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पाकिस्तान हमसे ज्यादा खुश कैसे है?

कौन काट रहा है हमारी खुशियों की पतंग? इंडिया हैप्पिनेस इंडेक्स पर पाकिस्तान, बांग्लादेश से भी पीछे हैं. कौन दुखी किए पड़ा है हमारे देश को?

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तस्वीर सांकेतिक है. ज़्यादा लोड नहीं लेना है.

हम बोलेंगे तो बोलोगे कि बोलता है. लेकिन सच यही है. पाकिस्तान वाले इंडिया वालों से ज्यादा खुश हैं. अरे भैया बाकायदे सर्वे हुआ है इसका. जिसमें भारत पिछले साल से एक पायदान और नीचे सरक गया है. पिछले साल की रैंकिंग 117 थी. अबकी बार 118. सब पनौती कहां लगी पड़ी है इसका कुछ पता नहीं चल रहा. ये वर्ल्ड हैप्पिनेस रिपोर्ट 2016 है. जो पब्लिश की है Sustainable Development Solutions Network (SDSN) ने. यूनाइटेड नेशंस का ये पूरा प्रोग्राम है. इसके लिए देशों में GDP, लाइफ स्टाइल, सोशल सपोर्ट और अपनी इच्छी से जिंदगी जीने की आजादी का सर्वे किया गया. बताते हुए संकोच हो रहा है. लेकिन पाकिस्तान, चीन, बांग्लादेश, भूटान से भी पीछे हैं हम. सॉरी यार. इस खबर से जो थोड़ी बहुत हैप्पिनेस थी वो भी चली गई चूल्हे भार में. पिछले साल स्विटजरलैंड सबसे ज्यादा हैप्पी था. इस साल डेनमार्क. चीन 83 नंबर पर है. बांग्लादेश 110 पर. लेकिन पाकिस्तान 92 रैंक पर कैसे है भैया? तालिबान फालिबान, बम बंदूकों के बाद भी. और तो और सोमालिया भी इंडिया से आगे है. 76 नंबर पर.

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भारत की हैप्पिनेस को चूना लगाने वाले लोग कौन हैं?

यह सर्वे सामने आने के बाद लल्लन ने रिसर्च की. इसमें जो फैक्ट्स सामने आए वो चौंकाने वाले हैं. दरअसल हमको दुखी करने के लिए एलियन नहीं आते. GDP और सोशल इंजीनियरिंग सब अपनी जगह ठीक है. हमारी खुशी की डिमांड और सप्लाई एकदम दुरुस्त है. बीच में कहीं लीकेज है. कुछ लोग हैं जो बीच में हमारी खुशी दबा कर बैठ जाते हैं. देखो कौन हैं ये लोगः 

1. कपिल शर्माः कॉमेडियन हैं. शो में बीवी की शक्ल पर जोक्स बना कर लोगों के जबरदस्ती गुदगुदी करते हैं. इस सेंस ऑफ ट्यूमर को निकाल दिया चैनल के डॉक्टर्स की टीम ने. फैन्स के बीच गहरीनिराशा. इंडिया दो खेमे में बंट गया. कपिल और कृष्णा की लड़ाई ने देश की खुशियों को नजर लगा दी. 

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 2. इंद्राणी मुखर्जी: दुनिया GDP और दुनियादारी में प्रगति कर रही थी तो इस औरत ने हमें टीवी के सामने जकड़ रखा था. आदमी ऑफिस से जल्दी घर आता था टीवी पर मैच देखने. दिखती थी इंद्राणी. दोपहर में घर का सब काम निपटा कर घरेलू औरतें टीवी के सामने छोटी बहू देखने बैठें तो दिखें इंद्राणी. खुशियां खतम फिनिश ओवर. 

3. कन्हैयाः एक कन्हैया थे जो पहाड़ ननकई उंगली पर उठा लेते थे. ये वाले आसमान सिर पर उठा लेते हैं. आजादी रावण की तरह इनकी कांख में दबी है. लेकिन बगल में छोरा गांव में ढिंढोरा वाला हाल. मांग रहे हैं आजादी. भाई की बात लॉजिकल है लेकिन उस पर अब इत्ते किस्से चल चुके हैं कि सब फिल्मी लगता है. आधी रात को जब मुलुक गहरी नींद में सो रहा था. इन्होंने आजादी मांग कर जगा दिया. बस हो गई गड़बड़. 

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4. विजय माल्याः इस आदमी से पिछले रास्ते से सबको खुश किया. लेकिन यहां का आदमी एहसान फरामोश. सरकारी बैंकों का सताया आदमी चाहता तो बैंकों के सताए जाने पर खुश हो सकता था. लेकिन नहीं. वो चीखता रहा चिल्लाता रहा. वो बैंकों को लूट ले गया या इनकी खुशियां, कुछ ठीक ठीक रिकार्ड नहीं है. 

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 5. श्री श्री रविशंकरः फाइनेंसियल इयर के एकदम लास्ट में छीछालेदर कर दी. दिल्ली की गुल्ली उड़ गई. वर्ल्ड कल्चर फेस्ट से. जो नहीं आ पाया इसमें वो भी दुखी था. शिट यार. हम नहीं पहुंचे. सोशल मीडिया पर तमाशा चल रहा था. जोक्स उड़ रहे थे. लेकिन सच तो ये है कि खुशी कल्चर फेस्ट के बाद बचे कचरे का साथ बुहार दी गई.  

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6. नवाज शरीफः सीधे सीधे तो इनको ब्लेम नहीं कर सकते. लेकिन हम जानते हैं. इंडिया में कुछ भी गड़बड़ होती है. तो हाथ पाकिस्तान का होता है.  

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अब जब अपने ही हमारी वाट लगाने में लगे हुए हैं तो किससे उम्मीद की जाए. भाई केआरके. बस तू धोखा न देना.

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