दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक के खिलाफ स्टूडेंट्स का प्रोटेस्ट. उसी भीड़ में हल्की नीली टी-शर्ट पहने मोहम्मद इरफान मजदूरों की अनसुनी पीड़ा सामने रख रहे थे. उनके मुताबिक, मजदूर 'देश का कार्यदाता' है. उनका कहना था कि भारत का मेहनतकश वर्ग सालों से सिस्टम का सताया हुआ है. उन्हें बस आस थी कि छात्रों की गूंज के बीच कोई देश के मजदूर की खामोश चीख भी सुन ले. दी लल्लनटॉप ने इरफान की आवाज को बुलंद किया.
CJP प्रोटेस्ट से वायरल हुए इरफान, स्कूल नहीं गए लेकिन संसद से सोशल मीडिया तक लोग दे रहे दाद!
नीट पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शन में Mohammad Irfan भी शामिल हुए. वह अपनी बातों और मजबूत इरादों की वजह से आज पूरे देश में उनकी चर्चा हो रही है. प्रदर्शन के दौरान उन्होंने मजदूरों की अनसुनी पीड़ा साझा की थी.

मजदूर की बात से शुरू हुई बातचीत संविधान, लोकतंत्र और गरिमा के साथ जीने के अधिकार तक जा पहुंची. इरफान के वीडियो वायरल हुए. देश के लोग उन पर प्यार लुटाने लगे. देश की राजनीतिक व्यवस्था तक उनकी गूंज पहुंची. लोकसभा में नेता विपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी खुद इरफान के घर उनसे मिलने पहुंचे.
प्रियंका गांधी से क्या बात हुई?27 जुलाई को राहुल गांधी दिल्ली में इरफान के घर गए. राहुल ने बहन प्रियंका गांधी वाड्रा से फोन पर इरफान की बात कराई. इस दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने उनसे कहा कि वे राहुल गांधी से शादी करने के लिए कहें, क्योंकि राहुल उनकी बात नहीं मानते.
इस पर इरफान ने भी हंसते हुए मजाकिया अंदाज में जवाब दिया कि वे खुद नहीं चाहते कि राहुल गांधी शादी करें. जाते-जाते राहुल गांधी ने इरफान को परिवार संग प्रियंका गांधी से मिलने के लिए कहा. राहुल इरफान को संसद भी लेकर जाएंगे, ताकि वे वहां कि व्यवस्था से भी रूबरू हो सकें. इस बीच संसद में गौरव गोगोई ने भी इरफान की कविता का जिक्र किया.
जंतर-मंतर पर लल्लनटॉप रिपोर्टर रजत पांडे ही उनसे सबसे पहले मिले थे. रजत बताते हैं,
“इरफान से पहली मुलाकात मुझे हमेशा याद रहेगी. नीले रंग की टी-शर्ट पहने… सहमा, डरा हुआ सा. उन्होंने बताया भी कि वे डर रहे थे कि कोई उनसे ये ना पूछ ले कि वे स्टूडेंट तो हैं नहीं तो प्रोटेस्ट में क्या करने आए हैं. मेरे लोगों से बात करने के दौरान वे भीड़ से एकदम से निकलकर आए. मजदूरों के मुद्दे पर बोले और गायब हो गए. उनकी बातें बहुत सच्ची सी थीं. उन्हें तलाशा. बात की. उन्होंने जो बताया वो सब ने सुना. उनके कहे को तलाशते हुए उनकी बस्ती पहुंचे. स्मैक की समस्या बताते हुए उन्होंने श्रमिकों की बात की. परिवार से मिलवाया.”
रजत ने आगे बताया कि CJP प्रोटेस्ट में जब 20 जुलाई को लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागे गए तो इरफान भी इसका शिकार हुए. उन्होंने बताया कि पुलिस ने उनका सिर पैर में फंसाकर मारा. प्रोटेस्ट के बाद से इरफान के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं. तमाम लोग इरफान की आर्थिक मदद करने की बात कर रहे. लेकिन इरफान का कहना है कि अगर वे मदद लेते हैं, तो ऐसा ना हो कि सरकार उन पर विदेशी फंडिंग जैसे आरोप लगा दे.
27 जुलाई की शाम 4 बजे लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इरफान से मिलने पहुंचे. इरफान ने श्रमिकों के मुद्दे बताते हुए राहुल से भी कह दिया अगर वो सत्ता में आए और उन्होंने श्रमिकों के लिए काम नहीं किया, तो वे उनके (राहुल गांधी के) भी विरोध में बोलेंगे. 26 जुलाई के बाद से इरफान की दुनिया बदल गई. लोग उनसे मिलने जा रहे हैं. उनका इंटरव्यू कर रहे हैं. बहुत से लगों ने उनके हालात बेहतर होने की भी उम्मीद जताई.
