI को सौंपा गया है, और जांच में लोन और पैसों के लेनदेन के रिकॉर्ड मिले हैं।

घूसखोरी सिखाने वाली कोचिंग के बारे में सुना है? यानी ऐसी कोचिंग, जहां रिश्वत के लिए पैसे जुटाने का तरीका सिखाया जाता हो. या विजिलेंस की जांच में पूछताछ का सामना कैसे करना है ये भी बताया जाता हो. नहीं सुना है तो हम सुनाते हैं. CBI की एक जांच में पता चला है कि वेस्टर्न रेलवे में स्टाफ वेलफेयर इंस्पेक्टर (SWI) के पद पर प्रमोशन का एग्जाम देने वाले लोगों के लिए एक ऐसी कोचिंग चलती थी, जहां उन्हें घूसखोरी के लिए पैसे जुटाने का तरीका सिखाया जाता था.

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कोचिंग को यूं तो एग्जाम के सिलेबस की पढ़ाई के नाम पर चलाया जा रहा था, लेकिन क्लास में आने वाले लोगों को कथित तौर पर घूसखोरी के तरीके और विजिलेंस की जांच से बचने के पैंतरे सिखाए जा रहे थे. TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, ये क्लास जिस जगह पर चल रही थी, वह कथित तौर पर एक सीनियर रेलवे अफसर की पत्नी के नाम पर किराये पर ली गई थी. रेलवे के एक सीनियर अफसर के अनुसार, इस कोचिंग में उम्मीदवारों को ये भी बताया गया कि प्रमोशन वाली परीक्षा में नकल कैसे कराई जाएगी, इसमें रेलवे अधिकारी क्या मदद करेंगे, विजिलेंस की पूछताछ का जवाब कैसे देना है.

रेलवे सूत्रों ने बताया कि SWI के पद पर प्रमोशन पाने के लिए घूस का रेट 2 लाख से 5 लाख रुपये के बीच तय किया गया था. जांच करने वालों को शक है कि कुछ कैंडिडेट्स ने मनचाहे नतीजे के लिए 3 लाख से 5 लाख रुपये तक दिए थे. रिश्वत के लिए क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी से लोन कैसे मिलेगा, इसका तरीका भी इसी कोचिंग वालों ने समझाया. एक अधिकारी ने बताया कि विभागीय जांच में परीक्षा से ठीक पहले लोन लेने के केस तेजी से बढ़े थे. रोचक बात ये है कि ज्यादातर लोन परीक्षा की डेट्स के आसपास ही लिए गए थे. 

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ये केस सबसे पहले 16 मार्च 2024 को सामने आया था. कंप्यूटर आधारित परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप लगे. बताया गया कि प्रमोशन वाली परीक्षा में बैठने वाले 100 उम्मीदवारों में से 4 को 87.67% से 90.33% के आसपास नंबर मिले थे. बाद में वेस्टर्न रेलवे के विजिलेंस विभाग ने इसकी शिकायत की और केस CBI को सौंप दिया गया. CBI के सूत्रों ने बताया कि इन चारों कर्मचारियों ने परीक्षा से ठीक पहले लोन लिया था. परीक्षा के समय के आसपास एटीएम से पैसे निकालने और रिश्तेदारों और दोस्तों के जरिए पैसों के लेनदेन का पता चला है.

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