स्कूल नहीं जा सके, लेकिन जीवन को खूब समझते हैंदी लल्लनटॉप के रिपोर्टर रजत पांडे से बात करते हुए इरफान ने बताया कि वे स्कूल नहीं गए. उनके पास विद्यालय से मिला ज्ञान नहीं है. लेकिन गुरबत और मेहनतकश जिंदगी ने उन्हें काफी कुछ सिखा दिया. 35 साल के इरफान लोकतंत्र और संविधान जैसे मुद्दों पर ऐसी बेबाक राय रखते हैं कि पत्रकार से लेकर पॉलिटिशियन तक हक्के-बक्के रह जाएं.
हैरानी इसी बात की है कि एक शख्स जो स्कूल नहीं गया, वो इतने संजीदे मुद्दों पर इतनी साफगोई के साथ अपनी बात कैसे रख देता है? मसलन, छात्रों के प्रोटेस्ट पर इरफान की राय पर गौर करिए. इरफान कहते हैं कि छात्र यही तो चाहते थे कि सरकार उनकी आवाज सुने. इसमें एक बोध है. जनता और सरकार का आपसी रिश्ता है.
व्यक्ति की गरिमा का सवालसरकार यानी ताकत, जिसका इस्तेमाल एक मजलूम को इंसाफ दिलाने से लेकर किसी जालिम को बचाने तक, दोनों में ही इस्तेमाल किया जा सकता है. छात्रों की आवाज सरकार सुने. भूख हड़ताल पर बैठे सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक का दर्द सुने. लेकिन कैसे? उन्हें सम्मान देकर. उनकी गरिमा का ख्याल रखते हुए सरकार उनकी बात सुने. यह सब उन्होंने लल्लनटॉप रिपोर्टर विकास वर्मा से कहा.
मोहम्मद इरफान के बारे में विकास वर्मा कहते हैं,
“इरफान ने सरकार से जनता के साथ गरिमा का ख्याल रखते हुए बातचीत की जो बात कही, वो उनकी निजी राय नहीं है. गरिमा के साथ जीने का हक एक मूलभूत अधिकार है, जो भारतीय संविधान ने देश के हर नागरिक को दिया है. इरफान सिस्टम को यही याद दिलाते हैं.”
विकास ने आगे कहा कि इरफान के मुताबिक प्रोटेस्ट में सोनम वांगचुक को स्टेज से जबरन उठाकर ले जाना और छात्रों को पुलिसिया लाठीचार्ज या आंसू गैस से जवाब देना संविधान में नागरिकों को दिए गरिमा से जीने के अधिकार के खिलाफ है. इरफान स्कूल में तो नहीं पढ़े हैं लेकिन संविधान की प्रस्तावना को पूरा सुनाते हुए सरकार को उसमें लिखी 'व्यक्ति की गरिमा' तक छोड़कर आते हैं.
मजदूरों का दर्दजंतर-मंतर पर मोहम्मद इरफान ने शुरुआत में मजदूरों के जो मुद्दे उठाए, वे भी गरिमा मांगते हैं, सम्मान की मांग करते हैं. उनका कहना है कि दिन में 500 रुपये कमाने वाला मजदूर अपने परिवार की भूख कैसे मिटाए और बच्चों को शिक्षा कैसे दे. अगर परिवार में कोई बीमार हो जाए तो 500 रुपये की दिहाड़ी वाला मजदूर इलाज कैसे कराए. 12-14 घंटे काम कराया जाता है. उन्होंने मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी 18 हजार रुपये करने की मांग की.
कैसी है इरफान की लाइफ?दी लल्लनटॉप की टीम मोहम्मद इरफान के घर भी गई थी. दिल्ली के सावदा की जेजे कॉलोनी में उनका घर है. ये घर अधूरा है. छत पूरी बनी नही है. घर में कंस्ट्रक्शन चल रहा है. इरफान बर्फ बेचकर गुजारा करते हैं. पढ़ाई-लिखाई नहीं हुई, तो गूगल से सीखना शुरू किया. इंटरनेट पर गूगल और यूट्यूब के सहारे उन्होंने नॉलेज हासिल की. संवेदनशील मुद्दों को समझा.
यह भी पढ़ें: 'CJP प्रोटेस्ट में शामिल छात्रों पर एक्शन नहीं होगा, नाबालिग रिहा होंगे,' सुप्रीम कोर्ट का आदेश
अदम गोंडवी, दुष्यंत कुमार और रामधारी सिंह दिनकर की पंक्तियां उन्हें मुंहजबानी याद हैं. जहां उनका घर है, वो इलाका नशे की चपेट में है. बच्चों के नशा करने से पैरेंट्स परेशान हैं. इन सब हालात से बचते-बचाते इरफान बाहर निकले हैं. अब वे देश का एक चर्चित चेहरा बन चुके हैं, जो सत्ता से जवाबदेही की मांग करता है, और अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करता है.
वीडियो: CJP के विरोध प्रदर्शन में आए रेड़ी लगाने वाले इरफान ने क्या बोल दिया?













